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बच्चे के पहले साल का ख़र्च: अपने शहर के दाम भरें, जोड़ अपने आप

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तीन फ़ैसले चुनें, फिर हर आँकड़ा अपने शहर के दाम से बदलें — जोड़ अपने आप बदल जाएगा. पहले से भरे आँकड़े सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा हैं, शोध किए दाम नहीं.

ख़र्च जोड़ें

तीन फ़ैसले चुनें — प्रसव कहाँ, लंगोट या डायपर, दूध कैसे. फिर हर आँकड़ा अपने शहर के हिसाब से बदलें; जोड़ अपने आप बदलेगा.

एक बार का ख़र्च

  • प्रसव — सरकारी अस्पतालसरकारी अस्पताल में प्रसव अक्सर मुफ़्त होता है; यहाँ का आँकड़ा सिर्फ़ आने-जाने, खाने जैसे छोटे ख़र्चों के लिए है.
    कुल
  • पालना, बिस्तर, नहलाने का सामान
    कुल
  • कपड़े — पूरे पहले साल के
    कुल

हर महीने

  • कपड़े की लंगोट — धुलाई का ख़र्च
    / महीना
  • तेल, साबुन, लोशन
    / महीना
  • डॉक्टर के पास जाना
    / महीना
  • बच्चे की देखभाल / सहायिका
    / महीना
  • बच्चे का खाना — 6 महीने के बादयह ख़र्च छह महीने के बाद ही शुरू होता है, इसलिए साल भर का औसत लिया है.
    / महीना
₹16,000एक बार का ख़र्च
₹2,100हर महीने
₹41,200पहले साल का कुल ख़र्च

ऊपर का हर आँकड़ा आप बदल सकते हैं — बदलते ही कुल रक़म अपने आप बदल जाती है. वहाँ पहले से भरे आँकड़े सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा हैं, शोध किए हुए दाम नहीं.लखनऊ का दाम और सतना का दाम एक नहीं होता; आपके शहर का दाम आप ही जानते हैं. हम सिर्फ़ जोड़ करके देते हैं.

आँकड़ा नीचे लाने वाली तीन बातें:
  • सरकारी अस्पताल में प्रसव और टीकाकरण मुफ़्त है. पहले साल के ख़र्च में सबसे बड़ा फ़र्क़ यही डालता है.
  • माँ का दूध मुफ़्त है. फ़ॉर्मूला हर महीने आने वाला पक्का ख़र्च है — छह महीने सिर्फ़ माँ का दूध देना बच्चे के लिए भी अच्छा और जेब के लिए भी.
  • पालना, स्ट्रोलर, कपड़े — इनमें से बहुत कुछ रिश्तेदारों से मिल जाता है. बच्चा इन्हें जितने दिन इस्तेमाल करता है, वह समय बहुत थोड़ा होता है.
  • एक चीज़ में कंजूसी नहीं — कार सीट, सोने की जगह की सुरक्षा. पुराने, टूटे या जिनका इतिहास पता नहीं ऐसे सुरक्षा-साधन इस्तेमाल न करें.

आँकड़े बदलना ही इस साधन का तरीक़ा है

लखनऊ के निजी अस्पताल का दाम और सतना के अस्पताल का दाम एक नहीं होता, और हम दोनों में से किसी का नहीं जानते. इसलिए यहाँ हर रक़म एक खुला ख़ाना है — पहले से भरा आँकड़ा सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा है, जिसे आपके शहर का असली दाम आते ही बदल देना चाहिए.

साधन का असली योगदान ढाँचा है: कौन सा ख़र्च एक बार का है और कौन सा हर महीने आता रहेगा — यह फ़र्क़ नए माता-पिता के हिसाब में सबसे ज़्यादा छूटता है. पालना एक बार ख़रीदा जाता है; डायपर और फ़ॉर्मूला हर महीने लौटकर आते हैं.

आँकड़ा भरते जाइए, नीचे तीन जोड़ बदलते जाएँगे: एक बार का ख़र्च, हर महीने का ख़र्च, और पहले साल का कुल. 'हर महीने कितना लगेगा' — घर के बजट का असली सवाल — उसका जवाब अलग से दिखता है.

कुल रक़म सबसे ज़्यादा बदलने वाले तीन फ़ैसले

पहला, प्रसव कहाँ. सरकारी अस्पताल में प्रसव और पूरा टीकाकरण मुफ़्त है — देश भर में, बिना किसी अर्ज़ी के. निजी अस्पताल का प्रसव पहले साल का सबसे बड़ा इकलौता ख़र्च होता है. जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव पर सहायता राशि भी मिलती है — रक़म और शर्तें अपने ज़िले के हिसाब से ASHA दीदी या PHC से पूछ लें.

दूसरा, दूध. माँ का दूध मुफ़्त है. फ़ॉर्मूला हर महीने का पक्का ख़र्च है और वह बारह महीने चलता है. छह महीने सिर्फ़ माँ का दूध देना बच्चे के लिए भी अच्छा है और जेब के लिए भी.

तीसरा, लंगोट या डायपर. रोज़ के डायपर आदत के साथ बढ़ने वाला ख़र्च हैं. बहुत घर बीच का रास्ता निकालते हैं — दिन में कपड़े की लंगोट, रात और बाहर जाते समय डायपर. साधन में यह विकल्प भी है.

जहाँ कंजूसी नहीं करनी

पालना, स्ट्रोलर, झूले, कपड़े — इनमें से बहुत कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों से मिल जाता है, और यही ठीक भी है. बच्चा यह सामान जितने दिन इस्तेमाल करता है, वह हैरान करने की हद तक थोड़ा है.

पर सुरक्षा की चीज़ों में यह समझौता नहीं. कार सीट कभी पुरानी, चटकी या अनजाने इतिहास वाली न लें — दुर्घटना झेल चुकी सीट बाहर से ठीक दिखती है और अंदर से बेकार हो चुकी होती है. सोने की जगह सपाट, सख़्त गद्दे की और तकिये-रज़ाई से ख़ाली होनी चाहिए.

और टीकाकरण कभी न टालें. सरकारी केंद्र पर वह मुफ़्त है; निजी अस्पताल में उन्हीं टीकों की फ़ीस लगती है. टीका दोनों जगह वही है.

बीमा और अस्पताल का पैकेज — पहले पूछने के सवाल

ज़्यादातर स्वास्थ्य बीमों में प्रसव के लिए प्रतीक्षा अवधि होती है — क़रीब दो से चार साल. यानी गर्भ ठहरने के बाद लिया बीमा इस प्रसव पर लागू नहीं होगा. पॉलिसी पहले से हो तो प्रसव की सीमा कितनी है और नवजात कब से उसमें आता है, काग़ज़ पर जाँच लें.

निजी अस्पताल का 'डिलीवरी पैकेज' सुनते समय पूछें: कितने दिन का ठहरना, कौन सी जाँचें, बेहोशी के डॉक्टर की फ़ीस, और सिज़ेरियन होने पर दाम कितना बढ़ेगा. सामान्य प्रसव का दाम बताकर सिज़ेरियन का अलग लगाना आम चलन है.

और बच्चे का ख़र्च अलग होता है. बच्चे को NICU में रखना पड़े तो वह आँकड़ा पैकेज के बाहर और बड़ा होता है. यह संभावना कम रहती है, पर उसे मानकर थोड़ी रक़म अलग रखना समझदारी है.

आमदनी घटने वाले महीनों की योजना

ज़्यादातर हिसाब सिर्फ़ ख़र्च गिनते हैं और आमदनी की कमी भूल जाते हैं. मातृत्व अवकाश, बिना वेतन की छुट्टी या नौकरी छोड़ना — इस दौर में घर आने वाला पैसा घटता है, और वह फ़र्क़ डायपर के ख़र्च से बड़ा होता है.

संगठित क्षेत्र की नौकरी में मातृत्व लाभ क़ानून के तहत छब्बीस सप्ताह का सवेतन अवकाश मिलता है. पर असंगठित क्षेत्र, अपना काम या ठेके की नौकरी में यह लागू नहीं होता — वहाँ तीन-चार महीने की तैयारी पहले से करनी पड़ती है. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) में पहली संतान पर सहायता राशि मिलती है — रक़म और तरीक़ा आँगनवाड़ी में पूछ लें.

व्यावहारिक सलाह: गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में जितनी हो सके बचत अलग रखें, और पहले साल में कौन से ख़र्च टाले जा सकते हैं, पहले से तय कर लें. ऊपर का साधन महीने का ख़र्च अलग दिखाता है, इसलिए 'हर महीने कितना लगेगा' का जवाब तुरंत मिल जाता है.

सवाल-जवाब

सवाल: ये आँकड़े कहाँ से आए? — कहीं से नहीं, और यह साफ़ लिखा है. ये सिर्फ़ शुरुआती मोटे अंदाज़े हैं. असली दाम आपके शहर के आप ही जानते हैं — वे भरें, जोड़ अपने आप बदल जाएगा.

सवाल: सरकारी अस्पताल में प्रसव सचमुच मुफ़्त है? — आम तौर पर हाँ. प्रसव, जाँचें और टीकाकरण सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में मुफ़्त हैं, और JSY की सहायता राशि अलग से. साधन का छोटा आँकड़ा सिर्फ़ आने-जाने, खाने जैसे फुटकर ख़र्चों के लिए है.

सवाल: कपड़े की लंगोट सचमुच सस्ती पड़ती है? — हाँ, पर ख़र्च दूसरी शक्ल में आता है — धुलाई की मेहनत, पानी और समय. इसीलिए साधन में 'दोनों मिलाकर' का विकल्प है; ज़्यादातर घर असल में यही करते हैं.

सवाल: कोई ख़ाना भरा नहीं तो क्या होगा? — वह शून्य गिना जाता है. कोई ख़र्च आपके घर में है ही नहीं — जैसे देखभाल घर में ही हो रही हो — तो उसे शून्य ही रहने दें.

परिवारसाधन

समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम