आख़िरी माहवारी शुरू होने का दिन और आपके चक्र की लंबाई — बस इतने से प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज का सप्ताह और स्कैन का समय यहाँ मिल जाएगा.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन — रक्तस्राव रुकने का दिन नहीं — और आपके चक्र की लंबाई. बस ये दो आँकड़े काफ़ी हैं.
यह साधन तीन चीज़ें देता है. पहली, प्रसव की अनुमानित तारीख़. दूसरी, आज आपको कितने सप्ताह और कितने दिन हुए और यह कौन सी तिमाही है — अस्पताल में हर बार यही आँकड़ा पूछा जाता है. तीसरी, एनॉमली स्कैन का समय और पूरे दिन (फ़ुल टर्म) की तारीख़.
जो यह नहीं देता, वह भी उतना ही साफ़ कहना ज़रूरी है. बच्चा लड़का है या लड़की, यह न यह बताता है और न भारत में बताना क़ानूनन जायज़ है — लिंग जाँच PCPNDT क़ानून के तहत अपराध है. बच्चे का वज़न, प्रसव सामान्य होगा या सिज़ेरियन, गर्भावस्था ठीक चल रही है या नहीं — इनमें से कुछ भी एक तारीख़ से तय नहीं होता.
और सबसे ज़रूरी बात: यह तारीख़ कोई इम्तिहान की तारीख़ नहीं है. सिर्फ़ चार प्रतिशत बच्चे ठीक अनुमानित तारीख़ पर पैदा होते हैं. बाक़ी आगे-पीछे आते हैं, और वह भी पूरी तरह सामान्य है.
गर्भावस्था के सप्ताह गर्भ ठहरने के दिन से नहीं गिने जाते. वे आख़िरी माहवारी शुरू होने के दिन से गिने जाते हैं — यानी जिस दिन गर्भ ठहरा, उस दिन काग़ज़ पर आपको पहले ही दो सप्ताह हो चुके होते हैं.
यह अजीब लगता है, पर वजह सीधी है. माहवारी की तारीख़ महिला को याद रहती है; गर्भ ठीक किस पल ठहरा, यह किसी को पता नहीं होता. इसलिए दुनिया भर के डॉक्टर उस दिन से गिनते हैं जो पता है.
इसका एक व्यावहारिक नतीजा यह है कि गर्भ का असली समय चालीस नहीं, क़रीब अड़तीस सप्ताह होता है. पर आपकी फ़ाइल पर, स्कैन पर और डॉक्टर की ज़बान पर हमेशा चालीस वाले हिसाब का सप्ताह होगा — इसलिए यह साधन भी वही हिसाब चलाता है.
ज़्यादातर मुफ़्त कैलकुलेटर मान लेते हैं कि आपका चक्र अट्ठाईस दिन का है, और पूछते तक नहीं. पर चक्र असल में इक्कीस से पैंतीस दिन तक का हो सकता है, और वह भी सामान्य है.
फ़र्क़ ओव्यूलेशन के दिन में होता है. माहवारी आने से क़रीब चौदह दिन पहले अंडा निकलता है — चक्र चाहे जितना लंबा हो. यानी बत्तीस दिन के चक्र वाली महिला का अंडा अठारहवें दिन निकलता है, चौदहवें नहीं.
इसलिए चक्र चार दिन लंबा हो तो असली तारीख़ चार दिन आगे खिसक जाती है. लंबे और अनियमित चक्र वाली महिलाओं की सिर्फ़ माहवारी की तारीख़ से निकाली तारीख़ हफ़्ते भर ग़लत हो सकती है — और ठीक उन्हीं को बेवजह 'आपका बच्चा छोटा है' सुनना पड़ता है.
पहली तिमाही में, ख़ासकर सात से तेरह सप्ताह के बीच हुआ स्कैन तारीख़ बताने में सबसे सटीक होता है. इस दौर में सारे बच्चे लगभग एक ही रफ़्तार से बढ़ते हैं, इसलिए बच्चे की लंबाई नापकर उम्र निकाली जा सकती है — उसमें बस पाँच-छह दिन की ही चूक मुमकिन है.
स्कैन की तारीख़ और माहवारी से निकाली तारीख़ में हफ़्ते से ज़्यादा फ़र्क़ हो, तो डॉक्टर स्कैन की तारीख़ मानते हैं और वही आगे चलती है. आपके काग़ज़ की तारीख़ इस साधन से अलग हो, तो अक्सर यही वजह होती है.
पर बाद के स्कैन से तारीख़ तय नहीं की जा सकती. तीसरी तिमाही में बच्चों के आकार का प्राकृतिक फ़र्क़ बहुत बढ़ जाता है, इसलिए उस समय के नाप से उम्र निकाली जाए तो दो-तीन सप्ताह की ग़लती हो सकती है. देर से हुआ स्कैन बढ़त जाँचता है, तारीख़ नहीं.
तारीख़ सिर्फ़ उत्सुकता की चीज़ नहीं है; उस पर जाँचों का पूरा कैलेंडर टिका होता है. NT स्कैन ग्यारह से तेरह सप्ताह के बीच ही होना होता है — पहले या बाद में कराया तो उसका फ़ायदा नहीं.
एनॉमली स्कैन अठारह से बाईस सप्ताह के बीच होता है और वही बच्चे के अंगों की तफ़सीली जाँच करता है. गर्भावस्था की शुगर (GTT) की जाँच चौबीस से अट्ठाईस सप्ताह में. टिटनेस (Td) के टीके भी इसी हिसाब से लगते हैं.
इसलिए तारीख़ सिर्फ़ याद रखने की चीज़ नहीं — उसे फ़ोन में दर्ज कर लें, और हर मुलाक़ात में 'अभी कौन सा सप्ताह' वाला आँकड़ा ज़बानी याद रखें. अस्पताल का हर फ़ैसला इसी आँकड़े पर होता है. सरकारी केंद्रों पर हर महीने की 9 तारीख़ को PMSMA शिविर में मुफ़्त जाँच होती है — वहाँ भी यही पूछा जाएगा.
37 से 42 सप्ताह के बीच हुआ प्रसव चिकित्सा की नज़र में सामान्य है. यानी अनुमानित तारीख़ से तीन सप्ताह पहले से लेकर दो सप्ताह बाद तक का पूरा महीना 'समय पर' है.
पहले बच्चे के समय प्रसव तारीख़ के बाद होने की संभावना ज़्यादा रहती है. तारीख़ निकल गई तो कुछ बिगड़ा नहीं — पर 41 सप्ताह के बाद डॉक्टर बच्चे की हलचल और पानी की मात्रा पर बारीक़ नज़र रखते हैं और 41–42 सप्ताह के बीच दर्द उठवाने (इंडक्शन) की सलाह देते हैं.
घरवालों को तारीख़ बताते समय 'महीने के आख़िरी हफ़्ते में' कहना व्यवहार में आसान रहता है. ठीक तारीख़ बता दी तो उस दिन से रोज़ फ़ोन आने लगते हैं, और प्रसव के आख़िरी दिनों में यह बोझ नहीं चाहिए.
सवाल: आख़िरी माहवारी की तारीख़ ठीक से याद नहीं, क्या करें? — अंदाज़न तारीख़ डालें और जल्द से जल्द डेटिंग स्कैन करा लें. माहवारी अनियमित हो या गर्भनिरोधक गोलियाँ हाल में बंद की हों, तो स्कैन ही असली सहारा है.
सवाल: कैलकुलेटर की तारीख़ और डॉक्टर की तारीख़ अलग है — कौन सी मानें? — डॉक्टर की. वह अक्सर स्कैन से आई होती है और स्कैन ज़्यादा सटीक है. आगे की सारी जाँचें उसी तारीख़ के हिसाब से तय होती हैं, इसलिए एक ही तारीख़ चलाना ज़रूरी है.
सवाल: जुड़वाँ हों तो क्या यही तारीख़ लागू होती है? — गिनती वही रहती है, पर जुड़वाँ का प्रसव आमतौर पर पहले होता है — क़रीब 36 से 37 सप्ताह के बीच. जुड़वाँ का पता चलने पर डॉक्टर अलग योजना देते हैं.
सवाल: IVF से गर्भ ठहरा हो तो? — तब इस साधन की ज़रूरत ही नहीं. भ्रूण रखने की तारीख़ और भ्रूण की उम्र ठीक-ठीक पता होती है, इसलिए आपके केंद्र की दी तारीख़ सबसे सटीक है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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