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गर्भावस्था का छत्तीसवाँ सप्ताह: नौवाँ महीना — अब हर हफ़्ते जाँच

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

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गर्भावस्था का छत्तीसवाँ सप्ताह: नौवाँ महीना — अब हर हफ़्ते जाँच

नौवाँ महीना लग गया. मुलाक़ातें अब हर हफ़्ते, बैग दरवाज़े पर, और शरीर में 'उतरने' की हलचल — बच्चा नीचे बैठ रहा है, साँस खुल रही है, और घड़ी की सुई अब क़रीब से दिखती है.

साँस खुली — यानी बच्चा उतरा

एक सुबह अचानक लगता है — 'अरे, साँस खुल गई!' हफ़्तों बाद पूरी साँस भीतर जाती है. जश्न मनाइए, पर वजह जान लीजिए: बच्चा श्रोणि में नीचे उतर गया है. अंग्रेज़ी में इसे 'लाइटनिंग' कहते हैं.

क़ीमत उसी सौदे की है जो पहले बताया था — मूत्राशय अब सीधे दबाव में है, पेशाब की हाज़िरी और बढ़ेगी, और चाल में 'बतख़-चाल' की झलक आएगी. पहला बच्चा अक्सर हफ़्तों पहले उतरता है; दूसरा कभी-कभी सीधे प्रसव के दिन.

और आज से कैलेंडर की रफ़्तार बदलती है — मुलाक़ात हर हफ़्ते. हर बार बीपी-पेशाब-वज़न, पेट की नाप, धड़कन, और अब बच्चे की करवट का पक्का हिसाब. ब्रीच रहा हो तो विकल्पों की बात भी अब होगी.

इस सप्ताह आपका बच्चा

बच्चा अब बड़ी पत्तागोभी जितना — छियालीस सेंटीमीटर, वज़न पौने तीन किलो की ओर. गाल भरे, बाँहें गोल — 'नवजात' वाली शक्ल तैयार है.

फेफड़े अब तैयारी की उस पायदान पर हैं जहाँ ज़्यादातर बच्चों को जन्म के बाद किसी मदद की ज़रूरत नहीं पड़ती. चूसने-निगलने-साँस का तालमेल — दूध पीने की तिकड़ी — आख़िरी रिहर्सल में है.

वर्निक्स और लानुगो दोनों अब उतर रहे हैं — निगले हुए पानी के साथ ये आँतों में जाकर पहली पॉटी (मिकोनियम) का हिस्सा बनते हैं. भीतर की दुनिया अपना हिसाब समेट रही है.

आपके शरीर में बदलाव

श्रोणि पर दबाव अब चाल बदल देता है — उठना-बैठना धीमा, करवट लेना प्रोजेक्ट. यह आख़िरी हफ़्तों की सामान्य शक्ल है. जो भी काम खड़े होकर लंबा चलता है, वह अब बँटना या टलना चाहिए.

योनि-स्राव अब और बढ़ेगा और गाढ़ा हो सकता है. उसमें एक दिन गाढ़ी लेई जैसा, कभी ख़ून की महीन लकीर वाला टुकड़ा दिखे — यह 'म्यूकस प्लग' है, गर्भाशय-ग्रीवा का डाट. उसका निकलना तैयारी की निशानी है, पर तारीख़ नहीं — उसके बाद प्रसव घंटों में भी आ सकता है, हफ़्तों में भी.

नींद अब सबसे टूटी हुई है — और यहीं वह बात दोहराने लायक़ है: 'बच्चा आने से पहले सो लो' की सलाह चिढ़ाती है, पर दिन की हर झपकी अब बैंक में जमा है. घर के काम की सूची से 'ज़रूरी' के अलावा सब कटे.

इस सप्ताह क्या करना है

हर हफ़्ते की जाँच का सिलसिला शुरू — एक भी न छूटे. इसी दौर की जाँचें बीपी-प्रोटीन की चुपचाप चढ़ती दिक़्क़तें पकड़ती हैं, और यही उनका पूरा मतलब है.

ब्रीच निकला हो तो विकल्प समझ लीजिए — बाहर से पलटाने की कोशिश (ECV) कुछ केंद्रों पर होती है, वरना सिज़ेरियन की योजना बनती है. दोनों में कोई 'हार' नहीं है; सही जानकारी के साथ लिया फ़ैसला ही जीत है.

घर से अस्पताल का 'ड्राई रन' एक बार कर लीजिए — किस गेट से घुसना है, पर्चा कहाँ बनता है, लेबर-रूम किस मंज़िल पर. बीस मिनट की यह मशक़्क़त 'उस रात' की आधी घबराहट काट देती है.

प्रसव के बाद के काग़ज़ भी अब सोच लीजिए — जन्म-प्रमाणपत्र अस्पताल से कैसे मिलेगा, बीमा/योजना के दावे का तरीक़ा, और (नौकरी में) बच्चे के जुड़ने की HR-प्रक्रिया. सूची बना दीजिए — दौड़ने का काम पिता के नाम.

छत्तीसवाँ सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातछत्तीसवें सप्ताह में
मुख्य घटनानौवाँ महीना; बच्चा नीचे उतरता है (लाइटनिंग)
बच्चे का आकार46 सेंटीमीटर, ~2.7 किलो
आपके मुमकिन लक्षणखुली साँस + बढ़ी पेशाब, बतख़-चाल, म्यूकस प्लग
मुलाक़ातेंअब हर हफ़्ते — एक भी नहीं छूटे
ब्रीच हो तोECV या सिज़ेरियन-योजना — विकल्प समझिए
कर डालिएअस्पताल का ड्राई रन; काग़ज़ों की सूची पिता के नाम
रोज़ जारीकिक-गिनती — आख़िरी हफ़्तों में सबसे ज़रूरी

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

हलचल पहली पंक्ति — कम लगे तो उसी समय फ़ोन. अगले हफ़्ते से प्रसव-लक्षण 'समय से पहले' नहीं रहेंगे — पर इस हफ़्ते तक हैं: पानी, नियमित दर्द, ख़ून — उसी समय अस्पताल.

म्यूकस प्लग के साथ हल्की लकीर सामान्य है — पर ताज़ा, बहता ख़ून सामान्य कभी नहीं. और सिरदर्द-चमक-सूजन-ऊपरी पेट दर्द की चौकड़ी आख़िरी हफ़्तों में सबसे ख़तरनाक चाल चलती है — इनमें से कुछ भी हो तो यह 'अगली मुलाक़ात' की बात नहीं, उसी घंटे की बात है.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

अपनी डिलीवरी की तारीख़ निकालें

आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.

यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: बच्चा उतर गया — अब प्रसव कितने दिन दूर? — तारीख़ का कोई पक्का रिश्ता नहीं. पहला बच्चा उतरकर हफ़्तों टिक सकता है. उतरना बस यह कहता है — दिशा सही है, तैयारी पूरी रखो.

सवाल: 'छत्तीस पूरे, अब तो बच्चा पूरा तैयार है' — घर की राय है. सच? — पूरी तरह नहीं. 37 से 'अर्ली टर्म' शुरू होता है और असली भराई 39 तक चलती है — दिमाग़ और फेफड़ों की आख़िरी परतें इन्हीं हफ़्तों की हैं. बिना डॉक्टरी वजह के जल्दी 'करवा लेने' का कोई तुक नहीं — तारीख़ का फ़ैसला मेडिकल हो, पंचांग या सुविधा नहीं.

सवाल: प्रसव का दर्द शुरू होने पर नहा लूँ, खाना खा लूँ — या भागूँ? — शुरुआती दर्द (लंबे अंतराल वाले) में घर पर नहाना-हल्का खाना ठीक ही है — बशर्ते पानी न फूटा हो और अस्पताल पास हो. 5-1-1 की चाल बनते ही निकलना है. पानी फूट गया हो तो नहाने का समय नहीं — सीधे फ़ोन और रवानगी.

सवाल: सास कह रही हैं आख़िरी महीने में घी पीने से प्रसव आसान होता है — पीऊँ? — घी से रास्ता 'चिकना' नहीं होता — यह प्यारी पर ग़लत धारणा है. थोड़ा घी खाने का हिस्सा रहे, कोई हर्ज नहीं; गिलास भरकर पीने से सिर्फ़ वज़न और जलन बढ़ेगी. प्रसव को आसान चलना-फिरना, साँस की तकनीक और सही समय पर सही अस्पताल बनाते हैं.

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम