गर्भावस्था

गर्भ में शिशु का विकास: महीने दर महीने आकार, धड़कन, हलचल और ज़रूरी जांचें

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

Google पर पसंदीदा
गर्भ में शिशु का विकास: महीने दर महीने आकार, धड़कन, हलचल और ज़रूरी जांचें

धड़कन किस हफ्ते सुनाई देती है, पहली किक कब महसूस होती है और कौन सा स्कैन किस हफ्ते होना चाहिए — नौ महीनों की पूरी टाइमलाइन, हफ्तों और ग्राम के हिसाब से।

स्क्रीन पर वो टिमटिमाती बिंदी

सोनोग्राफी रूम की मंद रोशनी में पेट पर ठंडा जेल लगता है, प्रोब घूमता है और स्क्रीन पर एक छोटी सफेद बिंदी तेज़-तेज़ टिमटिमाने लगती है। डॉक्टर स्पीकर चालू करते हैं और कमरा घोड़े की टाप जैसी आवाज़ से भर जाता है — यह छठे-सातवें हफ्ते के भ्रूण का दिल है, जो एक मिनट में 110 से 160 बार धड़कता है, यानी आपके अपने दिल से लगभग दोगुनी रफ्तार से।

पहले महीने में निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है और नर्व ट्यूब बननी शुरू होती है, जो आगे चलकर दिमाग और रीढ़ बनती है। चौथे हफ्ते में शिशु खसखस के दाने जितना और आठवें हफ्ते में करीब 1.6 सेंटीमीटर यानी एक राजमे के दाने जितना होता है। बारहवें हफ्ते तक लंबाई करीब 5.4 सेंटीमीटर और वज़न सिर्फ 14 ग्राम — एक नींबू जितना।

तीसरे महीने के अंत तक सारे प्रमुख अंग — दिल, गुर्दे, लिवर, हाथ-पैर की उंगलियां — बन चुके होते हैं। इसीलिए इन्हीं हफ्तों में फोलिक एसिड, बिना सलाह वाली दवाओं से परहेज़ और एक्स-रे से बचाव सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं। 11वें से 13वें हफ्ते के बीच एनटी स्कैन होता है, जिसमें गर्दन के पीछे की मोटाई नापकर कुछ जन्मजात स्थितियों का जोखिम आंका जाता है।

चौथे से छठे महीने: पहली किक और सुनने की शुरुआत

पहली बार मां बनने वाली ज़्यादातर महिलाओं को शिशु की हलचल 18 से 20 हफ्ते के बीच महसूस होती है; दूसरी बार में यह 16वें हफ्ते के आसपास ही पकड़ में आ जाती है। शुरुआत में यह किक जैसी नहीं लगती — पेट में गैस या तितली के पंख जैसी हल्की सरसराहट लगती है, और अकसर रात को लेटने के बाद ही साफ होती है। 24वें हफ्ते तक यह साफ ठोकर में बदल जाती है, जिसे बाहर से हाथ रखकर भी महसूस किया जा सकता है।

इसी दौर का सबसे अहम स्कैन है एनॉमली स्कैन, जो 18 से 20 हफ्ते के बीच होता है और जिसमें दिल के चारों कक्ष, रीढ़, दिमाग, गुर्दे, हड्डियां, नाल की स्थिति और पानी की मात्रा एक-एक कर देखी जाती है — यह स्कैन छूटना नहीं चाहिए। याद रखें, स्कैन बनावट देखने के लिए है; पीसीपीएनडीटी कानून के तहत गर्भ में लिंग जानना और बताना दोनों अपराध हैं। 20वें हफ्ते तक शिशु का वज़न करीब 300 ग्राम और 24वें तक करीब 600 ग्राम हो जाता है, और इसी बीच वह बाहर की आवाज़ें सुनने लगता है — सबसे साफ आपकी अपनी आवाज़, इसलिए दिन में दस मिनट बात करना या लोरी गुनगुनाना सचमुच असर रखता है। 24-28वें हफ्ते में गर्भकालीन डायबिटीज़ की जांच (GTT) भी करानी होती है।

सातवें से नौवें महीने: वज़न, फेफड़े और सिर नीचे

28वें हफ्ते तक शिशु का वज़न लगभग 1 किलो, 32वें हफ्ते तक करीब 1.7 किलो, 36वें हफ्ते तक 2.6 किलो और पूरे 40 हफ्ते पर आम तौर पर 2.8 से 3.5 किलो होता है — यानी आधे से ज़्यादा वज़न आखिरी दस हफ्तों में बनता है, इसलिए इस दौर में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन में कोई ढील नहीं। 34 से 36 हफ्ते के बीच फेफड़ों में सर्फैक्टैंट पर्याप्त बनता है, जिसके बिना जन्म के बाद सांस लेना मुश्किल होता है — यही वजह है कि समय से पहले जन्म में डॉक्टर फेफड़ों के लिए इंजेक्शन देते हैं। 36वें हफ्ते तक ज़्यादातर शिशु सिर नीचे की स्थिति में आ जाते हैं।

28वें हफ्ते से रोज़ किक गिनना शुरू करें: दिन में एक तय समय पर, अकसर खाने के बाद बाईं करवट लेटकर, घड़ी देखकर गिनें — दो घंटे में कम से कम 10 हलचल होनी चाहिए। इससे कम हों या हलचल कल के मुकाबले साफ कम लगे तो उसी दिन अस्पताल जाएं। तेज़ सिरदर्द के साथ धुंधला दिखना, हाथ-मुंह की अचानक सूजन, खून आना, पानी जैसा रिसाव, तेज़ बुखार या लगातार पेट दर्द — इनमें भी इंतज़ार न करें; साधन न हो तो 108 एम्बुलेंस मुफ्त बुलाई जा सकती है।

नौ महीनों की जांच-चेकलिस्ट: कब क्या

12वें हफ्ते से पहले: एएनसी रजिस्ट्रेशन और एमसीपी कार्ड, खून का ग्रुप और आरएच फैक्टर, हीमोग्लोबिन, थायरॉइड, शुगर, एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी की जांच, टिटनेस का पहला टीका और रोज़ फोलिक एसिड। 11-13 हफ्ते: एनटी स्कैन। 14वें हफ्ते से: आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां, सरकारी केंद्र पर मुफ्त। 18-20 हफ्ते: एनॉमली स्कैन। 24-28 हफ्ते: शुगर की जांच और दोबारा हीमोग्लोबिन। 30-34 हफ्ते: ग्रोथ स्कैन। 36 हफ्ते के बाद: हर हफ्ते जांच।

कम से कम चार एएनसी विज़िट अनिवार्य मानी जाती हैं, पर आज सलाह आठ संपर्कों की है। हर महीने की 9 तारीख को PMSMA के तहत सरकारी केंद्रों पर विशेषज्ञ की मुफ्त जांच मिलती है, और आंगनवाड़ी से वज़न की निगरानी, टेक-होम राशन और गोलियां मिलती हैं। हर विज़िट पर तीन चीज़ें ज़रूर दर्ज कराएं: वज़न, बीपी और पेट की ऊंचाई। सारी रिपोर्ट, स्कैन की फिल्म और एमसीपी कार्ड एक ही फोल्डर में रखें और डिलीवरी बैग में सबसे ऊपर — आपात स्थिति में आपकी पूरी कहानी डॉक्टर तक दो मिनट में पहुंच जानी चाहिए।

दादी-नानी कहती हैं vs डॉक्टर कहते हैं

दादी: ग्रहण में घर से मत निकलना, कुछ मत काटना, वरना बच्चे पर निशान पड़ जाएगा। डॉक्टर: ग्रहण से भ्रूण पर असर का कोई प्रमाण नहीं; जन्म के निशान त्वचा की सामान्य बनावट होते हैं। इस रिवाज़ का अच्छा हिस्सा यह है कि गर्भवती को कुछ घंटे आराम मिल जाता है — उसे रख लीजिए, डर छोड़ दीजिए। पर ग्रहण के बाद भूखा रहना नुकसानदेह है; लंबे समय खाली पेट रहने से कमज़ोरी और चक्कर आते हैं।

दादी: पेट नीचे की तरफ है तो बेटा, ऊपर है तो बेटी। डॉक्टर: पेट का आकार गर्भाशय की स्थिति, पेट की मांसपेशियों और पहले कितनी बार गर्भ रह चुका है — इन पर निर्भर करता है; और लिंग जानने की कोशिश ही कानूनन अपराध है। पर बड़ों की बहुत सी बातें सही निकलती हैं — शिशु से बात करना और लोरी सुनाना (वह सचमुच सुनता है), भारी सामान न उठाना, बाईं करवट सोना और दोपहर में आराम करना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: पहली बार शिशु की धड़कन कब सुनाई देती है? — सोनोग्राफी पर 6-7 हफ्ते के आसपास, और पेट पर रखे जाने वाले डॉपलर से आम तौर पर 10-12 हफ्ते के बाद।

सवाल: पूरी गर्भावस्था में कितने स्कैन सुरक्षित हैं? — डॉक्टर के बताए स्कैन (आम तौर पर तीन से चार) सुरक्षित माने जाते हैं; अल्ट्रासाउंड में विकिरण नहीं होता। बिना कारण बार-बार स्कैन कराने का कोई फायदा नहीं।

सवाल: पूरे दिन शिशु की हलचल कम लगी, क्या करूं? — कुछ मीठा या ठंडा पिएं, बाईं करवट लेटकर दो घंटे गिनें। 10 हलचल पूरी न हों तो उसी दिन अस्पताल जाएं — सुबह का इंतज़ार न करें।

सवाल: 37वें हफ्ते में डिलीवरी हो जाए तो क्या बच्चा कमज़ोर होगा? — 37 पूरे हफ्ते के बाद जन्म फुल-टर्म माना जाता है और फेफड़े आम तौर पर तैयार होते हैं। इससे पहले जन्म पर शिशु को कुछ दिन विशेष देखभाल की ज़रूरत पड़ सकती है।

गर्भावस्थाशिशु विकाससोनोग्राफीकिक काउंटएएनसी जांच

समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम