
इस हफ़्ते बच्चा एक अद्भुत चीज़ खोजता है — अपने ही हाथ. घंटों उन्हें घूरना, मुट्ठी मुँह तक ले जाना — यह खिलवाड़ नहीं, शरीर का नक़्शा बनना है.
सातवें हफ़्ते का सबसे प्यारा दृश्य: बच्चा अपनी ही मुट्ठी को आँखों के सामने लाकर एकटक घूर रहा है — जैसे पूछ रहा हो, यह चीज़ किसकी है और हमेशा से यहीं थी क्या?
यह घूरना बड़ी पढ़ाई है. दिमाग़ शरीर का नक़्शा खींच रहा है — यह हाथ मेरा है, मैं इसे हिला सकता हूँ, यह मुँह तक जाता है. आँख-हाथ का जो तालमेल आगे खिलौने पकड़ेगा, किताबें थामेगा, उसका पहला पन्ना यही है.
मुट्ठी चूसना भी इसी खोज का हिस्सा है — और अपने आप को दिलासा देने (सेल्फ़-सूदिंग) की पहली तरकीब. यह भूख का इशारा भी हो सकता है और सिर्फ़ सुकून भी; फ़र्क़ बाक़ी इशारों से पहचानिए, घड़ी से नहीं.
आवाज़ों की 'बातचीत' अब पूरी महफ़िल है — आप बोलें, बच्चा 'अ-गू' से जवाब दे, आप दोहराएँ, वह फिर बोले. यह बारी-बारी का खेल जितना चले उतना अच्छा — शोध बार-बार यही कहते हैं कि इसी अदला-बदली से भाषा बनती है, सुनाए गए एकतरफ़ा शब्दों से नहीं.
नज़र अब पूरा अर्धवृत्त (180°) नाप लेती है, और चेहरों की पसंद साफ़ है — दुनिया की हर चीज़ से ज़्यादा दिलचस्प अब भी आपका चेहरा है. आँखें अब साथ-साथ चलती हैं; बार-बार का तिरछापन अब घटते जाना चाहिए.
गर्दन-काँधे की ताक़त चढ़ रही है — टमी टाइम में 45° अब ठीक-ठाक टिकता है, और गोद में सीधा पकड़ने पर सिर कम झूलता है. हाथ-पैर की हरकतें अब झटकों से निकलकर गोल-मुलायम हो रही हैं.
नींद के टुकड़े जुड़ने की दिशा में हैं — रात की लंबी खेप और दिन की तीन-चार झपकियों का ढाँचा दूर से दिखने लगता है. अभी उसे 'शेड्यूल' बनाने की कोशिश मत कीजिए — बस दिन-रात का फ़र्क़ (उजाला-अँधेरा) सिखाते रहिए.
दूध की सप्लाई अब समझदार हो गई है — स्तनों का हर समय भरा-भारी रहना घटता है, और कई माँएँ इसे 'दूध घट गया' पढ़ लेती हैं. पढ़ाई ग़लत है: डायपर और वज़न ठीक हैं तो सप्लाई ठीक है; शरीर ने बस माँग का हिसाब सीख लिया है.
काम पर लौटने की सोच अब शुरू हो सकती है — छब्बीस हफ़्तों की छुट्टी वालों के पास समय है, पर जिनकी छुट्टी छोटी है उनके लिए यह हफ़्ता योजना का है: दूध निकालकर रखने (पम्पिंग) की शुरुआत, बच्चे को कटोरी-चम्मच/बोतल से एक फ़ीड की आदत, और सँभालने वाले का इंतज़ाम. निकाला दूध कमरे के तापमान पर क़रीब चार घंटे, फ़्रिज में क़रीब चार दिन चलता है — 'चार का नियम' याद रखने लायक़ है.
अपने शरीर के लिए इस हफ़्ते का एक काम: दिन में दो बार दस-दस कीगल पक्के कीजिए. छींक-खाँसी की बूँदों वाली शिकायत इसी कसरत से महीनों में जाती है — और यह कहीं भी, किसी को बताए बिना होती है.
हाथों की खोज को खेल दीजिए — हल्का झुनझुना कलाई पर बाँधिए (निगरानी में), या चटख़ मोज़े पहनाइए: हिलाओ तो आवाज़/रंग — 'यह मैं कर रहा हूँ' की पहली ख़ुशी यही है.
बातचीत के खेल में 'नक़ल' जोड़िए — बच्चे की आवाज़ की हूबहू नक़ल कीजिए, फिर एक नई आवाज़ दीजिए. रुककर इंतज़ार करना मत भूलिए — जवाब की ख़ामोशी भी पढ़ाई है.
10-सप्ताह के टीकों की तारीख़ कैलेंडर पर है ना — पेंटा-2, OPV-2, रोटा-2? ट्रैकर देखिए, कार्ड देखिए.
घर की भाषा-नीति साफ़ कर लीजिए — जो भी भाषाएँ घर में हैं, सब बोलिए, बेधड़क. दो-तीन भाषाओं वाला घर बच्चे को उलझाता नहीं, अमीर करता है; बस हर भाषा जीती-जागती बातचीत में आए, स्क्रीन से नहीं. (स्क्रीन का नियम अभी सीधा है: इस उम्र में शून्य.)
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | सातवें सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | हाथों की खोज — घूरना, मुँह तक ले जाना |
| बातचीत | 'अ-गू' की बारी-बारी — भाषा की असली कक्षा |
| नज़र | 180° का पीछा; आँखें अब साथ-साथ |
| ताक़त | टमी टाइम में 45° की टिकाऊ पकड़ |
| माँ | स्तनों का हल्कापन = सप्लाई की समझ, कमी नहीं |
| योजना | काम पर वापसी वालों के लिए पम्पिंग की शुरुआत |
| स्क्रीन | इस उम्र में शून्य — बातचीत ही स्क्रीन है |
पक्की सूची वही — तीन महीने से छोटे का बुख़ार, दूध छोड़ना, तेज़ साँस, सुस्ती, झटके: उसी समय अस्पताल.
विकास की तरफ़ की नज़र: सात हफ़्तों पर बच्चा किसी आवाज़ पर कोई प्रतिक्रिया न दे, आँख बिल्कुल न मिलाए, या हाथ-पैर एक तरफ़ के कम/अकड़े हुए लगें — इनमें से कुछ भी अगली मुलाक़ात तक टालने की चीज़ नहीं है. जल्दी पकड़ी गई हर बात का इलाज-अभ्यास बेहतर चलता है.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
जन्म तिथि डालें — राष्ट्रीय कार्यक्रम का हर टीका कैलेंडर की तारीख़ बनकर दिखेगा, और छूटा हुआ नाम लेकर सामने आएगा. इन्हीं हफ़्तों में 6 सप्ताह वाली बड़ी मुलाक़ात आती है.
यह भारत सरकार का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (National Immunization Schedule) है. इसके सारे टीके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आँगनवाड़ी और सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त लगते हैं. आपके लगाए निशान आपके ही फ़ोन में रहते हैं — हमें नहीं भेजे जाते. यह टीकाकरण कार्ड का विकल्प नहीं है; कार्ड हर बार साथ ले जाएँ.
सवाल: बच्चा मुट्ठी बहुत चूसता है — भूखा रहता है क्या? — हर चूसना भूख नहीं. भूख के बाक़ी इशारे देखिए — मुँह खोलकर तलाशना, छाती की ओर मुड़ना, बेचैनी. वे न हों तो यह सुकून की चूसन है, और वह अच्छी चीज़ है.
सवाल: अँगूठा चूसने की आदत पड़ जाएगी? — इस उम्र में 'आदत' की चिंता बेकार है — सेल्फ़-सूदिंग विकास का हिस्सा है. आदत की बात सालों बाद की है; अभी रोकना-टोकना बच्चे का एक औज़ार छीनना है.
सवाल: 'अ-गू' के जवाब में क्या बोलें — बच्चों वाली भाषा या 'सही' भाषा? — दोनों. खिंची हुई, ऊँची-नीची 'पैरेंटीज़' बच्चों का ध्यान सबसे ज़्यादा पकड़ती है और शब्द भी असली रहते हैं — 'हाँ! तुमने बोला! और बताओ?' यही सुर सही है. बेबी-टॉक के बनावटी बिगड़े शब्दों की ज़रूरत नहीं, पर नुक़सान भी सिद्ध नहीं — सहज रहिए.
सवाल: कान के पीछे/सिर पर पीले पपड़ी जैसे छिलके दिख रहे हैं — क्या है? — क्रैडल कैप — तेल ग्रंथियों की आम, बिना तकलीफ़ वाली चीज़. नहाने से पहले नारियल तेल लगाकर नरम करके धीरे से धो लीजिए; नाख़ून से खुरचिए मत. बढ़े, लाल हो, फैले — तब डॉक्टर.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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