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बच्चों के लिए 15 हेल्दी टिफिन आइडियाज और हफ्ते भर का रोटेशन प्लान

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बच्चों के लिए 15 हेल्दी टिफिन आइडियाज और हफ्ते भर का रोटेशन प्लान

डिब्बा भरा वापस आने की असली वजहें, 20 मिनट में बनने वाले 15 विकल्प, सोमवार से शनिवार का तैयार रोटेशन और रात को की जाने वाली दस मिनट की तैयारी।

शाम को डिब्बा खुला, और अंदर सब कुछ वैसा ही

साढ़े तीन बजे बैग से टिफिन निकलता है, ढक्कन खुलता है और दोनों पराठे उसी तरह मुड़े रखे हैं जैसे सुबह छह बजे रखे थे। सब्ज़ी का पानी अलग हो चुका है। पहला वाक्य जो मुंह से निकलता है — "पूरा दिन भूखी रही तू?" — और वहीं से रोज़ की वही बहस शुरू हो जाती है।

डिब्बा भरा लौटने के कारण ज़्यादातर स्वाद नहीं होते। सबसे आम चार वजहें ये हैं: लंच ब्रेक सिर्फ 20 से 25 मिनट का होता है और उसका आधा समय हाथ धोने और लाइन लगाने में जाता है; रोटी ठंडी होकर सख्त हो जाती है; हिस्सा बच्चे की भूख से बड़ा होता है; या खाना ऐसा है जिसे चम्मच के बिना खाना मुश्किल है।

इसलिए योजना दो सवालों से शुरू कीजिए — यह 15 मिनट में हाथ या चम्मच से खाया जा सकता है क्या, और ठंडा होने पर भी खाने लायक रहेगा क्या? पराठा रोल, इडली, चीला और पुलाव दोनों पर खरे उतरते हैं; पतली सब्ज़ी और दाल-चावल अक्सर नहीं। एक हफ्ता इस नज़र से देखिए, आधी समस्या वहीं हल हो जाएगी।

तीन खानों का फ़ॉर्मूला: अनाज, प्रोटीन, रंग

हर डिब्बे में तीन चीज़ें हों तो पोषण की चिंता खत्म — एक अनाज (रोटी, पोहा, इडली, चावल), एक प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडा, दही, राजमा, मूंगफली) और एक फल या सब्ज़ी। इस फ़ॉर्मूले की खूबी यह है कि रोज़ नई रेसिपी ढूंढनी नहीं पड़ती, सिर्फ तीनों में से हर एक बदलती रहती है। कम से कम दो रंग रखने की कोशिश करें, क्योंकि बच्चे पहले आंख से खाते हैं।

मात्रा उम्र से तय होती है, थाली से नहीं। 5–7 साल के बच्चे के लिए एक मध्यम पराठा या 3 इडली और एक फल काफी है; 8–11 साल के लिए डेढ़ पराठा या एक कटोरी पुलाव; 12 साल से ऊपर दो पराठे। बहुत सारे घरों में डिब्बा इसलिए लौटता है क्योंकि उसमें बड़े आदमी जितना खाना भरा होता है। थोड़ा कम भरकर भेजना और भूख लगने पर घर पर खिला देना बेहतर रणनीति है।

एक छोटा नियम जो चलता है: हफ्ते में एक दिन बच्चे की पसंद का। रविवार शाम दो मिनट बैठकर पूछ लें कि इस हफ्ते किस दिन उसका मनपसंद जाएगा। जो बच्चा मेन्यू चुनने में शामिल होता है, वह डिब्बा खाली लाने की ज़िम्मेदारी भी महसूस करता है — और आपको एक दिन का फैसला पहले ही मिल जाता है।

20 मिनट में बनने वाले 15 असली विकल्प

जल्दी बनने वाले मुख्य विकल्प: (1) वेज पराठा रोल — घिसी गाजर, पनीर और हरा धनिया भरकर रोल करके फॉयल में; (2) मूंगफली वाला पोहा; (3) सब्ज़ी वाला पुलाव, ऊपर दही की छोटी डिब्बी; (4) बेसन का चीला टमाटर सॉस के साथ; (5) वेज इडली या इडली के टुकड़े हल्के तड़के के साथ; (6) सूजी का उपमा गाजर-मटर डालकर; (7) मूंग दाल का चीला पनीर भरकर; (8) दही-चावल और भुनी मूंगफली, खासकर गर्मियों में।

हाथ से खाने वाले और सूखे विकल्प, जो ठंडे होकर भी अच्छे रहते हैं: (9) पनीर या आलू भरकर बनाए गए मिनी सैंडविच, तिकोने काटकर; (10) उबले अंडे के साथ मल्टीग्रेन टोस्ट; (11) राजमा या चने की चाट, नींबू और चाट मसाला डालकर; (12) मेथी या पालक का थेपला; (13) सोया या पनीर की टिक्की, दो-तीन छोटी; (14) मूंग के स्प्राउट्स सलाद में; (15) बचे चावल से घर का वेजिटेबल फ्राइड राइस।

रात के बचे खाने का समझदार दोबारा इस्तेमाल सुबह की आधी मेहनत बचाता है। बची रोटी से काठी रोल बन जाता है, बची इडली फ्राई इडली, बचे चावल से पुलाव, बची दाल से चीला। सोने से पहले दस मिनट की तैयारी — सब्ज़ी काटकर डिब्बे में, आटा गूंधकर फ्रिज में, स्प्राउट्स भिगोकर — सुबह की भागदौड़ को आधा कर देती है।

मीठा, पानी और डिब्बे की समझदारी

मीठे की जगह टिफिन में होनी चाहिए, बस उसकी शक्ल बदलनी चाहिए। बिस्किट और चॉकलेट की जगह रागी या बेसन का लड्डू, खजूर-मेवे के छोटे लड्डू, गुड़-मूंगफली की चिक्की का टुकड़ा, या मौसमी फल की कतरन रखें। हफ्ते में एक दिन "ट्रीट डे" तय कर दें — पूरी पाबंदी अक्सर छिपाकर खाने और दूसरों से मांगकर खाने में बदल जाती है।

पैकेट के जूस को लेकर एक नंबर याद रखने लायक है: 200 ml के एक टेट्रा पैक में अक्सर 5 से 6 छोटे चम्मच के बराबर चीनी होती है और असली फल बहुत कम। उसकी जगह सादा पानी, घर की छाछ या नींबू पानी की छोटी बोतल भेजें। बोतल हर दूसरे दिन गर्म पानी और ब्रश से धुलनी चाहिए, वरना अंदर की परत में बदबू बैठ जाती है।

डिब्बा भी उतना ही अहम है जितना खाना। स्टील का इंसुलेटेड टिफिन रोटी को कई घंटे नरम रखता है, जबकि साधारण प्लास्टिक के डिब्बे में भाप जमकर खाना गीला कर देती है। पैक करने से पहले खाना हल्का ठंडा होने दें। कटे फल पर नींबू की दो बूंद डाल दें तो सेब काला नहीं पड़ता। गर्मियों में दही-चावल जैसी चीज़ें चार घंटे से ज़्यादा बाहर रखने पर खराब हो सकती हैं।

सोमवार से शनिवार: एक हफ्ते का तैयार रोटेशन

सोमवार — वेज पराठा रोल (गाजर-पनीर) और एक केला; रात की तैयारी: आटा गूंधकर फ्रिज में। मंगलवार — मूंगफली वाला पोहा और एक उबला अंडा या पनीर के टुकड़े, साथ में अनार के दाने; रात को प्याज़-गाजर काट लें। बुधवार — बेसन का चीला, टमाटर की छोटी डिब्बी और सेब की कतरन; घोल रात को बनाकर फ्रिज में। गुरुवार — सब्ज़ी वाला पुलाव और दही की डिब्बी, ऊपर भुनी मूंगफली।

शुक्रवार — मेथी का थेपला और राजमा-चना चाट, साथ में खीरे की डंडियां; चना रात को भिगोकर सुबह उबालें। शनिवार — बच्चे की पसंद का दिन: मिनी सैंडविच, फ्राई इडली या वेजिटेबल फ्राइड राइस, साथ में हफ्ते का ट्रीट — रागी लड्डू या चिक्की का टुकड़ा। हर दिन एक फल और पानी या छाछ की बोतल तय है, वह इस सूची के ऊपर है।

इस रोटेशन को दीवार पर चिपका दें और तीन-चार हफ्ते चलाएं, फिर सिर्फ एक-दो चीज़ें बदलें। पूरे मेन्यू को हर हफ्ते नया बनाने की कोशिश ही सबसे बड़ी थकान है। जिस दिन कुछ न बन पाए, उस दिन का बैकअप पहले से तय रखें — दो केले, भुने चने और एक टोस्ट भी एक ठीक-ठाक टिफिन है।

दादी-नानी कहती हैं vs डॉक्टर कहते हैं

"पूरा खत्म करके ही उठना है" — ज़बरदस्ती खिलाने की यह आदत सबसे लंबे समय तक नुकसान करती है। जो बच्चा हर बार थाली खाली करने के दबाव में खाता है, वह अपनी भूख और पेट भरने का संकेत पहचानना भूल जाता है, और आगे चलकर या तो ज़रूरत से ज़्यादा खाता है या खाने से चिढ़ने लगता है। बेहतर तरीका है — हिस्सा छोटा रखिए और दोबारा मांगने की जगह छोड़िए।

"गोल-मटोल बच्चा सेहतमंद बच्चा है" और "घी-मलाई जितनी ज़्यादा उतना अच्छा" — दोनों पुरानी समझ हैं। घी अच्छी ऊर्जा देता है, पर रोटी पर आधा चम्मच काफी है; असली कमी अक्सर प्रोटीन और आयरन की होती है, चिकनाई की नहीं। "दूध में दो चम्मच माल्ट पाउडर डाल दो, ताकत आएगी" — ऐसे ज़्यादातर पाउडर में सबसे बड़ी मात्रा चीनी की होती है; सादे दूध के साथ एक खजूर उससे बेहतर सौदा है।

"सब्ज़ी छिपाकर खिला दो" — सब्ज़ी घिसकर पराठे में डालना ठीक है, पर उसे राज़ बनाकर रखना नहीं। बच्चे को बताइए कि इसमें गाजर है और उसे अच्छी लगी — यही अगली बार खुलकर सब्ज़ी खाने की नींव है। दादी-नानी की जो बातें सही हैं उन्हें रखिए: घर का ताज़ा खाना, मौसमी फल, गुड़-मूंगफली, दही, और खाने के समय सबका साथ बैठना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: डिब्बा रोज़ भरा वापस आता है, क्या करूं? — तीन दिन तक सिर्फ पूछिए और नोट कीजिए: समय कम पड़ा, खाना ठंडा था, हिस्सा ज़्यादा था, या दोस्तों के साथ बात में समय निकल गया? फिर एक-एक चीज़ बदलिए — पहले मात्रा घटाइए, फिर इंसुलेटेड डिब्बा आज़माइए, फिर हाथ से खाने वाला विकल्प दीजिए।

सवाल: रोटी ठंडी होकर सख्त हो जाती है, उपाय? — आटा थोड़ा नरम गूंधें, रोटी पर हल्का घी लगाएं, और सेंकते ही सूती कपड़े में लपेटकर डिब्बे में रखें। रोल बनाकर फॉयल में लपेटना सबसे भरोसेमंद तरीका है। सादी रोटी-सब्ज़ी की जगह थेपला और पराठा ठंडे होकर भी नरम रहते हैं।

सवाल: बच्चा स्कूल में दोस्तों से चिप्स लेकर खाता है, तो क्या फायदा? — अदला-बदली बचपन का सामान्य हिस्सा है और उसे पूरी तरह रोकना न मुमकिन है न ज़रूरी। ध्यान इस पर रखिए कि घर से जो जाता है वह मज़बूत हो और घर के दो मुख्य खाने पौष्टिक हों। हफ्ते में एक ट्रीट डे तय करने से बाहर के खाने का आकर्षण भी घटता है।

सवाल: टिफिन कितने बजे पैक करें ताकि खराब न हो? — जितना देर से हो सके उतना अच्छा, और गर्म खाना ढक्कन बंद करने से पहले थोड़ा ठंडा कर लें। गर्मियों में दही, दूध वाली चीज़ें और कटे फल चार घंटे से ज़्यादा बिना ठंडक के न रखें; उन दिनों थेपला, चिक्की, भुने चने और केला ज़्यादा सुरक्षित हैं।

टिफिनहेल्दी खानास्कूल लंचरेसिपीबच्चों का खानालंचबॉक्स

समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम