दादा-दादी की कहानी

दादा-दादी की कहानी — शाम के समय बच्चों को घेरकर सुनाई जाती कहानी. राजा-रानी, परियाँ, चतुर कौआ — सब यहीं से मिलते हैं.

दादा-दादी की कहानी — रंग भरने का चित्र
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मुफ़्त. A4 काग़ज़ पर छपने के आकार का. छपाई के डिब्बे में ‘ब्लैक ऐंड व्हाइट’ चुन लें तो रंगीन स्याही बचती है. स्कूल और आँगनवाड़ी के लिए जितनी चाहिए प्रतियाँ निकालें.

रंग भरते-भरते क्या बात करें

बच्चा चित्र में रमा होता है, वही दस मिनट शब्द आसानी से भीतर जाते हैं — पाठ नहीं लगते इसलिए. ये पूछकर देखिए:

  • दादा-दादी से सुनी सबसे अच्छी कहानी कौन सी है?
  • कहानी सुनते-सुनते नींद क्यों आ जाती है?
  • आज उल्टा करें — तुम उन्हें कहानी सुनाओ?

यह चित्र जो शब्द सिखाता है

रंग भरते समय हर चीज़ का नाम हिंदी में बोलिए; जवाब अंग्रेज़ी में आए तो टोकने मत बैठिए — आप उसे हिंदी में दोहरा दें, इतना काफ़ी है.

कहानीदादादादीशामपरी

किस उम्र के लिए

दो साल का बच्चा पूरे काग़ज़ पर आड़ी-तिरछी लकीरें खींचेगा — वही ठीक है, उस उम्र का काम ही वह है. तीन साल में आकार पहचान में आते हैं, पर रंग लकीर के बाहर जाता है. चार-पाँच साल में लकीर के भीतर रहना आने लगता है. उम्र कोई भी हो, ‘लकीर के अंदर भरो’ कहकर टोकिए मत — फिर वह खेल नहीं, काम बन जाता है.

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