बच्चे की लंबाई कितनी होगी: माता-पिता की लंबाई से अंदाज़ा
पिता की लंबाई, माँ की लंबाई और बच्चा लड़का है या लड़की — बस इतने से आख़िरी लंबाई का एक मोटा अनुमान. जवाब एक आँकड़ा नहीं, सत्रह सेंटीमीटर चौड़ा दायरा होता है — और वही सच्चा जवाब है.
अनुमान निकालें
पिता की लंबाई, माँ की लंबाई और बच्चे का लिंग — सेंटीमीटर में. एक इंच यानी 2.54 सेंटीमीटर.
जवाब कैसे पढ़ें
साधन आपको एक आँकड़ा नहीं देता, दायरा देता है — और वह क़रीब सत्रह सेंटीमीटर चौड़ा होता है. यह चौड़ाई ग़लती नहीं, यही सच्चा जवाब है. इतनी जानकारी से इससे नपा-तुला कुछ कहा ही नहीं जा सकता.
पाँच फ़ुट चार इंच से पाँच फ़ुट दस इंच जैसा दायरा सुनकर निराशा होती है, क्योंकि उम्मीद एक आँकड़े की होती है. पर एक आँकड़ा देने वाला हर साधन उतनी ही अनिश्चितता के ऊपर आँकड़ा रंगकर दिखा रहा होता है.
इसलिए इसे मनोरंजन की तरह देखें. बच्चे की बढ़त कैसी चल रही है, यह तय करने का असली औज़ार यह नहीं — वह ग्रोथ चार्ट है, जो डॉक्टर के यहाँ हर मुलाक़ात में भरा जाता है.
मिड-पैरेंटल तरीक़ा असल में क्या करता है
गणित आसान है. माँ और पिता की लंबाई का औसत निकालना; लड़का हो तो उसमें साढ़े छह सेंटीमीटर जोड़ना, लड़की हो तो साढ़े छह घटाना. मिले आँकड़े के दोनों तरफ़ साढ़े आठ सेंटीमीटर का दायरा मानना.
वह साढ़े छह सेंटीमीटर असल में वयस्क पुरुष और वयस्क स्त्री की औसत लंबाई का फ़र्क़ है. इस तरीक़े से वही निकलता है जिसे बाल-रोग विशेषज्ञ 'टार्गेट हाइट' कहते हैं.
यह तरीक़ा बाल-चिकित्सा में सचमुच इस्तेमाल होता है, पर अकेला नहीं. डॉक्टर उसे बच्चे के ग्रोथ चार्ट से मिलाकर देखते हैं — बच्चा अपने परिवार के अपेक्षित दायरे में बढ़ रहा है या उसके बाहर, यह जाँचने के लिए.
जीन एक आँकड़ा नहीं देते, एक दायरा देते हैं
लंबाई पर असर डालने वाले जीन सैकड़ों की तादाद में हैं और वे माता-पिता से अलग-अलग जोड़ में आते हैं. इसीलिए एक ही घर के भाई-बहन अक्सर अलग-अलक़ लंबाई के होते हैं.
बचा हिस्सा माहौल का — खान-पान, ख़ासकर पहले दो साल का, बार-बार की बीमारियाँ, नींद और किशोरावस्था शुरू होने का समय. इनमें से कुछ चीज़ें हमारे हाथ में होती हैं.
एक पीढ़ी भर की मिसाल: पिछले पचास सालों में भारतीय नौजवानों की औसत लंबाई बढ़ी है. जीन वही हैं; खान-पान और सेहत बदली. यानी दायरा जीन तय करते हैं, पर उस दायरे में ठीक कहाँ खड़ा होना है, यह बहुत कुछ बाक़ी चीज़ों पर तय होता है.
लंबे माता-पिता, छोटा बच्चा — ऐसा क्यों होता है
'पापा छह फ़ुट, मैं पाँच फ़ुट सात — फिर बेटा क्लास में सबसे छोटा क्यों?' यह सवाल बार-बार आता है. ज़्यादातर बार जवाब समय का होता है, लंबाई का नहीं.
कुछ बच्चों की बढ़त देर से शुरू होती है — इसे 'कॉन्स्टिट्यूशनल डिले' कहते हैं, और यह अक्सर ख़ानदान में चलता है. ऐसे बच्चे सालों तक क़तार में पीछे रहते हैं और फिर सोलह-सत्रह की उम्र में, जब बाक़ियों की बढ़त थम जाती है, बढ़ते जाते हैं.
पिता ख़ुद देर से बढ़े थे क्या, यह सवाल यहाँ काम का है. दादा-दादी से पूछकर देखें — इसका जवाब अक्सर घर में ही मिल जाता है.
किशोरावस्था का समय लंबाई पर क्या असर डालता है
बढ़त का आख़िरी बड़ा दौर किशोरावस्था में आता है, और वही ज़्यादातर माता-पिता को अचानक लगता है. लड़कियों की तेज़ बढ़त क़रीब दस से बारह साल के बीच होती है; लड़कों की दो साल बाद, बारह से चौदह के बीच.
इसीलिए सातवीं-आठवीं की क्लास में लड़कियाँ लड़कों से लंबी दिखती हैं. यह फ़र्क़ थोड़े दिनों का है — लड़कों की बढ़त बाद में शुरू होती है, ज़्यादा चलती है और आख़िर में उनकी लंबाई ज़्यादा निकलती है.
यहाँ एक उलटी बात है: जल्दी किशोर होने वाला बच्चा शुरू में क्लास में सबसे लंबा दिखता है, पर उसकी हड्डियों की बढ़त की पट्टियाँ भी जल्दी बंद हो जाती हैं — यानी आख़िरी लंबाई उम्मीद से कम रह सकती है. लड़की में आठ साल से पहले या लड़के में नौ से पहले किशोरावस्था के लक्षण दिखें, तो यह डॉक्टर को दिखाने की बात है.
यह बढ़त की बीमारी पकड़ने का साधन नहीं
कई बार लंबाई कम होना थायरॉइड, आँतों में सोखने की दिक़्क़त, लंबी बीमारी या हॉर्मोन की कमी का लक्षण हो सकता है. यह साधन इनमें से कुछ भी नहीं पकड़ सकता और ऐसा दावा भी नहीं करता.
डॉक्टर को दिखाने लायक़ इशारे अलग हैं: बच्चा ग्रोथ चार्ट पर रेखाएँ पार कर नीचे उतर रहा हो, साल भर में चार सेंटीमीटर से कम बढ़त हो, या लंबाई और वज़न दोनों एक साथ पिछड़ रहे हों.
साल में एक बार घर की चौखट पर निशान लगाना इसके लिए सबसे आसान आदत है. साल भर में कितनी बढ़त हुई, यह आँकड़ा एक बार की लंबाई से ज़्यादा बताता है.
सवाल-जवाब
ज़्यादा दूध पीने से लंबाई बढ़ती है?
पूरा खाना और पर्याप्त कैल्शियम-प्रोटीन ज़रूरी हैं, पर ज़रूरत से ज़्यादा दूध से लंबाई नहीं बढ़ती. उल्टे दिन भर बहुत ज़्यादा दूध से आयरन की कमी हो सकती है.
लंबाई बढ़ाने की दवाएँ या पाउडर काम करते हैं?
बाज़ार के पाउडरों का लंबाई पर असर होने का प्रमाण नहीं है. ग्रोथ हॉर्मोन अलग विषय है — वह सिर्फ़ पक्के निदान वाली गिनी-चुनी बीमारियों में, विशेषज्ञ की निगरानी में दिया जाता है.
किस उम्र में लंबाई बढ़नी रुक जाती है?
लड़कियों की बढ़त क़रीब चौदह से सोलह, लड़कों की सोलह से अठारह साल तक थम जाती है. हड्डियों के सिरों की बढ़त-पट्टियाँ बंद हुईं कि लंबाई ठहर जाती है.
बच्चे की अभी की लंबाई डालकर अनुमान निकाल सकते हैं?
इस साधन में नहीं. दो साल से बड़े बच्चों के लिए ग्रोथ चार्ट से निकाला अनुमान ज़्यादा सटीक है — उसके लिए ग्रोथ कैलकुलेटर इस्तेमाल करें.
स्रोत
इस पन्ने का हर चिकित्सकीय आँकड़ा नीचे दी गई गाइडलाइनों से लिया गया है. आपके डॉक्टर की बात अलग हो तो पूछिए कि वे कौन-सी गाइडलाइन मानते हैं.
- WHO. WHO Child Growth Standards: Methods and Development (2006)Backs the page's repeated emphasis on growth charts (filled at every doctor visit) as the real tool for tracking a child's growth, and the use of growth chart centile lines to flag when a child is falling across lines.
- NIH. Constitutional Delay of Growth and Puberty – MedlinePlus / NCBI Bookshelf (2022)Supports the page's description of constitutional delay of growth and puberty as a familial pattern where children remain shorter for years and then continue growing at ages 16–17 when peers have stopped.
- NICE. Faltering growth: recognition and management (NICE guideline NG75) (2017)Supports the page's statement that poor growth can be a symptom of thyroid disorders, malabsorption, chronic illness, or hormone deficiency, and that growth velocity (annual gain) is more informative than a single height measurement.
- IAP. IAP Growth Monitoring Guidelines for Children from Birth to 18 Years (2015)Supports use of the mid-parental target height formula (average parental height ±6.5 cm adjusted for sex) as a standard paediatric tool alongside growth charts, and the page's figures for pubertal growth spurts in Indian children.
समीक्षा
- Nakul Phatak — सीईओ, theAsianparent इंडिया और इंडोनेशियाtheAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
- Roshni Chugani — मार्केटिंग प्रमुख, theAsianparent इंडिया और सिंगापुरमां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम






