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गर्भावस्था का सत्ताईसवाँ सप्ताह: दूसरी तिमाही की विदाई — आँखें खुल गईं

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

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गर्भावस्था का सत्ताईसवाँ सप्ताह: दूसरी तिमाही की विदाई — आँखें खुल गईं

पलकें खुल गईं — बच्चा अब झपकाता है, और नींद में उसकी आँखें वैसे ही घूमती हैं जैसे सपने देखने वालों की. दूसरी तिमाही का यह आख़िरी हफ़्ता तैयारी की आख़िरी घंटी है.

क्या बच्चे सपने देखते हैं?

इस हफ़्ते से बच्चे की नींद में वह दौर दिखने लगता है जिसमें बंद या अधखुली पलकों के पीछे आँखें तेज़ी से घूमती हैं — REM नींद, वही जिसमें हम सपने देखते हैं.

गर्भ का बच्चा क्या 'देखता' होगा — यह विज्ञान भी नहीं जानता. शायद आवाज़ों की लय, हलचल का एहसास, रोशनी के धब्बे. पर इतना पक्का है: दिमाग़ रात-दिन ख़ुद को बुन रहा है, और यह नींद उसी बुनाई का हिस्सा है.

इधर आपकी दूसरी तिमाही इस हफ़्ते पूरी हो रही है. 'हनीमून पीरियड' विदा ले रहा है — उसका आख़िरी हफ़्ता उन कामों के नाम कीजिए जो टलते आ रहे हैं. अगले हफ़्ते से कहानी का तीसरा और आख़िरी अध्याय है.

इस सप्ताह आपका बच्चा

बच्चा अब फूलगोभी से बड़ा — छत्तीस-सैंतीस सेंटीमीटर, वज़न नौ सौ ग्राम पार. किलो की दहलीज़ अगले हफ़्तों में पार होगी.

आँखें खुलती-झपकती हैं, पलकों के बाल पूरे हैं, और रोशनी की तरफ़ मुड़ना अब देखा-भाला जवाब है. सुनने की बारीक़ी इतनी है कि जानी-पहचानी लोरी पर हलचल का ढंग बदलता है.

फेफड़े अब इतने तैयार हैं कि इस हफ़्ते जन्मे बच्चे NICU की मदद से ज़्यादातर पार लग जाते हैं — यह आँकड़ा किसी को चाहिए नहीं, पर उसका होना ही तसल्ली है.

आपके शरीर में बदलाव

साँस अब छोटी-छोटी चढ़ने लगी है — गर्भाशय डायाफ़्राम को ऊपर धकेल रहा है. सीढ़ियों पर रुकना, बोलते-बोलते साँस लेना — यह कमज़ोरी नहीं, ज्यामिति है. बच्चा नीचे उतरेगा (आख़िरी हफ़्तों में), तो साँस अपने आप खुलेगी.

नींद टूटने के कारण अब गिनती से बाहर हैं — मूत्राशय, करवट, पैर, सपने. दोपहर की बीस मिनट की झपकी अब विलासिता नहीं, इंतज़ाम है — जहाँ मिल सके, लीजिए.

मन भी इस दहलीज़ पर अपना हिसाब करता है — तीसरी तिमाही का नाम सुनते ही 'अब सच में क़रीब है' वाली धड़कन. यह घबराहट सामान्य है. उसे योजना में बदलिए — बैग, नंबर, रास्ते — तैयारी घबराहट की सबसे अच्छी दवा है.

इस सप्ताह क्या करना है

अगले हफ़्ते से मुलाक़ातों की रफ़्तार बदलेगी — तीसरी तिमाही में हर दो हफ़्ते (और आख़िरी महीने में हर हफ़्ते) की जाँच सामान्य है. कैलेंडर उसी हिसाब से जमाइए.

Rh नेगेटिव हैं तो एंटी-D इंजेक्शन की तारीख़ अगले हफ़्ते के आसपास है — पक्की कीजिए. साथ में अगली ख़ून-जाँच (हीमोग्लोबिन) भी अक्सर इसी पड़ाव पर दोहराई जाती है.

किक-गिनती का तरीक़ा आज सीख लीजिए, शुरू अगले हफ़्ते से: रोज़ एक तय समय (बच्चे का बातूनी घंटा), करवट लेकर, दस हलचलों तक गिनना — दो घंटे की सीमा. किक काउंटर इसी काम के लिए बना है.

अस्पताल-बैग की सूची पर सामान चढ़ना शुरू हो जाए — पूरा भरने की घड़ी छत्तीसवें सप्ताह से पहले है, पर 'कल करेंगे' की आदत का इलाज आज से. साथ ही घर से अस्पताल के रास्ते का रात वाला विकल्प (गाड़ी न मिले तो कौन, 108 का नंबर सबके फ़ोन में) तय हो.

सत्ताईसवाँ सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातसत्ताईसवें सप्ताह में
मुख्य घटनादूसरी तिमाही पूरी; आँखें खुलीं, REM नींद
बच्चे का आकार36-37 सेंटीमीटर, 900+ ग्राम
आपके मुमकिन लक्षणछोटी साँस, टूटती नींद, दहलीज़ की घबराहट
अगले हफ़्ते सेतीसरी तिमाही; हर दो हफ़्ते की जाँच; रोज़ किक-गिनती
Rh नेगेटिवएंटी-D इंजेक्शन की तारीख़ पक्की करें
घर का इंतज़ामरात के रास्ते का विकल्प; 108 सबके फ़ोन में
शुरू कीजिएअस्पताल-बैग पर सामान चढ़ाना

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

पुरानी सूची पूरी लागू — और अब हलचल की निगरानी उसमें सबसे ऊपर आ रही है: 'आज कुछ शांत है' का एहसास उसी दिन जाँच के लायक़ है. अगले हफ़्ते से यह एहसास गिनती का रूप ले लेगा.

साँस का फूलना सीढ़ियों पर सामान्य है — पर आराम की हालत में अचानक साँस चढ़े, सीने में दर्द हो, या धड़कन बेक़ाबू भागे, तो यह ज्यामिति नहीं है: उसी समय अस्पताल. गर्भ में ख़ून के थक्के का ख़तरा बढ़ा रहता है और यही उसकी भाषा है.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

अपनी डिलीवरी की तारीख़ निकालें

आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.

यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: तिमाही बदलने पर मुझे कुछ 'महसूस' होगा? — नहीं — तिमाही कैलेंडर की लकीर है, शरीर की नहीं. बदलाव धीरे-धीरे आते हैं: पेट का बोझ, साँस, नींद. लकीर का असली मतलब है — जाँचों की रफ़्तार और निगरानी का ढंग अब बदलता है.

सवाल: बच्चे की हलचल अब दर्द जैसी भी लगती है — पसली में लात! यह ठीक है? — ठीक भी है और तीसरी तिमाही की पहचान भी. बच्चा बड़ा हो गया है और जगह कम. करवट बदलिए, बैठने का कोण बदलिए — पसली से पैर हट जाता है. ताक़तवर लात शिकायत नहीं, ख़ुशख़बरी है.

सवाल: अकेले सफ़र (मायके जाना) की आख़िरी सीमा क्या है? — ज़्यादातर डॉक्टर छत्तीस सप्ताह तक की ट्रेन-यात्रा को सामान्य गर्भ में ठीक मानते हैं, पर लंबा सफ़र जितना पहले हो उतना आराम का. एयरलाइनें अक्सर 32-36 सप्ताह के बाद पर्ची माँगती या मना करती हैं. जोखिम वाली गर्भावस्था में यह हिसाब डॉक्टर के हाथ में दीजिए.

सवाल: 'सातवाँ महीना लगते ही मायके आ जाओ' — घर की परंपरा है. जाऊँ? — परंपरा का अपना तर्क है — देखभाल, आराम, अपनापन. डॉक्टरी शर्तें बस तीन: वहाँ की डिलीवरी-सुविधा पहले से तय हो, रिपोर्टों की फ़ाइल और MCP कार्ड साथ जाए, और वहाँ पहुँचते ही एक बार स्थानीय डॉक्टर से रिश्ता बन जाए. ये तीन पक्के हों तो परंपरा और चिकित्सा में कोई झगड़ा नहीं.

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम