
ताजमहल से हनुमान जी तक और ऑटो की सवारी से दीवाली के दियों तक — 39 चित्र, सब मुफ़्त, सब A4 काग़ज़ पर छपने के आकार के. कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई शुल्क नहीं.
समूह चुनें, चित्र पर टैप करें — 'छापें' से सीधे प्रिंट, 'डाउनलोड करें' से फ़ोन में सेव. हर चित्र का अपना पन्ना भी है, जिस पर रंग भरते-भरते बात करने की चीज़ें लिखी हैं.
ताजमहल, इंडिया गेट, हवा महल, वाराणसी के घाट — बच्चे ने सुनी हुई और शायद देखी हुई जगहें.
ताजमहल, आगरा
इंडिया गेट, दिल्ली
लाल क़िला, दिल्ली
क़ुतुब मीनार, दिल्ली
हवा महल, जयपुर
आमेर का क़िला, जयपुर
वाराणसी के घाट
ऋषिकेश का झूला पुल
काशी विश्वनाथ मंदिर
बद्रीनाथ मंदिर
वैष्णो देवी
हनुमान जी
श्रीकृष्ण
राधा-कृष्ण
राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान
शिवलिंग और नंदी
दुर्गा माता
सरस्वती माता
कमल पर लक्ष्मी माता
गणेश जी
शिरडी — साईं बाबा मंदिर
गेटवे ऑफ़ इंडिया, मुंबई
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस
अजंता की गुफाएँ
हावड़ा पुल, कोलकाता
विक्टोरिया मेमोरियल, कोलकाता
दार्जिलिंग की छोटी रेल
कोलकाता की ट्राम
सुंदरबन का बाघ
बाघ की सफ़ारी
ऑटो रिक्शा की सवारी
स्कूल जाने की सुबह
पतंगबाज़ी
बारिश के पानी में मस्ती
फलों का बाज़ार
दादा-दादी की कहानी
परिवार के साथ रेल का सफ़र
दीवाली के दिये
दोस्त जानवरकुल 39 चित्र. सभी मुफ़्त, A4 काग़ज़ पर छापने के माप में. 'छापें' दबाने पर छपाई की खिड़की खुलेगी; 'डाउनलोड करें' दबाने पर चित्र फ़ोन में सेव होगा. स्कूल और आँगनवाड़ी के लिए जितने चाहिए छापकर इस्तेमाल करें.
इंटरनेट पर रंग भरने के चित्रों की कमी नहीं है — कार्टून, परियाँ, विदेशी घर, बर्फ़ वाले क्रिसमस. कमी उन चित्रों की है जो बच्चे की अपनी दुनिया के हों.
यहाँ हर चित्र वह है जो हिंदी घर का बच्चा पहचानता है: घाट पर तैरते दीये, गली का ऑटो, स्कूल की सुबह, दादा-दादी की कहानी, नवरात्रि की दुर्गा माता और दीवाली की लक्ष्मी पूजा. पहचानी हुई चीज़ में बच्चा ज़्यादा देर रमता है — और रमना ही इस पूरे खेल का असली काम है.
चित्र चार समूहों में हैं: उत्तर भारत की जगहें, भगवान और मंदिर, बाक़ी भारत, और रोज़ की दुनिया. मंदिर वाले चित्र त्योहार के दिनों के लिए सबसे अच्छे हैं — जन्माष्टमी पर कृष्ण जी, नवरात्रि में दुर्गा माता, दीवाली पर लक्ष्मी माता.
क्रेयॉन पकड़ना, दबाव सँभालना, लकीर के पास रुकना — यह सब उँगलियों की वही तैयारी है जो आगे लिखाई के काम आती है. पेंसिल पकड़ने से पहले की सबसे अच्छी कसरत यही है.
दस मिनट एक चित्र पर टिके रहना ध्यान की कसरत है — और मोबाइल के दौर में यह कसरत पहले से ज़्यादा क़ीमती है. रंग भरता बच्चा जल्दी में नहीं होता; यही उसकी ख़ूबी है.
और रंग चुनना अपने आप में फ़ैसले लेना है. आसमान को हरा करने का फ़ैसला भी — उसे ग़लत मत कहिए. चित्र बच्चे का है, आसमान भी उसी का.
दो साल: पूरे काग़ज़ पर आड़ी-तिरछी लकीरें. यही उस उम्र का काम है — हाथ चलाना सीखा जा रहा है, चित्र बहाना है.
तीन-चार साल: आकार पहचान में आते हैं, रंग लकीर के बाहर जाता है, एक ही चीज़ पर तीन रंग चढ़ते हैं. सब ठीक है. 'लकीर के अंदर' की टोका-टाकी इस उम्र में सिर्फ़ खेल छीनती है.
पाँच-छह साल: लकीर के भीतर रहना आने लगता है, रंगों के फ़ैसले सोच-समझकर होते हैं, और चित्र पूरा करने की ज़िद पैदा होती है. यह वही उम्र है जब बग़ल में बैठकर बात करने का सबसे ज़्यादा फल मिलता है.
हर चित्र A4 काग़ज़ के हिसाब से बना है — घर के प्रिंटर पर सीधा छपेगा. छपाई के डिब्बे में 'ब्लैक ऐंड व्हाइट' चुन लें तो रंगीन स्याही बचेगी; चित्र वैसे भी काली लकीरों का ही है.
प्रिंटर घर में न हो तो फ़ोन में डाउनलोड करके पास की फ़ोटोकॉपी-प्रिंट दुकान से छपवा लें — एक पन्ने की छपाई का दाम मामूली होता है, और एक बार में हफ़्ते भर के चित्र निकाले जा सकते हैं.
स्कूल और आँगनवाड़ी के लिए जितनी चाहिए प्रतियाँ निकालें — यही इनका काम है. बेचना भर नहीं है.
हर चित्र के पन्ने पर तीन चीज़ें लिखी हैं: चित्र में क्या है, बात करने के सवाल, और वे शब्द जो यह चित्र सिखाता है — घाट, मीनार, चरखी, रंगोली.
तरकीब सीधी है: बच्चा चित्र में रमा हो, तभी हर चीज़ का नाम हिंदी में बोलते जाइए. पाठ नहीं लगता, इसलिए याद रह जाता है. जवाब अंग्रेज़ी में आए तो टोकिए मत — आप हिंदी में दोहरा दीजिए, इतना काफ़ी है.
सवाल पढ़कर सुनाने की चीज़ नहीं, बात शुरू करने की चीज़ हैं. 'ताजमहल सफ़ेद क्यों है' पर जो बातचीत चलती है, वह किसी भी पाठ से ज़्यादा सिखाती है.
सवाल: क्या ये चित्र सच में मुफ़्त हैं? — हाँ. न रजिस्ट्रेशन, न ईमेल, न छिपा शुल्क. घर, स्कूल और आँगनवाड़ी में जितने चाहिए छापें. सिर्फ़ बेचना मना है.
सवाल: रंग किस चीज़ से भरवाएँ — क्रेयॉन, पेंसिल, स्केच पेन? — छोटे बच्चों (2-4 साल) के लिए मोटे क्रेयॉन सबसे अच्छे — पकड़ आसान, टूटते नहीं. पाँच के बाद रंगीन पेंसिलें बारीक़ी सिखाती हैं. स्केच पेन सबसे बाद में — वे काग़ज़ पार कर मेज़ पर उतर जाते हैं.
सवाल: बच्चा हर चीज़ काले रंग से भर देता है — कुछ गड़बड़ है? — नहीं. रंगों के दौर आते-जाते हैं और काला भी बाक़ी रंगों जैसा एक रंग है. चिंता की चीज़ चित्र नहीं, बच्चे का बाक़ी व्यवहार है — वह हँसता-खेलता है तो चित्र जो भी रंग ले, सब ठीक है.
सवाल: एक ही चित्र बार-बार छापना ठीक है? — बिल्कुल. बच्चे दोहराव से सीखते हैं, और कल का हरा आसमान आज नीला होकर लौटे तो यह तरक़्क़ी है. एक ही चित्र की चार प्रतियाँ निकालकर पूरे घर से रंग भरवाना भी आज़माइए — सबकी अपनी-अपनी दीवाली बनती है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
இந்தியப் பெற்றோர்களே பரிந்துரைத்து வாக்களித்த பிராண்டுகள். பட்டியல் ஆங்கிலத்தில் இருக்கும்.