आख़िरी माहवारी और चक्र की लंबाई डालें — अनुकूल दिन कैलेंडर पर रंगे हुए दिखेंगे. एक बात पहले ही साफ़: यह गर्भनिरोधक साधन नहीं है.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की औसत लंबाई — बस इतना. एक बात पहले ही साफ़: यह गर्भनिरोधक साधन नहीं है.
यह साधन आपके अगले तीन चक्र कैलेंडर पर बिछा देता है: माहवारी के दिन, गर्भधारण के अनुकूल पाँच-छह दिन, अंडा निकलने (ओव्यूलेशन) का अनुमानित दिन और अगली माहवारी की तारीख़. इस चक्र में गर्भ ठहरा तो प्रसव कब होगा, वह भी नीचे लिखा मिलता है.
पर यह अनुमान है, जाँच नहीं. अंडा ठीक कब निकला, कैलेंडर नहीं बता सकता — वह बस आपके पिछले चक्रों के औसत से मान लेता है कि अगला चक्र वैसा ही चलेगा. तनाव, बीमारी, सफ़र, वज़न में बदलाव — इनमें से कुछ भी चक्र खिसका सकता है.
और इसी वजह से इसे गर्भनिरोधक की तरह इस्तेमाल करना ख़तरनाक है. जो दिन बाहर से 'सुरक्षित' दिखता है, वह उस महीने सुरक्षित न हो, यह पूरी तरह मुमकिन है. गर्भ टालना हो तो डॉक्टर से बात करके सही साधन चुनें.
आम समझ यह है कि माहवारी ख़त्म होने से चौदह दिन गिनकर अंडा निकलता है. यह अट्ठाईस दिन के चक्र के लिए ठीक है और बाक़ी सबके लिए ग़लत.
असल में स्थिर चक्र का दूसरा हिस्सा होता है — अंडा निकलने से माहवारी आने तक का समय. वह लगभग हर महिला में बारह से सोलह दिन का होता है. बदलता है पहला हिस्सा, यानी माहवारी से अंडा निकलने तक का.
इसलिए सही तरीक़ा है अगली माहवारी की तारीख़ निकालकर वहाँ से चौदह दिन पीछे गिनना. इस साधन में यही किया गया है — और इसीलिए अपने चक्र की असली लंबाई डालना ज़रूरी है.
अंडा निकलने के बाद सिर्फ़ बारह से चौबीस घंटे ज़िंदा रहता है. शुक्राणु मगर महिला के शरीर में पाँच दिन तक टिक सकते हैं — गर्भाशय-ग्रीवा का स्राव अनुकूल हो तो.
इसका मतलब, अनुकूल समय अंडा निकलने से पाँच दिन पहले खुलता है और निकलने के क़रीब एक दिन बाद बंद हो जाता है. संबंध ओव्यूलेशन से दो दिन पहले और उसी दिन हों, तब गर्भ ठहरने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.
इसलिए 'ठीक उसी दिन' को पकड़ने की ज़िद ज़रूरी नहीं. अनुकूल समय में हर दो-तीन दिन पर संबंध हों तो वह दिन अपने आप आ जाता है — और रोज़ का तय कार्यक्रम बनाकर चलने से जोड़े पर जो दबाव पड़ता है, वह भी टल जाता है.
गर्भाशय-ग्रीवा का स्राव सबसे काम का इशारा है और उसी की बात सबसे कम होती है. अंडा निकलने के दिनों में वह अंडे की सफ़ेदी जैसा पतला, फिसलता और खिंचने वाला हो जाता है. यह इशारा उसी महीने काम आता है.
सुबह का शारीरिक तापमान अंडा निकलने के बाद क़रीब आधा डिग्री बढ़ता है और अगली माहवारी तक वैसा ही रहता है. पर यह बढ़त अंडा निकल जाने के बाद होती है — यानी वह इस महीने की योजना के लिए नहीं, अगले महीने का अंदाज़ा बाँधने के लिए काम की है.
कुछ महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में एक तरफ़ हल्की चुभन महसूस होती है. कुछ को कुछ भी महसूस नहीं होता, और वह भी पूरी तरह सामान्य है. लक्षण महसूस न होना यह नहीं कि अंडा नहीं निकल रहा.
मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली ओव्यूलेशन पट्टियाँ पेशाब में ल्यूटिनाइज़िंग हॉर्मोन (LH) नापती हैं. अंडा निकलने से क़रीब चौबीस से छत्तीस घंटे पहले यह हॉर्मोन तेज़ी से बढ़ता है, और पट्टी वही बढ़त पकड़ती है.
इस्तेमाल का तरीक़ा मायने रखता है. दोपहर या शाम को जाँचें, सुबह की पहली पेशाब से नहीं — LH की बढ़त अक्सर सुबह शुरू होती है और दोपहर तक पेशाब में उतरती है. जाँच से दो घंटे पहले बहुत पानी न पिएँ; पतली पेशाब में नतीजा फीका आता है.
पर सीमाएँ भी समझ लें. पट्टी पॉज़िटिव आई यानी हॉर्मोन बढ़ा, बस इतना ही — अंडा वाक़ई निकला, इसकी गारंटी नहीं. PCOS वाली महिलाओं में LH पहले से बढ़ा रहता है, इसलिए पट्टी बार-बार पॉज़िटिव आती है और उसका कोई मतलब नहीं होता. ऐसे में पट्टियों पर पैसे लगाने से डॉक्टर से मिलना ज़्यादा काम का है.
चक्र हर महीने सात दिन से ज़्यादा आगे-पीछे होता हो, तो कैलेंडर का अनुमान ख़ास काम का नहीं. PCOS में तो कुछ चक्रों में अंडा निकलता ही नहीं, इसलिए सिर्फ़ तारीख़ों के भरोसे रहना निराशा की ओर ही ले जाता है.
ऐसे में कैलेंडर से ज़्यादा काम स्राव का निरीक्षण और घर पर होने वाली ओव्यूलेशन पट्टियाँ आती हैं. पर PCOS में ये पट्टियाँ भी झूठे पॉज़िटिव दे सकती हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह से इस्तेमाल करें.
साल भर नियमित कोशिश के बाद भी गर्भ न ठहरे तो स्त्री-रोग विशेषज्ञ से मिलें. उम्र पैंतीस से ऊपर हो तो छह महीने में ही — और जाँच दोनों की होती है, सिर्फ़ महिला की नहीं. पुरुष की तरफ़ की वजह क़रीब आधे जोड़ों में मिलती है.
सवाल: अनुकूल दिनों में रोज़ संबंध रखने चाहिए? — ज़रूरत नहीं. हर दो दिन पर काफ़ी है और उससे शुक्राणुओं की संख्या भी अच्छी रहती है. रोज़ के तय कार्यक्रम का दबाव उल्टा नुक़सान करता है.
सवाल: संबंध के बाद पैर ऊपर करके लेटने से फ़र्क़ पड़ता है? — इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं. शुक्राणु कुछ ही मिनटों में गर्भाशय-ग्रीवा तक पहुँच जाते हैं. तुरंत उठ बैठने से कुछ नहीं बिगड़ता.
सवाल: माहवारी देर से आई यानी गर्भ ठहर गया? — नहीं. माहवारी देर से आने की कई वजहें होती हैं. तारीख़ निकलने के बाद जाँच करें तो घर की गर्भ-जाँच काफ़ी भरोसेमंद है; पहले करें तो वह झूठी नेगेटिव आ सकती है.
सवाल: क्या इस साधन से लड़का-लड़की तय करने में मदद मिलती है? — नहीं. संबंध का समय तय करके बच्चे का लिंग तय किया जा सकता है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं — और लिंग चयन भारत में क़ानूनन अपराध है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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