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कॉन्ट्रैक्शन टाइमर: दर्द कितनी देर का और कितने अंतर पर, एक बटन से नापें

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एक बटन — दर्द शुरू होते ही दबाएँ, थमने पर फिर. अंतराल, लंबाई और 'अब अस्पताल फ़ोन करें' का इशारा साधन ख़ुद देगा. रिकॉर्ड आपके फ़ोन में ही रहता है.

दर्द नापें

पेट कसने (कॉन्ट्रैक्शन) की शुरुआत में एक बार बटन दबाएँ, ढीला पड़ने पर फिर एक बार. बाक़ी सब साधन ख़ुद निकाल देगा.

इनमें से कुछ भी हो तो घड़ी मत देखिए — अभी अस्पताल को फ़ोन करें:
  • पानी की थैली फट जाए, ख़ासकर निकलने वाला पानी हरा या भूरा हो तो
  • कितना भी कम हो, कोई भी रक्तस्राव
  • बच्चे की हलचल कम हो जाए या हमेशा जैसी न लगे तो
  • दो दर्दों के बीच भी दर्द न थमे तो
  • तेज़ सिरदर्द, नज़र धुँधली होना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, या अचानक सूजन
  • बुख़ार, या आपको लगे कि कुछ ठीक नहीं है
  • 37 सप्ताह पूरे होने से पहले ही दर्द नियमित आने लगें तो

यह किस सवाल का जवाब देता है

प्रसव के पास आने पर घर में एक ही सवाल बार-बार उठता है: 'अस्पताल कब चलें?' उसका आम जवाब दर्दों के ढर्रे में होता है — कितने अंतर पर आ रहे हैं, कितनी देर टिकते हैं, और यह ढर्रा कितनी देर से चल रहा है.

हाथ की घड़ी और काग़ज़-पेन से यह हिसाब रखना दर्द के बीच लगभग नामुमकिन है. यह साधन वही हिसाब रखता है: हर दर्द की लंबाई, दो दर्दों का अंतराल, पिछले घंटे का औसत — और ढर्रा बनने पर ऊपर साफ़ शब्दों में इशारा.

आम कसौटी 5-1-1 कही जाती है: दर्द हर पाँच मिनट पर, हर एक क़रीब एक मिनट का, और यह सिलसिला एक घंटे से. यह दिखे तो अस्पताल को फ़ोन करने का समय है. पर आपके डॉक्टर ने अलग हिदायत दी हो — दूसरा प्रसव हो, अस्पताल दूर हो, या सिज़ेरियन तय हो — तो उनकी बात इस कसौटी से ऊपर है.

झूठे दर्द और असली दर्द का फ़र्क़

आख़िरी हफ़्तों में पेट का रह-रहकर कसना आम है — इन्हें ब्रैक्सटन-हिक्स या 'झूठे दर्द' कहते हैं. ये अनियमित होते हैं, तेज़ नहीं होते, और करवट बदलने, चलने या पानी पीने से अक्सर थम जाते हैं.

असली प्रसव का दर्द उल्टा चलता है: वह नियमित होता जाता है, अंतराल घटता जाता है, हर दर्द पिछले से तेज़ होता है, और आराम करने से नहीं रुकता. दर्द कमर से शुरू होकर आगे की ओर आता महसूस होना भी असली दर्द का लक्षण है.

फ़र्क़ काग़ज़ पर साफ़ दिखता है — इसीलिए नापना काम आता है. आधे घंटे की नाप में ही दिख जाता है कि अंतराल घट रहा है या बेतरतीब है. शक रहे तो फ़ोन करना ही सही है; 'झूठा अलार्म' लेकर लौटना कोई शर्म की बात नहीं.

समय के इंतज़ार में क्या करें

ढर्रा अभी नहीं बना है, तो जो साधन ऊपर कहता है वही करें: पानी पीती रहें, मन हो तो टहलें, हो सके तो लेट जाएँ. शुरुआती प्रसव घंटों चलता है और उसकी ताक़त बाद के लिए बचानी है.

अस्पताल का बैग, काग़ज़ात — जाँचों की फ़ाइल, टीके-दवा की पर्चियाँ, पहचान पत्र, अस्पताल का कार्ड — और जाने का इंतज़ाम पहले से तय रखें. कौन ले जाएगा, गाड़ी न मिले तो किसे फ़ोन करना है (आपात स्थिति में 108), रात हो तो रास्ता — ये फ़ैसले दर्द के बीच नहीं करने चाहिए.

खाना हल्का लें. लंबे प्रसव में बीच-बीच में कुछ हल्का खाते-पीते रहना ताक़त बनाए रखता है — पर आपके अस्पताल की हिदायत अलग हो तो वही मानें.

घड़ी मत देखिए — इन लक्षणों पर सीधे फ़ोन करें

कुछ हालात ऐसे हैं जिनमें दर्दों का हिसाब बेमानी है — साधन के नीचे ये हमेशा लिखे रहते हैं, किसी नतीजे के पीछे छिपे नहीं.

पानी की थैली फट जाए — ख़ासकर पानी हरा या भूरा हो; कोई भी रक्तस्राव; बच्चे की हलचल कम लगे; दो दर्दों के बीच भी दर्द न थमे; तेज़ सिरदर्द के साथ धुँधला दिखे या चेहरे-हाथों पर सूजन आए; बुख़ार हो; या 37 सप्ताह पूरे होने से पहले ही दर्द नियमित आने लगें.

इनमें से कुछ भी हो तो नापना छोड़कर उसी समय अस्पताल को फ़ोन करें. रात हो या छुट्टी — प्रसूति विभाग चौबीस घंटे इसीलिए खुला रहता है.

रिकॉर्ड आपके फ़ोन में ही रहता है

यह रिकॉर्ड आपके फ़ोन के ब्राउज़र में सहेजा जाता है — हमें नहीं भेजा जाता. पेज बंद हो जाए, फ़ोन लॉक हो जाए या गाड़ी में नेटवर्क चला जाए, तो भी घंटे भर की नाप मिटती नहीं.

अस्पताल पहुँचकर 'सूची कॉपी करें' दबाकर पूरा रिकॉर्ड नर्स या डॉक्टर को दिखाया जा सकता है. 'दर्द कब से और कितने अंतर पर' — भर्ती के समय का पहला सवाल यही होता है, और उसका लिखा हुआ जवाब अंदाज़े से बेहतर है.

प्रसव के बाद 'मिटाकर नए सिरे से शुरू करें' दबा दें — अगली बार के लिए साफ़ खाता.

सवाल-जवाब

सवाल: दर्द शुरू हुए बिना ही पानी की थैली फट गई — अब? — नापने का इंतज़ार मत कीजिए, अस्पताल को फ़ोन करें. थैली फटने के बाद संक्रमण का ख़तरा समय के साथ बढ़ता है, इसलिए दर्द न भी हों तो जाना ज़रूरी है.

सवाल: दूसरा प्रसव है — क्या वही 5-1-1 कसौटी चलेगी? — दूसरा प्रसव अक्सर तेज़ चलता है. कई डॉक्टर दूसरी बार में इससे पहले ही — मसलन दर्द दस मिनट के अंतर पर आते ही — निकलने को कहते हैं. अपने डॉक्टर से यह पहले ही पूछ रखें.

सवाल: दर्द नियमित हुए और फिर बंद हो गए — यह क्या था? — शायद झूठे दर्द, या प्रसव की बहुत शुरुआती अवस्था जो थम गई. यह सामान्य है. सिलसिला फिर शुरू हो तो नई नाप शुरू करें; बच्चे की हलचल ठीक हो तो घबराने की बात नहीं.

सवाल: दर्द बर्दाश्त के बाहर हैं पर अंतराल अभी लंबा है — इंतज़ार करें? — नहीं. कसौटियाँ औज़ार हैं, दीवार नहीं. दर्द सँभल नहीं रहा, या मन कह रहा है कि कुछ ठीक नहीं — तो फ़ोन करके निकल पड़ें. ज़्यादा से ज़्यादा यह होगा कि जल्दी पहुँच जाएँगी.

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम