वाराणसी के घाट
वाराणसी के घाट — गंगा किनारे की चौड़ी सीढ़ियाँ, नावें, छतरियाँ और मंदिर. सुबह-सुबह यहाँ दीये तैरते हैं और शाम को आरती होती है.

मुफ़्त. A4 काग़ज़ पर छपने के आकार का. छपाई के डिब्बे में ‘ब्लैक ऐंड व्हाइट’ चुन लें तो रंगीन स्याही बचती है. स्कूल और आँगनवाड़ी के लिए जितनी चाहिए प्रतियाँ निकालें.
रंग भरते-भरते क्या बात करें
बच्चा चित्र में रमा होता है, वही दस मिनट शब्द आसानी से भीतर जाते हैं — पाठ नहीं लगते इसलिए. ये पूछकर देखिए:
- घाट की सीढ़ियाँ सीधे पानी में क्यों उतरती हैं?
- गंगा में तैरते दीये कहाँ जाते होंगे?
- नाव वाले भैया दिन भर में कितने फेरे लगाते होंगे?
यह चित्र जो शब्द सिखाता है
रंग भरते समय हर चीज़ का नाम हिंदी में बोलिए, और साथ में अंग्रेज़ी नाम भी — दोनों एक साथ सुनकर बच्चा दोनों सीख लेता है. जवाब किसी भी भाषा में आए, टोकने मत बैठिए.
घाटगंगानावआरतीदीया
किस उम्र के लिए
दो साल का बच्चा पूरे काग़ज़ पर आड़ी-तिरछी लकीरें खींचेगा — वही ठीक है, उस उम्र का काम ही वह है. तीन साल में आकार पहचान में आते हैं, पर रंग लकीर के बाहर जाता है. चार-पाँच साल में लकीर के भीतर रहना आने लगता है. उम्र कोई भी हो, ‘लकीर के अंदर भरो’ कहकर टोकिए मत — फिर वह खेल नहीं, काम बन जाता है.
इसी सेट के और चित्र
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आमेर का क़िला, जयपुर
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