
हर सप्ताह बच्चा कैसे बढ़ता है, आपके शरीर में क्या बदलता है, कौन सा स्कैन कब — चालीसों सप्ताहों के लिए अलग-अलग गाइड.
पहली मुलाक़ात से निकलते समय हाथ में एक आँकड़ा होता है — 'आपको छह सप्ताह हो गए.' घर आकर हिसाब लगाया तो कुछ नहीं मिलता: 'हमने तो पिछले ही महीने सोचा था, फिर छह सप्ताह कैसे?' — यह उलझन लगभग हर घर की है.
वजह सीधी है: गर्भावस्था के सप्ताह गर्भ ठहरने के दिन से नहीं गिने जाते — आख़िरी माहवारी शुरू होने के पहले दिन से गिने जाते हैं. इसलिए पहले दो सप्ताह आप गर्भवती होती ही नहीं. डॉक्टर का आँकड़ा और आपका हिसाब दो सप्ताह अलग रहता है — ग़लती किसी की नहीं.
आख़िरी माहवारी की तारीख़ याद न हो या चक्र अनियमित हो तो चिंता नहीं — पहली तिमाही का डेटिंग स्कैन सटीक तारीख़ दे देता है. नीचे चालीसों सप्ताह के अलग-अलग पन्ने हैं; अपना सप्ताह चुनकर पढ़िए.
हर सप्ताह के पन्ने का ढाँचा एक है: उस सप्ताह बच्चा कितना बढ़ा, आपके शरीर में क्या बदलता है, उस सप्ताह क्या करना है, एक नज़र का तक्ता, तुरंत डॉक्टर से मिलने के लक्षण, और आख़िर में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल.
सब पढ़कर रटने की ज़रूरत नहीं. नया सप्ताह लगे उस दिन एक बार पढ़ लिया, इतना काफ़ी — उस सप्ताह कोई स्कैन-जाँच हो तो फ़ोन में याद लगा ली. और डॉक्टर के पास जाने से पहले सवाल लिखकर ले जाइए; कमरे में जाकर आधे भूल जाते हैं.
बच्चे के आकार की तुलनाएँ — तिल, चावल, नींबू, अमरूद, आम, नारियल, तरबूज़ — सिर्फ़ मोटा अंदाज़ा देने के लिए हैं. हर बच्चा अपनी रफ़्तार से बढ़ता है; स्कैन का आकार इनसे थोड़ा कम-ज़्यादा होना अपने आप में कोई दिक़्क़त नहीं.
तीनों तिमाहियों में शरीर और बच्चे की बढ़त बिल्कुल अलग पड़ावों पर होती है. पहली तिमाही अंग बनने की — बाहर कुछ नहीं दिखता, भीतर सबसे ज़रूरी काम चलता है. दूसरी आम तौर पर सबसे आरामदेह. तीसरी वज़न चढ़ने और प्रसव की तैयारी की.
हर तिमाही में क्या होता है, उसका छोटा नक़्शा नीचे. पूरी बात के लिए उस-उस सप्ताह का पन्ना देखिए.
| पड़ाव | सप्ताह | मुख्य रूप से क्या होता है |
|---|---|---|
| पहली तिमाही | 1 से 13 सप्ताह | अंग बनने का दौर; मतली, थकान; फ़ोलिक एसिड; डेटिंग स्कैन, NT स्कैन |
| दूसरी तिमाही | 14 से 27 सप्ताह | सबसे आरामदेह दौर; पहली हलचल; एनॉमली स्कैन (18-22); शुगर-जाँच (24-28) |
| तीसरी तिमाही | 28 से 40 सप्ताह | तेज़ वज़न-बढ़त; रोज़ किक-गिनती; ग्रोथ-स्कैन; प्रसव की तैयारी |
गर्भावस्था में एक चीज़ कभी नहीं चूकनी — सही सप्ताह में सही जाँच. ख़ासकर 18 से 22 सप्ताह का एनॉमली स्कैन और 24 से 28 की शुगर-जाँच किसी भी वजह से आगे नहीं टालनी हैं.
कौन सी जाँच किस सप्ताह — एक जगह लिखकर रखिए; इन सबकी नोंद आपके माता-बाल सुरक्षा (MCP) कार्ड पर होती है. सरकारी केंद्रों पर हर महीने की 9 तारीख़ को PMSMA शिविर में मुफ़्त जाँच होती है, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व आँगनवाड़ी से आयरन-फ़ोलिक एसिड (IFA) की गोलियाँ मुफ़्त मिलती हैं.
| सप्ताह | जाँच | किसलिए |
|---|---|---|
| 8 से 13 | डेटिंग स्कैन | प्रसव की सटीक तारीख़ तय करने के लिए |
| 11 से 13 सप्ताह 6 दिन | NT स्कैन + डबल मार्कर | गुणसूत्र-गड़बड़ी की संभावना का अंदाज़ा (निदान नहीं) |
| 18 से 22 | एनॉमली (TIFFA) स्कैन | बच्चे के अंगों की तफ़सीली जाँच — चूकनी नहीं |
| 24 से 28 | ग्लूकोज़ जाँच (GTT) | गर्भावस्था की शुगर पकड़ने के लिए |
| क़रीब 28 | एंटी-D इंजेक्शन (Rh नेगेटिव माँ) | अगली गर्भावस्थाओं की हिफ़ाज़त के लिए |
| क़रीब 32 | ग्रोथ-स्कैन | वज़न, पानी की मात्रा, प्लेसेंटा की जगह |
| 36 से आगे | हर हफ़्ते जाँच | बच्चे की करवट, बीपी, प्रसव की तैयारी |
पहली तिमाही की तीन सबसे भारी चीज़ें — मतली, थकान और बार-बार पेशाब. ये कमज़ोरी के लक्षण नहीं, हॉर्मोन के बदलाव का असर हैं. नौकरी वाली महिलाओं को इस दौर में थोड़ा धीमा चलना पड़ता है, और उसमें अपराध-बोध जैसा कुछ नहीं. महक से मतली बढ़ती है, इसलिए गर्म खाने की जगह थोड़ा ठंडा खाना आसान पड़ता है.
दूसरी तिमाही में मतली घटती है और भूख लौटती है. पेट दिखने लगता है और पहली हलचलें महसूस होती हैं (16 से 22 सप्ताह के बीच; पहली गर्भावस्था में देर मुमकिन — दोनों सामान्य). कमर-दर्द, पैरों की नसें और क़ब्ज़ इस दौर के आम साथी हैं. दूसरी तिमाही से बायीं करवट सोने से गर्भाशय की तरफ़ रक्त-संचार बेहतर रहता है.
तीसरी तिमाही में बच्चे का वज़न तेज़ी से चढ़ता है; गर्भाशय डायाफ़्राम को दबाता है तो साँस फूलती है, सीने की जलन बढ़ती है और रात की नींद टूटती है. यह थकाने वाला है पर आम तौर पर ख़तरे वाला नहीं. अट्ठाईसवें सप्ताह से रोज़ एक ही समय हलचलें गिनना — दो घंटे में दस — बच्चे की सेहत पर नज़र रखने का सबसे सादा और भरोसेमंद तरीक़ा है.
'तीन महीने तक किसी को नहीं बताते' — यह रिवाज़ है, नियम नहीं. पहले तीन महीनों में गर्भपात की आशंका तुलना में ज़्यादा रहती है, वहीं से यह चलन आया. पर किसी को न बताने पर कुछ ऊँच-नीच हो जाए तो बात करने वाला भी नहीं बचता — कम से कम पति और एक भरोसे के इंसान को बताकर रखिए.
'अब दो लोगों का खाना है' — सबसे फैला हुआ भ्रम. ज़रूरत बस एक छोटे नाश्ते जितनी अतिरिक्त है (क़रीब 350 कैलोरी), दोगुनी नहीं. ज़रूरत मात्रा की नहीं, गुणों की है — आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन.
'ग्रहण में बाहर नहीं निकलना, सुई-कैंची नहीं छूनी' — इनका वैज्ञानिक आधार नहीं है. पर बड़ों की कही सही बातें भी बहुत हैं: थोड़ा-थोड़ा बार-बार खाना, गुड़-चना और तिल, हरीरा-पंजीरी की परंपरा, और पूरा आराम — इन सब पर आज की चिकित्सा भी हाँ ही कहती है. गोद-भराई जैसी रस्में भी अच्छी हैं — उनमें घर का ध्यान और सहारा दोनों मिलते हैं. और एक बात घर में साफ़ कह दीजिए: बच्चे का लिंग जँचवाना भारत में क़ानूनन अपराध है (PCPNDT क़ानून).
जन्म के बाद की एक बात अभी से तय कर लीजिए: पहले दिनों में बच्चे को सिर्फ़ माँ का पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) देना है. शहद, घुट्टी, चीनी का पानी, जानवर का दूध — कुछ नहीं. इनसे संक्रमण का ख़तरा होता है और माँ के दूध की शुरुआत भी बिगड़ती है. यह बात प्रसव से पहले घर में कर लीजिए, क्योंकि बाद में आप बहस की हालत में नहीं होंगी.
नीचे में से कुछ भी दिखे तो अगली मुलाक़ात का इंतज़ार मत कीजिए — उसी दिन अस्पताल जाइए (आपात स्थिति में 108).
ज़्यादा रक्तस्राव; पेट में तेज़ दर्द; पानी जैसा स्राव बहना; तेज़ सिरदर्द के साथ धुँधला दिखना या चेहरे-हाथों पर सूजन; झटके आना; बुख़ार; पेशाब में जलन; बच्चे की हलचल सामान्य से कम होना (अट्ठाईसवें सप्ताह के बाद दो घंटे में दस से कम).
ये पन्ने सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए हैं. आपकी गर्भावस्था की सही स्थिति आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ ही बता सकते हैं; दवा, खान-पान और आराम का अंतिम फ़ैसला उन्हीं का.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.
यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.
सवाल: मुझे कौन सा सप्ताह चल रहा है, कैसे पता करूँ? — आख़िरी माहवारी शुरू होने के पहले दिन से आज तक के दिन गिनकर सात से भाग दीजिए. तारीख़ याद न हो तो डेटिंग स्कैन सटीक बता देता है.
सवाल: डिलीवरी की तारीख़ कैसे निकालते हैं? — आख़िरी माहवारी की तारीख़ में 280 दिन (40 सप्ताह) जोड़ते हैं. पर सिर्फ़ चार-पाँच प्रतिशत बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर आते हैं — वह समय-सीमा नहीं, अंदाज़ा है.
सवाल: 40 सप्ताह निकल गए और प्रसव नहीं हुआ — घबराएँ? — नहीं. 41 सप्ताह तक इंतज़ार सामान्य है; तब डॉक्टर ज़्यादा निगरानी या दर्द शुरू कराने (इंडक्शन) की बात करेंगे. बस हलचल कम लगे तो तुरंत जाइए.
सवाल: क्या हर सप्ताह के लक्षण सबमें एक जैसे होते हैं? — नहीं. एक ही महिला की दो गर्भावस्थाओं में भी अलग होते हैं. ये पन्ने मोटी धारा बताते हैं; आपका अनुभव थोड़ा अलग हो तो वह भी सामान्य ही है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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