शिशु विकास

शिशु का दूसरा सप्ताह: वज़न की वापसी और रात-दिन की उलटी घड़ी

शिशु विकास · theAsianparent · अपडेट किया गया

Google पर पसंदीदा
शिशु का दूसरा सप्ताह: वज़न की वापसी और रात-दिन की उलटी घड़ी

यह हफ़्ता एक रसीद देता है — जन्म का वज़न वापस, यानी दूध की व्यवस्था चल पड़ी. और एक इम्तिहान भी: रात को जागने वाला बच्चा, जो दिन में सोता है.

रात के तीन बजे की महफ़िल

दूसरे हफ़्ते की पहचान रात के तीन बजे हैं — घर सोया है, और बच्चा पूरी तरह जागा हुआ, पूरे मूड में. गर्भ की घड़ी यही थी: दिन भर माँ की चाल झुलाती थी, रात में महफ़िल जमती थी.

यह घड़ी धीरे-धीरे सीधी होती है — छठे-आठवें हफ़्ते तक ज़्यादातर बच्चे रात की लंबी नींद पकड़ने लगते हैं. तब तक की तरकीब लड़ना नहीं, साथ देना है: दिन में उजाला-आवाज़, रात में अँधेरा-धीमी आवाज़ — घड़ी सीखने की यही पहली पढ़ाई है.

और इस हफ़्ते की सबसे अच्छी ख़बर तराज़ू पर मिलती है: जन्म का वज़न वापस. वह रसीद कहती है — दूध की व्यवस्था चल पड़ी है; अब बस चलती रहे.

इस सप्ताह आपका शिशु

वज़न: दसवें से चौदहवें दिन के बीच ज़्यादातर बच्चे जन्म का वज़न वापस पा लेते हैं — और फिर हफ़्ते में क़रीब 150-200 ग्राम की चाल पकड़ते हैं. ASHA की दिन-14 की मुलाक़ात या क्लिनिक के तराज़ू पर यह दर्ज हो जाए.

गर्भनाल का ठूँठ इसी दौर में गिरता है. गिरने के बाद नाभि में एक-दो दिन हल्की नमी या ख़ून की लकीर आम है; लाली फैले, मवाद-बदबू हो, तो उसी दिन डॉक्टर. गिरे हुए हिस्से पर कुछ लगाने की परंपरा जो भी हो — वहाँ सिर्फ़ सूखा-साफ़ चलता है.

आँखें अब 20-30 सेंटीमीटर पर सबसे साफ़ देखती हैं — ठीक उतनी दूरी, जितनी दूध पीते समय माँ के चेहरे की. यह संयोग नहीं है. तेज़ रोशनी पर आँखें मिचमिचाना, आवाज़ पर चौंकना — सब सही निशानियाँ हैं.

शाम की क्लस्टर फ़ीडिंग शुरू हो सकती है — घंटे-घंटे भर पर दूध, बेचैनी, फिर अचानक गहरी नींद. यह दूध की कमी नहीं है; बच्चा अगले दिनों की सप्लाई का ऑर्डर दे रहा है. डायपर-वज़न ठीक हैं तो सब ठीक है.

माँ का हाल भी हाल है

रक्तस्राव अब हल्का और भूरा-गुलाबी पड़ रहा होगा. अचानक फिर तेज़ लाल हो जाए — ख़ासकर बड़े थक्कों के साथ — तो आराम बढ़ाइए और डॉक्टर को बताइए; ज़्यादा काम की पहली चेतावनी यही होती है.

बेबी ब्लूज़ की मियाद दो हफ़्ते है. रोना-उदासी उसके बाद भी बनी रहे, या घनी होती जाए — खाना-नींद-बच्चे में मन न लगे — तो वह ब्लूज़ नहीं है; वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन की तरफ़ का रास्ता है, और वह इलाज से पूरी तरह सँभलता है. यह बात माँ से ज़्यादा घरवालों के पढ़ने की है.

चालीस दिन घर में रहने की परंपरा (सवा महीना) आराम के लिहाज़ से समझदार है — बस उसका मतलब क़ैद नहीं. धूप में बैठना, आँगन में टहलना, हल्की कसरत — सब चालू रहे. और मेहमानों की भीड़ पर परंपरा का ही हवाला दीजिए — वह इस मामले में आपकी तरफ़ है.

इस सप्ताह क्या करना है

दिन-रात की पढ़ाई शुरू: दिन के दूध उजाले-आवाज़ में, रात के दूध अँधेरे में, बिना खेल-बातचीत के. रात के डायपर सिर्फ़ ज़रूरत पर बदलिए — हर बार नहीं.

सोने की जगह का नियम पक्का: आपके कमरे में, अपनी अलग सपाट सतह, पीठ के बल, बिना तकिये-भारी रज़ाई के. करवट या पेट के बल सुलाना — किसी की भी सलाह हो — नहीं.

दूध-डायपर का रिकॉर्ड इस हफ़्ते सबसे क़ीमती है — ऊपर का ट्रैकर या काग़ज़, जो भी चले. 'कितनी बार पिलाया?' डॉक्टर का पहला सवाल है, और नींद टूटी याददाश्त उसका बुरा जवाब देती है.

छह-सप्ताह वाली दो मुलाक़ातों की तारीख़ें अभी से बुक कर लीजिए — बच्चे के टीके (सप्ताह 6) और माँ की पोस्टपार्टम जाँच. बाद में याद रखने वाले काम अभी काग़ज़ पर चढ़ जाएँ.

दूसरा सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातदूसरे सप्ताह में
वज़नजन्म का वज़न वापस (दिन 10-14); फिर ~150-200 ग्राम/सप्ताह
गर्भनालठूँठ गिरता है; नाभि सूखी-साफ़ रहे
नज़र20-30 सेमी — दूध पीते समय माँ का चेहरा
शामेंक्लस्टर फ़ीडिंग सामान्य — कमी नहीं, ऑर्डर है
नींद की पढ़ाईदिन उजाला-आवाज़, रात अँधेरा-ख़ामोशी
माँब्लूज़ की मियाद 2 हफ़्ते — उससे आगे बढ़े तो बात कीजिए
बुक कीजिएसप्ताह-6: बच्चे के टीके + माँ की जाँच

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

पहले हफ़्ते वाली सूची जस की तस — बुख़ार/ठंडा शरीर (तीन महीने से छोटे का बुख़ार = उसी समय अस्पताल), दूध छोड़ना, तेज़ साँस, सुस्ती, झटके, फैलता पीलिया: सीधे अस्पताल, 108 हाज़िर है.

नाभि के आसपास फैलती लाली या मवाद, और माँ में — तेज़ बुख़ार, बदबूदार स्राव, टाँकों में बढ़ता दर्द, एक पिंडली की सूजन, या साँस की अचानक तकलीफ़ — यह माँ वाली आपात सूची है; प्रसव के बाद के हफ़्तों में यह भी उतनी ही सख़्त है.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

दूध और डायपर का रिकॉर्ड रखें

आख़िरी बार दूध कब पिलाया, अगली बार कौन सी तरफ़ से, आज कितने गीले डायपर — इन हफ़्तों के तीनों बड़े सवालों का रिकॉर्ड यह साधन रखता है. सब आपके फ़ोन में ही रहता है.

सारे रिकॉर्ड आपके ही फ़ोन में रहते हैं — हमें नहीं भेजे जाते. स्तन पर कितने मिनट रहा, इससे यह तय नहीं होता कि बच्चे को काफ़ी दूध मिला या नहीं; कुछ बच्चे झटपट पीते हैं. गीले डायपरों की गिनती और डॉक्टर के यहाँ होने वाला वज़न — यही असली पैमाने हैं.

इनके लिए उसी दिन डॉक्टर से मिलें:
  • पाँचवें दिन के बाद दिन में छह से कम गीले डायपर हों, या पेशाब गहरा पीला हो
  • बच्चा इतना उनींदा हो कि दूध न पी सके, या जगाकर पिलाना पड़े
  • जन्म का वज़न दो हफ़्तों में वापस न आया हो, या वज़न घटता ही जाए
  • पीलिया बढ़ रहा हो, या हाथ-पैरों तक पीलापन दिखे
  • मुँह सूखा हो और सिर के ऊपर की मुलायम जगह अंदर धँसी हो
  • छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध काफ़ी है — पानी समेत और कुछ नहीं चाहिए. दूध कम पड़ रहा लगे तो फ़ॉर्मूला शुरू करने से पहले डॉक्टर या स्तनपान सलाहकार से बात करें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: बच्चा पीते-पीते सो जाता है, फिर आधे घंटे में भूखा — क्या करूँ? — कान-पैर सहलाकर, डकार दिलाकर, कपड़ा हल्का करके जगाए रखने की कोशिश कीजिए ताकि एक बार में पेट भरे. फिर भी यह चलता रहे और वज़न-डायपर ठीक हों, तो यह भी उसका तरीक़ा है — चिंता नहीं.

सवाल: डकार हर बार ज़रूरी है? न आए तो? — पिलाने के बाद पाँच-दस मिनट काँधे से लगाइए; डकार न भी आए तो आफ़त नहीं. दूध के छोटे-छोटे उलटाव (पॉसेटिंग) सामान्य हैं — उछालकर की गई उल्टी या हरे रंग की उल्टी अलग बात है, वह डॉक्टर को.

सवाल: हिचकियाँ बहुत आती हैं — रोकूँ कैसे? — रोकनी नहीं पड़तीं; नवजात की हिचकी उसे परेशान नहीं करती और अपने आप जाती है. पानी-घुट्टी बिल्कुल नहीं — छह महीने तक सिर्फ़ दूध का नियम हिचकी पर भी लागू है.

सवाल: घर के बड़े रोज़ वज़न तौलना चाहते हैं — ठीक है? — रोज़ का तौल चिंता बढ़ाता है, जानकारी नहीं — वज़न झूले की तरह ऊपर-नीचे दिखेगा. हफ़्ते में एक बार, एक ही तराज़ू, एक जैसे कपड़ों में — और MCP कार्ड की चाल पर भरोसा.

शिशु का विकासबेबी डेवलपमेंट वीक बाय वीकनवजात की देखभालपहले तीन महीनेनवजात

समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम