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गर्भावस्था में क्या खाएं: तिमाही दर तिमाही डाइट चार्ट और एक दिन का नमूना मेन्यू

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

उबकाई वाले पहले तीन महीनों से जलन वाले आखिरी हफ्तों तक — भारतीय रसोई से गर्भवती की थाली कैसे बनाएं, कितनी मात्रा में और किस समय।

जब तड़के की महक से भी उबकाई आए — पहले तीन महीने

गर्भ की खबर के दो हफ्ते बाद ही वो सुबह आती है जब तड़के की महक नाक तक पहुंचते ही उल्टी हो जाती है। करीब 70-80 फीसदी महिलाओं को पहली तिमाही में उबकाई होती है — चौथे-छठे हफ्ते में शुरू होकर 12-14वें हफ्ते तक यह अपने आप ढलने लगती है। इन हफ्तों में संतुलित थाली का लक्ष्य छोड़िए; जो टिक जाए, वही थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाइए।

खाली पेट उबकाई सबसे तेज़ होती है — रात को ही बिस्तर के पास 4-5 सूखे टोस्ट या मुरमुरे रख लें और आंख खुलते ही लेटे-लेटे खाकर दस मिनट बाद उठें। हर दो-ढाई घंटे पर कुछ छोटा रखें: नींबू-नमक वाला चावल, दही-चावल, उबला आलू, केला, नारियल पानी, अदरक वाला गुनगुना पानी। 24 घंटे में पानी भी न रुके या वज़न घटने लगे तो उसी दिन डॉक्टर को दिखाएं।

एक चीज़ किसी हाल में न छूटे: रोज़ 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड। शिशु की नर्व ट्यूब गर्भ के करीब 28वें दिन तक बंद हो जाती है, यानी टेस्ट पॉज़िटिव आने तक यह काम शुरू हो चुका होता है। पालक और चने में फोलेट है, पर अकेली थाली से इतनी मात्रा नहीं मिलती — पीएचसी और आंगनवाड़ी से आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की गोलियां मुफ्त मिलती हैं।

दूसरी तिमाही: खून बनाने वाली थाली

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के मुताबिक भारत में लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला को एनीमिया है — इसीलिए सरकारी कार्यक्रम में गर्भावस्था के दौरान कम से कम 180 आयरन-फोलिक एसिड गोलियां मुफ्त दी जाती हैं। गोली दूध या चाय के साथ नहीं, खाने के एक घंटे बाद नींबू पानी के साथ लें; विटामिन सी आयरन का सोखना कई गुना बढ़ाता है, जबकि तुरंत बाद पी गई चाय उसे बेकार कर देती है। आयरन और कैल्शियम की गोली में दो घंटे का फासला रखें।

आयरन के सस्ते स्रोत यहीं हैं: एक कटोरी पकी पालक, मुट्ठी भर (करीब 30 ग्राम) भुना चना, एक चम्मच गुड़, अंकुरित मूंग, चुकंदर और 3-4 खजूर — शाम की चाय की जगह गुड़-चना और छाछ रखिए। कैल्शियम रोज़ करीब 1000 मिलीग्राम चाहिए: दो गिलास दूध, या एक गिलास दूध के साथ एक कटोरी दही और 50 ग्राम पनीर; दूध न भाए तो दही, छाछ, रागी और तिल। सबसे आसान नाश्ता रागी हलवा है — 2 बड़े चम्मच रागी आटा 1 छोटे चम्मच घी में भूनकर, 1 कप दूध और 1 बड़ा चम्मच गुड़। प्रोटीन के लिए दिन में दो बार दाल (एक कटोरी में करीब 7 ग्राम) और अंडा या सत्तू।

तीसरी तिमाही: सीने की जलन, कब्ज़ और आखिरी हफ्तों का खाना

सातवें महीने के बाद बढ़ता गर्भाशय पेट को ऊपर दबाता है और खाते ही सीने में जलन होती है। तीन बड़े खानों की जगह पांच-छह छोटे खाने करें, रात का खाना सोने से दो घंटे पहले खत्म करें और सोते समय दो तकिए लगाकर बाईं करवट लेटें। कब्ज़ के लिए दिन में 8-10 गिलास पानी, रोज़ एक फल और सलाद, हफ्ते में तीन दिन दलिया या बाजरे की रोटी, और सुबह खाली पेट भिगोए 2 अंजीर या 4-5 मुनक्के। दिमाग के विकास के लिए हफ्ते में तीन दिन 4-5 अखरोट और रोज़ एक छोटा चम्मच पिसी अलसी दाल में मिलाएं।

पूरी गर्भावस्था में 10-12 किलो वज़न बढ़ना सामान्य है और दूसरी-तीसरी तिमाही में रोज़ सिर्फ करीब 350 अतिरिक्त कैलोरी चाहिए — एक केला, एक गिलास दूध और मुट्ठी भर मूंगफली जितना, दो लोगों का खाना नहीं। इनमें से कुछ भी दिखे तो उसी दिन डॉक्टर के पास जाएं: तेज़ सिरदर्द के साथ धुंधला दिखना, हाथ-मुंह की अचानक सूजन, खून आना, पानी जैसा रिसाव, 12 घंटे में हलचल का साफ कम होना, या बुखार के साथ पेशाब में जलन। 108 एम्बुलेंस मुफ्त है।

एक दिन का नमूना मेन्यू (दूसरी और तीसरी तिमाही)

उठते ही: भिगोए 5 बादाम और 2 अखरोट के साथ एक गिलास दूध या रागी हलवा। नाश्ता: 2 पराठे दही के साथ या 3 इडली-सांभर, और एक उबला अंडा। 11 बजे: एक फल — केला, अमरूद या संतरा। दोपहर: 2 फुल्के + एक कटोरी दाल + एक कटोरी हरी सब्ज़ी + आधी कटोरी चावल + दही + सलाद। शाम: गुड़-चना, या एक गिलास सत्तू (2 बड़े चम्मच सत्तू, पानी, नमक-नींबू), या भुनी मूंगफली और छाछ। रात: 2 रोटी + पनीर या चने की सब्ज़ी, या मूंग दाल की खिचड़ी। सोने से पहले: आधा गिलास दूध।

थाली का अनुपात मत बदलिए: आधी थाली सब्ज़ी-साग-सलाद, चौथाई प्रोटीन और चौथाई रोटी-चावल। आंगनवाड़ी में नाम दर्ज कराइए — वहां टेक-होम राशन, गोलियां और वज़न की जांच मुफ्त हैं, और हर महीने की 9 तारीख को PMSMA के तहत विशेषज्ञ की मुफ्त जांच होती है। गर्भकालीन डायबिटीज़ निकले तो चावल, गुड़ और फल की मात्रा डॉक्टर तय करेंगे।

जिन चीज़ों से पूरी तरह बचें

कच्चा या आधा पका अंडा और मांस, बिना उबाला दूध, बाहर कटे रखे फल और एक दिन पुराना खाना — इनका संक्रमण गर्भावस्था में सिर्फ पेट खराब होकर नहीं रुकता, शिशु तक पहुंच सकता है। शराब की कोई मात्रा सुरक्षित नहीं मानी जाती, तंबाकू-गुटखा किसी रूप में नहीं, और चाय-कॉफी दिन में एक-दो छोटे कप तक।

वज़न की चिंता में खाना काटना और किसी के कहने पर काढ़े या हर्बल कैप्सूल लेना — दोनों नुकसानदेह हैं। प्रोटीन पाउडर, मल्टीविटामिन या कोई भी दर्द की दवा (खासकर एस्पिरिन जैसी) डॉक्टर से पूछे बिना शुरू न करें। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं।

दादी-नानी कहती हैं vs डॉक्टर कहते हैं

दादी: पपीता बिल्कुल मत खाना। डॉक्टर: यह आधा सच है — कच्चे और अधपके पपीते के पैपेन से बचना चाहिए, पर अच्छी तरह पका लाल पपीता आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है। इसी डर में सारे फल बंद कर देना गलत है — आम, केला और अमरूद मात्रा में अच्छे हैं। दादी: केसर वाला दूध पिओगी तो बच्चा गोरा होगा — रंग जीन तय करते हैं, केसर नहीं; वही पैसा अंडे, दूध और दाल पर लगाइए।

घी ज़्यादा खाने से डिलीवरी आसान होने का भी कोई प्रमाण नहीं, और गरम-ठंडे की सोच में पूरी चीज़ें बंद कर देने से पोषण का ही नुकसान होता है। पर बड़ों की कही कई बातें सही हैं — थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाना, भिगोई दालें, अंकुरित अनाज, तिल-गुड़ के लड्डू और मेथी-अजवाइन का पानी। जो खटके, उसे लिखकर 9 तारीख की जांच पर डॉक्टर से पूछ लीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: क्या गर्भावस्था में आम खा सकते हैं? — हां, धोकर, दिन में एक छोटा आम या कुछ फांकें। गर्भकालीन डायबिटीज़ हो तो डॉक्टर से मात्रा पूछकर ही खाएं।

सवाल: रोज़ कितना पानी पीना चाहिए? — करीब 8-10 गिलास यानी 2.5 लीटर; गर्मी वाले दिनों में थोड़ा और। पेशाब गाढ़ा पीला हो तो समझिए पानी कम पड़ रहा है।

सवाल: आयरन की गोली से कब्ज़ और उल्टी हो रही है, छोड़ दूं? — छोड़िए नहीं। समय बदलकर रात के खाने के बाद लें और पानी-फाइबर बढ़ाएं; फिर भी दिक्कत रहे तो डॉक्टर मात्रा बदलेंगे।

सवाल: रात में अचानक भूख लगे तो क्या खाऊं? — एक गिलास दूध, एक केला, भीगे बादाम या छोटी कटोरी दही-चावल; चिप्स-बिस्किट के पैकेट की जगह ये पास रखिए।

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