दाँत निकलने का चार्ट: कौन सा दाँत कब आता है, नक़्शे पर देखें
बीस दूध के दाँत, मुँह के नक़्शे पर. आया हुआ दाँत छूकर निशान लगाएँ — कौन सा दाँत कब आना चाहिए और कब पूछना चाहिए, यह साधन बता देगा. यह प्रतियोगिता नहीं है.
दाँतों का नक़्शा
बच्चे का नाम और जन्म तिथि डालें, फिर जो दाँत आए उस पर टैप करें. दाँत का नाम, उसके आने का सामान्य समय, और आपने जिस दिन निशान लगाया वह तारीख़ — तीनों दिखेंगे.
महीनों के साथ यही रिकॉर्ड काम का बन जाता है: कौन-सा दाँत कब आया, बीच में कितना अंतर रहा, और कुल गिनती सामान्य दायरे के मुक़ाबले कहाँ है. एक से ज़्यादा बच्चों का अलग-अलग रिकॉर्ड रख सकते हैं, और साथ में लक्षण व दंत चिकित्सक की मुलाक़ातें भी दर्ज कर सकते हैं.
यह सब सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में सहेजा जाता है. कोई खाता नहीं चाहिए और हमें कुछ नहीं भेजा जाता.
पहला दाँत — चौथे महीने में भी सामान्य, बारहवें में भी
ज़्यादातर बच्चों का पहला दाँत छह से दस महीने के बीच आता है, और वह लगभग हमेशा नीचे के बीच के दो दाँतों में से एक होता है. पर यह औसत है, नियम नहीं.
चौथे महीने में दाँत आ जाना भी सामान्य है और बारहवें महीने तक न आना भी. कुछ बच्चे दाँत लेकर ही पैदा होते हैं और कुछ का पहला दाँत सवा साल पर आता है — दोनों छोर दुर्लभ हैं, पर बीमारी नहीं.
चिंता की एक ही सीमा याद रखने लायक़ है: अठारह महीने पूरे होने पर भी एक भी दाँत न आया हो, तो अगली बार डॉक्टर से मिलें तब बता दें. उसमें भी ज़्यादातर बार कुछ नहीं निकलता — पर एक बार पूछ लेना ठीक है.
क्रम समय से ज़्यादा तय होता है
दाँत किस महीने आते हैं, यह बच्चे-बच्चे में बहुत बदलता है. पर किस क्रम में आते हैं, यह काफ़ी तय है: पहले नीचे के बीच के, फिर ऊपर के बीच के, फिर बग़ल के, फिर पहली दाढ़ें, फिर नुकीले (कैनाइन), और आख़िर में दूसरी दाढ़ें.
नुकीले दाँत का दाढ़ के बाद आना नए माता-पिता को अक्सर चौंकाता है — बीच में ख़ाली जगह दिखती है और लगता है कोई दाँत रह गया. वह जगह कैनाइन की है और वह अपने समय पर, क़रीब सोलह से बाईस महीने में, भर जाती है.
पूरे बीस दूध के दाँत आमतौर पर ढाई से तीन साल की उम्र तक आ जाते हैं. उसके बाद छह साल की उम्र तक नया कुछ नहीं होता — फिर दूध के दाँत गिरने और पक्के आने का दौर शुरू होता है.
दाँत निकलने से क्या होता है — और क्या नहीं
दाँत निकलते समय मसूड़े सूजते हैं, लार बहुत बहती है, बच्चा हर चीज़ मुँह में डालता है और चिड़चिड़ा रहता है. शरीर का तापमान हल्का सा बढ़ सकता है. ये सब सामान्य हैं और दाँत निकलते ही थम जाते हैं.
पर तेज़ बुख़ार, दस्त और उल्टी दाँत निकलने से नहीं होते. यह इस पन्ने की सबसे ज़रूरी बात है, क्योंकि 'दाँत आ रहे हैं' कहकर इन्हें टालना आम है — और इसी चक्कर में निमोनिया या पेट का संक्रमण देर से पकड़ा जाता है. ये लक्षण हों तो डॉक्टर को दिखाएँ.
मसूड़ों की तकलीफ़ के लिए साफ़ ठंडी टीदिंग रिंग और साफ़ उँगली से मसूड़े की हल्की मालिश — बस यही दो चीज़ें काम आती हैं. बाज़ार की जेल, पाउडर और गले में बाँधने वाली मालाएँ नहीं — मालाओं से गला घुटने और मनका अटकने का असली ख़तरा है.
पहले दाँत के दिन से सफ़ाई शुरू
पहला दाँत आते ही मुलायम बेबी ब्रश से दिन में दो बार सफ़ाई शुरू कर दें — चावल के दाने जितने फ़्लोराइड टूथपेस्ट के साथ. 'अभी तो दूध के ही हैं' कहकर टालना ठीक नहीं: दूध के दाँतों का सड़ना तेज़ चलता है और नीचे बन रहे पक्के दाँतों तक पहुँच सकता है.
रात की बोतल इसमें सबसे बड़ी दुश्मन है. दूध मुँह में रखे-रखे सोने वाले बच्चों के ऊपर के अगले दाँत सबसे पहले सड़ते हैं — इसे 'बॉटल कैरीज़' कहते हैं. सोने से पहले दूध, फिर पानी का एक घूँट या हल्की सफ़ाई, फिर बिस्तर — यह क्रम बना लें.
पहला जन्मदिन आने तक एक बार दाँत के डॉक्टर को दिखा देना अच्छी शुरुआत है. कुछ न भी हो, तो सफ़ाई का सही तरीक़ा और आगे का ढर्रा वहीं से मिल जाता है.
सवाल-जवाब
दाँत देर से आ रहे हैं
कैल्शियम की कमी है? — लगभग कभी नहीं. दाँत आने का समय ज़्यादातर ख़ानदानी होता है. माँ-बाप में से किसी के दाँत देर से आए थे, तो बच्चे के भी आ सकते हैं. अठारह महीने की सीमा याद रखें, बाक़ी इंतज़ार.
दाँत उल्टे क्रम में आ रहे हैं
दिक़्क़त है? — आमतौर पर नहीं. क्रम का थोड़ा आगे-पीछे होना चलता है. दाँत आ रहे हैं और स्वस्थ हैं, तो क्रम की चिंता नहीं.
दाँतों के बीच जगह दिख रही है
क्या यह ख़राब है? — नहीं, यह अच्छी बात है. दूध के दाँतों के बीच की जगह पक्के दाँतों के लिए चाहिए, जो बड़े होते हैं. सटे हुए दूध के दाँत आगे भीड़ की निशानी हो सकते हैं.
लार बहुत बहती है
दाँत आने वाले हैं? — शायद, पर ज़रूरी नहीं. तीन-चार महीने की उम्र में लार की ग्रंथियाँ वैसे भी तेज़ हो जाती हैं. लार के साथ मसूड़े में सूजन और चबाने की बेचैनी हो, तब दाँत क़रीब है.
स्रोत
इस पन्ने का हर चिकित्सकीय आँकड़ा नीचे दी गई गाइडलाइनों से लिया गया है. आपके डॉक्टर की बात अलग हो तो पूछिए कि वे कौन-सी गाइडलाइन मानते हैं.
- AAP. Teething: 4 to 7 Months (2023)Backs the claim that first teeth typically appear around 6 months, usually the lower central incisors first, and that teething causes drooling, gum swelling, irritability and mild temperature rise but does NOT cause high fever, diarrhoea or vomiting.
- AAP. Brushing Up on Oral Health: Never Too Early to Start (2022)Backs the recommendation to begin brushing with a soft baby toothbrush twice daily as soon as the first tooth erupts, using a rice-grain-sized smear of fluoride toothpaste.
- AAP. Amber Teething Necklaces: Are They Safe? (2018)Backs the warning that teething necklaces pose real risks of strangulation and choking on beads, and supports recommending a clean chilled teething ring and gentle gum massage instead of gels, powders or necklaces.
- WHO. Oral health (fact sheet) (2023)Backs the claim that early childhood caries (decay in primary teeth) progresses rapidly and can affect the developing permanent teeth underneath, supporting the advice not to dismiss primary tooth decay as unimportant.
समीक्षा
- Nakul Phatak — सीईओ, theAsianparent इंडिया और इंडोनेशियाtheAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
- Roshni Chugani — मार्केटिंग प्रमुख, theAsianparent इंडिया और सिंगापुरमां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम






