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बच्चे की हलचल गिनें: दस हलचलों में कितना समय लगता है

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हलचल महसूस हो तो बटन दबाएँ. दस हलचलें कितनी देर में हुईं, साधन बता देगा. पर याद रखें — गिनती से ज़्यादा बदलाव मायने रखता है.

हलचलें गिनें

पहली हलचल महसूस होते ही बटन दबाकर शुरू करें. आगे हर हलचल पर एक बार दबाएँ.

यह हमेशा याद रखें: गिनती से ज़्यादा बदलाव मायने रखता है.
  • बच्चे की हलचल हमेशा से कम, धीमी या अलग लगे — तो अभी अस्पताल को फ़ोन करें. दस हलचलें गिन ली हों तो भी यही लागू है.
  • हलचल 'जगाने' के लिए ठंडा पानी, मीठा, पेट थपथपाना — ऐसे उपाय करके निश्चिंत मत हो जाइए. उससे सिर्फ़ देर होती है.
  • रात हो या छुट्टी, फ़ोन करें. वह नंबर इसी काम के लिए दिया जाता है.
  • आमतौर पर 28 सप्ताह के बाद रोज़ एक बार, जब बच्चा सबसे ज़्यादा हिलता-डुलता है उस समय गिनें. शांति से एक करवट लेटकर गिनना आसान रहता है.
  • यह सिर्फ़ रिकॉर्ड रखने का साधन है. यह कोई जाँच नहीं करता और किसी बात की गारंटी नहीं देता.

कैसे गिनें

क़रीब अट्ठाईसवें सप्ताह के बाद दिन में एक बार गिनें. बच्चा जिस समय सबसे ज़्यादा हिलता-डुलता है, वही समय चुनें — ज़्यादातर के लिए वह खाने के बाद का या रात को लेटने के बाद का होता है.

शांत जगह, हो सके तो बायीं करवट लेटकर गिनें. लात, करवट, धक्का, पेट में लुढ़कने जैसा एहसास — ये सब हलचलें गिननी हैं. सिर्फ़ हिचकी नहीं गिननी; वह लय में होती है और बच्चे के बस में नहीं होती.

दस हलचलें होने तक गिनें. ज़्यादातर बार वे आधे घंटे में हो जाती हैं. दो घंटे के भीतर दस हो जाएँ तो यह सामान्य है.

गिनती से ज़्यादा बदलाव मायने रखता है

'दिन में दस हलचल' का नियम आसान लगता है, पर अधूरा है. हर बच्चे की अपनी लय होती है — कोई दिन भर में पचास बार हिलता है, कोई पंद्रह. असली सवाल 'कितनी' नहीं, 'हमेशा जैसी हैं या नहीं' है.

इसलिए हलचल कम हो जाए, धीमी लगे, या हमेशा से अलग लगे — तो दस गिन लेने पर भी अस्पताल को फ़ोन करें. इस एक मामले में 'सुबह तक देखते हैं' वाली सोच ख़तरनाक है.

और ठंडा पानी पीना, मीठा खाना, पेट थपथपाकर बच्चे को 'जगाना' — ये उपाय करके निश्चिंत मत होइए. उनसे सिर्फ़ देर होती है. हलचल कम लगे तो सीधे फ़ोन करें; यह ठीक है या नहीं, तय करना आपका काम नहीं.

यह साधन क्या नहीं करता

यह सिर्फ़ रिकॉर्ड रखता है. कोई जाँच नहीं करता, बच्चे की धड़कन नहीं सुनता और सब ठीक होने की गारंटी नहीं देता.

दस हलचलें पूरी हुईं यानी प्रमाणपत्र मिल गया, ऐसा नहीं. साधन 'दस हो गईं' दिखाते समय भी वही वाक्य साथ रखता है — हलचल अलग लगे तो फ़ोन करें — क्योंकि वही असल में ज़रूरी है.

घर पर इस्तेमाल का डॉप्लर यंत्र मत ख़रीदिए. धड़कन सुनाई दी तो माता-पिता निश्चिंत हो जाते हैं और अस्पताल जाना टाल देते हैं — यही सबसे ख़तरनाक स्थिति है.

हलचल कम होने के पीछे क्या हो सकता है

ज़्यादातर बार कुछ गंभीर नहीं होता. बच्चा सो रहा होता है, या आप दिन भर काम में थीं और हलचलें ध्यान में नहीं आईं. गर्भनाल (प्लेसेंटा) पेट की अगली तरफ़ हो, तो हलचलें हमेशा धीमी महसूस होती हैं — यह स्कैन में पता चलता है और सामान्य है.

पर कुछ वजहें जाँचने लायक़ होती हैं. प्लेसेंटा का काम धीमा पड़ना, बच्चे के चारों ओर पानी कम होना, या नाल में दिक़्क़त — इनमें बच्चे की हलचल कम होना पहला और कभी-कभी इकलौता लक्षण होता है. माँ का रक्तचाप बढ़ना या शुगर बेक़ाबू होना भी वजह बन सकता है.

यह फ़र्क़ घर बैठे नहीं पहचाना जा सकता, और कोशिश भी नहीं करनी चाहिए. जाँच बीस-तीस मिनट की होती है और उसे करा लेना कोई ज़हमत नहीं — वही उस विभाग के काम का हिस्सा है.

अस्पताल जाने पर क्या होता है

हलचल कम होने की शिकायत लेकर जाने पर अक्सर CTG या NST होता है — पेट पर पट्टे बाँधकर बीस-तीस मिनट बच्चे की धड़कन दर्ज की जाती है. इसमें दर्द नहीं होता.

ज़रूरत लगे तो स्कैन करके बच्चे के चारों ओर का पानी और उसकी हलचल देखी जाती है. ज़्यादातर बार सब ठीक निकलता है और आपको घर भेज दिया जाता है.

'बेवजह परेशान किया' मत सोचिए. प्रसूति विभाग में यह रोज़ का काम है और इसीलिए वह चौबीस घंटे खुला रहता है — आपात स्थिति में 108 पर एंबुलेंस बुलाएँ. शिकायत सही थी या नहीं, यह तय करना उनका काम है — आपका नहीं.

सवाल-जवाब

सवाल: हलचलें कब से महसूस होती हैं? — पहली गर्भावस्था में क़रीब अठारह से बीस सप्ताह के बीच, दूसरी बार थोड़ा पहले. शुरू में वे तितली जैसी हल्की होती हैं और रोज़ महसूस हों, ज़रूरी नहीं.

सवाल: बच्चा सोता है तो हलचल रुक जाती है? — हाँ. बच्चे की नींद क़रीब बीस से चालीस मिनट की होती है, कभी-कभार नब्बे मिनट तक. पर नींद का समय इससे लंबा खिंचे तो इंतज़ार मत कीजिए.

सवाल: आख़िरी हफ़्तों में जगह कम होने से हलचल कम हो जाती है? — नहीं. यह बहुत फैला हुआ भ्रम है. हलचल का ढंग बदल सकता है — लातों की जगह करवटें-सरकना महसूस होता है — पर मात्रा कम नहीं होती.

सवाल: दिन में कितनी बार गिनें? — एक बार काफ़ी है. दिन भर लगातार गिनते रहने से चिंता बढ़ती है और फ़ायदा नहीं होता. बस हलचल अलग लगे तो समय देखे बिना फ़ोन करें.

गर्भावस्थासाधन

समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम