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शिशु का पहला सप्ताह: वज़न घटेगा, रंग बदलेगा — और यह सब सामान्य है

शिशु विकास · theAsianparent · अपडेट किया गया

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शिशु का पहला सप्ताह: वज़न घटेगा, रंग बदलेगा — और यह सब सामान्य है

पहले सप्ताह का सबसे ज़रूरी वाक्य: नवजात का वज़न घटता है, और यह बीमारी नहीं है. क्या-क्या सामान्य है, किस पर उसी दिन अस्पताल — यह पन्ना दोनों सूचियाँ साफ़-साफ़ देता है.

घर आया मेहमान, और घर भर की धड़कनें

अस्पताल से घर की पहली रात — पूरा घर एक साँस रोककर सोता है. हर आवाज़ पर माँ जागती है, दादी को हज़ार हिदायतें याद आती हैं, और नए पिता गोद में उठाने से डरते हैं.

इस हफ़्ते की आधी घबराहट एक बात जान लेने से उतर जाती है: नवजात के शरीर का पहला हफ़्ता बदलावों का हफ़्ता है — वज़न घटता है, त्वचा का रंग बदलता है, पॉटी का रंग रोज़ नया होता है. इनमें से ज़्यादातर सामान्य है.

और जो सामान्य नहीं है, उसकी सूची छोटी और पक्की है — वह इस पन्ने के आख़िर में है. उस सूची के आगे कोई घरेलू इलाज नहीं चलता; सीधे अस्पताल चलता है.

इस सप्ताह आपका शिशु

वज़न: जन्म के बाद पहले दिनों में शिशु का वज़न 7-10% तक घटता है — शरीर का अतिरिक्त पानी निकलता है. यह घबराने की बात नहीं; दसवें-चौदहवें दिन तक जन्म का वज़न वापस आ जाना चाहिए. MCP कार्ड पर हर नाप दर्ज होता रहे.

पीलिया: तीसरे से पाँचवें दिन हल्का पीलापन (चेहरे-आँखों में) आम है और अक्सर अपने आप उतरता है. नज़र रखने की चीज़ है — बढ़ता पीलापन, हाथ-पैर तक पहुँचता रंग, या सुस्त होकर दूध छोड़ता बच्चा उसी दिन डॉक्टर के पास जाता है.

पॉटी की कहानी अपने आप चलती है: पहले दिन काली-चिपचिपी (मिकोनियम), फिर हरी-भूरी, हफ़्ते के आख़िर तक पीली-दानेदार. गीले डायपर रोज़ बढ़ते जाएँ — पाँचवें दिन से दिन में छह या ज़्यादा — यही 'दूध काफ़ी है' की सबसे पक्की रसीद है.

नींद दिन में 16-18 घंटे, पर दो-तीन घंटे के टुकड़ों में. दिन-रात की पहचान अभी नहीं है — वह हफ़्तों में आएगी. रिफ़्लेक्स हाज़िर हैं: हथेली पर उँगली रखो तो पकड़, गाल छुओ तो उधर मुँह (यह भूख का इशारा भी है).

माँ का हाल भी हाल है

माँ का शरीर भी अपना पहला हफ़्ता चला रहा है — रक्तस्राव (लोकिया) माहवारी से ज़्यादा होता है और हफ़्तों में हल्का पड़ता है. टाँके हों (सिज़ेरियन या नीचे के), तो दर्द की दवा डॉक्टर की बताई हुई ही — दूध पर असर के डर से दर्द सहना ग़लत है.

दूध की शुरुआत: पहले दिन गाढ़ा पीला कोलोस्ट्रम बूँदों में आता है — यही नवजात का पहला टीका है, और मात्रा में कम दिखना उसकी बनावट है, कमी नहीं. तीसरे-चौथे दिन दूध 'उतरता' है; स्तन भारी-सख़्त हों तो बार-बार पिलाना ही इलाज है.

मन का हाल: तीसरे-चौथे दिन बिना बात रोना आ जाए — यह 'बेबी ब्लूज़' है, हॉर्मोन का उतार, और दो हफ़्तों में गुज़र जाता है. घरवाले इसे पढ़ लें: माँ को नींद, खाना और काँधा चाहिए, सलाह नहीं.

इस सप्ताह क्या करना है

गर्भनाल का ठूँठ: सूखा रखिए, बस. कुछ लगाना नहीं — न हल्दी, न राख, न तेल, न सिक्का. डायपर उसके नीचे मोड़िए. वह एक-दो हफ़्ते में अपने आप गिरता है; लाली-मवाद-बदबू दिखे तो उसी दिन डॉक्टर.

घुट्टी-शहद-चीनी का पानी — कुछ नहीं. छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध, पानी भी नहीं. यह सलाह देने वाले घर में इसी हफ़्ते आएँगे; जवाब पहले से तैयार रखिए — 'डॉक्टर ने मना किया है' सबसे छोटा और सबसे कारगर वाक्य है.

ASHA दीदी की घरेलू मुलाक़ातें (HBNC) इसी हफ़्ते शुरू होती हैं — दिन 3 और 7 पर. वे वज़न, पीलिया, गर्भनाल और दूध की पकड़ देखती हैं. यह सरकारी व्यवस्था मुफ़्त है और नवजात की सबसे क़ीमती निगरानी — दरवाज़ा खुला रखिए.

जन्म के टीके अस्पताल में लग गए थे ना — BCG, OPV-0, हेपेटाइटिस बी? MCP कार्ड में दर्ज देखिए; छूट गए हों तो पहली मुलाक़ात में लगवाइए. जन्म-प्रमाणपत्र की अर्ज़ी भी इसी हफ़्ते हो जाए तो दौड़ बचती है.

पहला सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातपहले सप्ताह में
वज़न7-10% घटना सामान्य; 10-14 दिन में वापसी
पीलियादिन 3-5 पर हल्का आम; बढ़े/फैले तो उसी दिन डॉक्टर
गीले डायपररोज़ बढ़ते हुए — पाँचवें दिन से 6+ प्रतिदिन
दूधसिर्फ़ माँ का — घुट्टी, शहद, पानी कुछ नहीं
गर्भनालसूखी रखें, कुछ लगाएँ नहीं
नींद16-18 घंटे, टुकड़ों में; करवट नहीं — पीठ के बल
सरकारी निगरानीASHA की HBNC मुलाक़ात — दिन 3 और 7

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

इनमें से कुछ भी हो तो उसी समय अस्पताल (आपात में 108): बुख़ार या बहुत ठंडा शरीर — तीन महीने से छोटे शिशु का बुख़ार हमेशा आपात है; दूध पीना छोड़ देना या चूसने की ताक़त न होना; साँस तेज़ (मिनट में 60 से ऊपर) या पसलियाँ धँसना; सुस्ती — जगाने पर भी न जागना; झटके; हाथ-पैर तक फैलता पीलिया; पॉटी में ख़ून.

गीले डायपर घट जाएँ, मुँह सूखा लगे, तालू की नरम जगह धँसी दिखे — पानी की कमी के लक्षण हैं; उसी दिन दिखाइए. और घर का नियम पहले हफ़्ते से: शिशु को छूने से पहले हाथ धोना, सर्दी-खाँसी वाले मेहमान दूर, और धूम्रपान घर में कहीं नहीं.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

दूध और डायपर का रिकॉर्ड रखें

आख़िरी बार दूध कब पिलाया, अगली बार कौन सी तरफ़ से, आज कितने गीले डायपर — इन हफ़्तों के तीनों बड़े सवालों का रिकॉर्ड यह साधन रखता है. सब आपके फ़ोन में ही रहता है.

सारे रिकॉर्ड आपके ही फ़ोन में रहते हैं — हमें नहीं भेजे जाते. स्तन पर कितने मिनट रहा, इससे यह तय नहीं होता कि बच्चे को काफ़ी दूध मिला या नहीं; कुछ बच्चे झटपट पीते हैं. गीले डायपरों की गिनती और डॉक्टर के यहाँ होने वाला वज़न — यही असली पैमाने हैं.

इनके लिए उसी दिन डॉक्टर से मिलें:
  • पाँचवें दिन के बाद दिन में छह से कम गीले डायपर हों, या पेशाब गहरा पीला हो
  • बच्चा इतना उनींदा हो कि दूध न पी सके, या जगाकर पिलाना पड़े
  • जन्म का वज़न दो हफ़्तों में वापस न आया हो, या वज़न घटता ही जाए
  • पीलिया बढ़ रहा हो, या हाथ-पैरों तक पीलापन दिखे
  • मुँह सूखा हो और सिर के ऊपर की मुलायम जगह अंदर धँसी हो
  • छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध काफ़ी है — पानी समेत और कुछ नहीं चाहिए. दूध कम पड़ रहा लगे तो फ़ॉर्मूला शुरू करने से पहले डॉक्टर या स्तनपान सलाहकार से बात करें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: बच्चा दिन भर सोता है — जगाकर दूध पिलाएँ? — पहले हफ़्तों में हाँ: दिन में हर 2-3 घंटे और रात में 3-4 घंटे से लंबा अंतराल न होने दें, जब तक जन्म का वज़न वापस न आ जाए. उसके बाद भूख की माँग पर चला जा सकता है — डॉक्टर की सलाह से.

सवाल: नहलाना कब से? — गर्भनाल गिरने तक (1-2 हफ़्ते) गीले कपड़े से पोंछना काफ़ी है. उसके बाद हफ़्ते में दो-तीन बार गुनगुने पानी से — रोज़ ज़रूरी नहीं; नवजात गंदे नहीं होते, उनकी त्वचा सूखती ज़रूर है.

सवाल: मालिश कब से शुरू करें? — गर्भनाल गिरकर नाभि सूख जाए, उसके बाद — नारियल जैसा सादा तेल, हल्का हाथ. नाक-कान में तेल नहीं, आँख में काजल नहीं — मालिश अच्छी परंपरा है, ये जोड़ उसमें जोखिम हैं.

सवाल: बच्चे को कितने कपड़े पहनाएँ? — जितने आप पहनें उससे एक परत ज़्यादा — बस. गर्मी में कसकर लपेटना नुक़सान करता है; बच्चा गर्म है या नहीं, गर्दन-पीठ छूकर देखिए, हाथ-पैर छूकर नहीं (वे वैसे भी ठंडे रहते हैं).

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम