गर्भावस्था

गर्भावस्था का सैंतीसवाँ सप्ताह: 'अर्ली टर्म' — अब जो भी दिन हो, सही दिन है

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

Google पर पसंदीदा
गर्भावस्था का सैंतीसवाँ सप्ताह: 'अर्ली टर्म' — अब जो भी दिन हो, सही दिन है

आज से प्रसव 'समय से पहले' नहीं है. दर्द शुरू हों तो अब उन्हें रोका नहीं, बढ़ने दिया जाता है. यानी अब हर रात सोने से पहले का सवाल जायज़ है — 'कहीं आज की रात तो नहीं?'

दहलीज़ पार

सैंतीस पूरे — और शब्दकोश बदल गया. अब तक प्रसव के हर लक्षण पर 'रोको, अभी जल्दी है' की दौड़ थी; आज से जवाब है 'आने दो.' गर्भ अब 'अर्ली टर्म' है — बच्चा बाहर की दुनिया के लिए तैयार माना जाता है.

'अर्ली' शब्द पर भी ग़ौर कीजिए — पूरा भराव 39-40 पर आता है, और बिना वजह जल्दी कराने का कोई कारण नहीं. पर अब से जो अपने आप शुरू हो, वह शुभ है — शरीर ने अपनी घड़ी देख ली है.

इसलिए यह हफ़्ता पहचान पक्की करने का है: असली दर्द कैसे दिखते हैं, पानी फूटना कैसा लगता है, और किस पल घर से निकलना है. यह तीनों जवाब अब आपके और घर के हर बड़े के पास ज़बानी होने चाहिए.

इस सप्ताह आपका बच्चा

बच्चा अब सरसों के भरे थैले जैसा ठोस — सैंतालीस सेंटीमीटर, वज़न तीन किलो की ओर. रोज़ की चर्बी-चढ़ाई जारी है — गाल, जाँघें, कलाइयों की वे मशहूर 'चूड़ियाँ' बन रही हैं.

सिर के बाल (जिन बच्चों के होते हैं) अब सेंटीमीटरों में हैं, और नाख़ून सिरों से आगे — जन्म के पहले हफ़्ते की नेल-कटिंग सूची में रहे. पकड़ इतनी मज़बूत है कि जन्म के दिन आपकी उँगली थाम लेगी — वह पल इसी पकड़ की रिहर्सल का फल है.

दिमाग़ और फेफड़े आख़िरी परतें चढ़ा रहे हैं — यही 'अर्ली' और 'फुल' टर्म का फ़र्क़ है. भीतर का हर अतिरिक्त दिन अब भी बच्चे के खाते में जमा हो रहा है.

आपके शरीर में बदलाव

असली दर्द की पहचान — आख़िरी बार, पूरी: पेट के साथ कमर से आगे आता दर्द, नियमित अंतराल, हर आधे घंटे में पास-लंबे-तेज़ होते हुए, आराम-पानी से न रुकने वाले. कॉन्ट्रैक्शन टाइमर की आधे घंटे की नाप शक मिटा देती है.

पानी फूटना — धार से भी होता है और रिस-रिसकर भी. रोका नहीं जा सकता, गंध पेशाब जैसी नहीं. फूटे तो रंग देखिए (साफ़/गुलाबी सामान्य, हरा-भूरा फ़ौरन बताने की बात) और सीधे फ़ोन — दर्द का इंतज़ार नहीं.

और तीसरा लक्षण जो अनदेखा रह जाता है — बस 'कुछ ठीक नहीं लग रहा.' प्रसूति में माँ की इस छठी इंद्री की इज़्ज़त की जाती है. मन कहे कुछ अलग है, तो फ़ोन कीजिए; 'झूठा अलार्म' शब्दकोश से निकाल दीजिए.

इस सप्ताह क्या करना है

हर हफ़्ते की जाँच जारी — अब हर मुलाक़ात में ग्रीवा की जाँच (कितनी खुली-मुलायम) भी हो सकती है. उसका आँकड़ा सुनकर हिसाब मत लगाइए — दो सेंटीमीटर खुली ग्रीवा हफ़्तों टिक सकती है और बंद ग्रीवा रात में खुल सकती है.

फ़ोन की तैयारी: अस्पताल-डॉक्टर-गाड़ी-108 नंबर सामने; फ़ोन रात में चार्ज पर; और एक 'ख़बर-सूची' बनाकर रखिए — किसे जन्म के बाद बताना है (पहले घंटे वाले नाम अलग, बाक़ी दुनिया अलग).

पिता के लिए इस हफ़्ते की पढ़ाई: प्रसव के चरण — शुरुआती (लंबा, घर पर कट सकता है), सक्रिय (अस्पताल), और जन्म. साथ में उसका काम: समय नापना, पानी-हौसला देना, और फ़ैसलों के समय माँ की आवाज़ बनना.

घर का खाना-इंतज़ाम 'उस दिन' के लिए तैयार — दो वक़्त का खाना जो जल्दी बने या बना रखा जा सके, और लौटने के दिन के लिए दाल-खिचड़ी का सामान. अस्पताल से लौटा घर पहले दिन भूखा नहीं रहना चाहिए.

सैंतीसवाँ सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातसैंतीसवें सप्ताह में
मुख्य घटनाअर्ली टर्म — प्रसव अब रोका नहीं जाता
बच्चे का आकार47 सेंटीमीटर, ~2.9 किलो
असली दर्दनियमित + पास आते + तेज़ होते + रुकते नहीं
पानी फूटे तोरंग देखो, सीधे फ़ोन — दर्द का इंतज़ार नहीं
निकलने की कसौटी5-1-1, या डॉक्टर की बताई अपनी कसौटी
पिता की पढ़ाईप्रसव के चरण + अपना काम
रोज़ जारीकिक-गिनती — जन्म के दिन तक

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

हलचल पहली पंक्ति, जन्म के दिन तक — कम लगे तो उसी समय फ़ोन. प्रसव के लक्षण अब 'ख़तरा' नहीं, 'ख़बर' हैं — पर वे भी फ़ोन करके ही आगे बढ़ें: कब घर पर रहना है और कब आना है, यह उस समय की बात-चीत तय करेगी.

अब भी 'उसी घंटे' वाली सूची अलग है: ताज़ा बहता ख़ून, हरा-भूरा पानी, हलचल का ग़ायब होना, सिरदर्द-चमक-सूजन-ऊपरी पेट दर्द, दो दर्दों के बीच भी न थमता दर्द, या बुख़ार — इनमें फ़ोन नहीं, रवानगी. फ़ोन रास्ते से कर लीजिए (ज़रूरत पर 108).

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

अपनी डिलीवरी की तारीख़ निकालें

आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.

यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ग्रीवा जाँच में 'एक उँगली खुली' आया

इसका मतलब कब तक? — कोई नहीं जानता — यही ईमानदार जवाब है. खुलना तैयारी है, तारीख़ नहीं. इस आँकड़े से रातों की नींद मत जोड़िए.

झाड़ू-पोछा करने से जल्दी दर्द उठता है

करूँ? — हल्का घर-काम और चलना-फिरना अच्छा है — पर वह प्रसव 'लाता' नहीं, शरीर को तैयार रखता है. दर्द उठाने के घरेलू नुस्ख़ों (तेज़ चाल, सीढ़ियाँ, अरंडी का तेल, गर्म मसाले) में से किसी का भरोसेमंद प्रमाण नहीं, और कुछ नुक़सान भी कर सकते हैं. शरीर की घड़ी सबसे सही घड़ी है.

अस्पताल कब पहुँचना 'बहुत जल्दी' और कब 'बहुत देर' है?

जल्दी का नुक़सान बस इंतज़ार है — शुरुआती दौर में पहुँचे तो अक्सर घर लौटा दिया जाता है, और वह ठीक ही है. देर का नुक़सान असली है. इसलिए पलड़ा हमेशा जल्दी की तरफ़ झुकाइए — ख़ासकर दूसरा बच्चा, बारिश-जाम वाला रास्ता, या रात का समय हो.

सिज़ेरियन की तारीख़ मिली है (मेडिकल वजह से)

उससे पहले दर्द शुरू हो गए तो? — तो योजना बदलकर वही होगा जो उस समय सही है — अक्सर वही सिज़ेरियन, बस तय दिन से पहले. दर्द या पानी — कुछ भी शुरू हो तो तारीख़ का इंतज़ार नहीं; सीधे अस्पताल फ़ोन. तारीख़ काग़ज़ की है, शरीर की नहीं.

गर्भावस्थाप्रेगनेंसी वीक बाय वीकबच्चे की बढ़तगर्भावस्था की जाँचें

स्रोत

इस पन्ने का हर चिकित्सकीय आँकड़ा नीचे दी गई गाइडलाइनों से लिया गया है. आपके डॉक्टर की बात अलग हो तो पूछिए कि वे कौन-सी गाइडलाइन मानते हैं.

  1. WHO. WHO recommendations on antenatal care for a positive pregnancy experience (2016)
    Supports the page's guidance on weekly antenatal visits in late pregnancy and fetal movement monitoring (alerting a provider if movement is reduced).
  2. ACOG. Definition of Term Pregnancy (Committee Opinion 579) (2013)
    Supports the page's classification of 37 weeks as 'early term,' the distinction between early term (37–38 weeks) and full term (39–40 weeks), and the statement that elective delivery before 39 weeks should be avoided.
  3. ACOG. Preterm Labor and Birth (FAQ) (2020)
    Supports the page's description of true labor signs: regular contractions that increase in frequency, duration, and intensity, are not relieved by rest or hydration, and are accompanied by lower back pain.
  4. NICE. Intrapartum care for healthy women and babies (CG190) (2017)
    Supports the page's descriptions of rupture of membranes (spontaneous trickle or gush, not smelling like urine), the significance of green-brown (meconium-stained) amniotic fluid requiring immediate hospital attendance, and the stages of labour including latent and active phases.
  5. RCOG. Reduced Fetal Movements (Green-top Guideline No. 57) (2011)
    Supports the page's urgent warning that absent or reduced fetal movements should prompt immediate contact with a provider without delay, listed as a same-hour emergency sign.
  6. NICE. Hypertension in pregnancy: diagnosis and management (NG133) (2019)
    Supports the page's listing of headache, visual disturbances (flashes), oedema, and upper abdominal pain as emergency warning signs requiring immediate hospital attendance, consistent with features of severe pre-eclampsia.

समीक्षा

  • Nakul Phatak — सीईओ, theAsianparent इंडिया और इंडोनेशिया
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni Chugani — मार्केटिंग प्रमुख, theAsianparent इंडिया और सिंगापुर
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम