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शिशु का छठा सप्ताह: पहले बड़े टीके — और माँ की अपनी जाँच

शिशु विकास · theAsianparent · अपडेट किया गया

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शिशु का छठा सप्ताह: पहले बड़े टीके — और माँ की अपनी जाँच

इस हफ़्ते कैलेंडर पर दो तारीख़ें हैं — बच्चे की और माँ की. टीकों वाली मुलाक़ात बच्चे की ढाल है; छह-सप्ताह की जाँच माँ की. दोनों में से कोई छूटने की चीज़ नहीं.

दो तारीख़ों का हफ़्ता

छठे हफ़्ते की सुबह केंद्र पर लगी क़तार देश की सबसे भली क़तारों में से है — गोद में डेढ़ महीने के बच्चे, हाथों में MCP कार्ड. आज पहले बड़े टीकों का दिन है: पेंटावैलेंट-1, OPV-1, रोटा-1, PCV-1, fIPV-1.

सुइयाँ देखकर माँ-बाप का कलेजा काँपता है — काँपने दीजिए, पर काँपकर भी जाइए. ये टीके जिन बीमारियों से बचाते हैं (गलघोंटू, काली खाँसी, टिटनेस, निमोनिया, दस्त), वे इसी उम्र में सबसे ख़तरनाक होती हैं. सरकारी केंद्र पर सब मुफ़्त है.

और इसी हफ़्ते दूसरी तारीख़ माँ की है — छह-सप्ताह की पोस्टपार्टम जाँच. वह रस्मी हाज़िरी नहीं है; शरीर और मन दोनों का लेखा उसी कुर्सी पर होता है.

इस सप्ताह आपका शिशु

टीकों का दिन कैसे जाए: दूध पिलाकर ले जाइए, टीकों के तुरंत बाद छाती से लगाइए — चूसना दर्द की सबसे सिद्ध दवा है. रोटा की बूँदें पिलाई जाती हैं, बाक़ी सुइयाँ जाँघ पर.

टीकों के बाद का दिन: हल्का बुख़ार, जाँघ पर सूजन-दर्द, चिड़चिड़ापन — सब सामान्य, एक-दो दिन के मेहमान. ठंडी साफ़ पट्टी सूजन पर ठीक है; बुख़ार की दवा सिर्फ़ केंद्र/डॉक्टर की बताई ख़ुराक में. तेज़ बुख़ार, लगातार चीख़ता रोना, झटके या सुस्ती — यह सामान्य सूची नहीं है, उसी दिन दिखाइए.

विकास की चाल जारी: मुस्कानें अब रोज़ की होंगी, 'कू'-'गू' के जवाब लंबे, और टमी टाइम में सिर 45° की पकड़ बेहतर. कोलिक इसी दौर में चरम पर होता है — याद दिलाना ज़रूरी है: यह चरम है, यानी यहाँ से उतार है.

नींद में पहली अच्छी ख़बर मुमकिन — रात की एक लंबी खेप (4-5 घंटे). न आई हो तो भी सामान्य; घड़ी हर बच्चे की अपनी है.

माँ का हाल भी हाल है

छह-सप्ताह की जाँच की सूची: टाँकों-गर्भाशय की जाँच, बीपी-हीमोग्लोबिन, थायरॉइड (लक्षण हों तो), और मन की बात — उदासी, नींद, बुरे ख़याल. काग़ज़ पर आख़िरी वाला सवाल अक्सर नहीं पूछा जाता; ख़ुद उठाइए. यह जाँच 'सब ठीक है' की मुहर नहीं — सवाल पूछने की कुर्सी है.

परिवार-नियोजन का फ़ैसला इसी मुलाक़ात का काम है. दूध पिलाने के साथ सुरक्षित तरीक़े हैं (कॉपर-T समेत); 'अभी तो दूध पिला रही हूँ' कोई तरीक़ा नहीं है. दो बच्चों के बीच कम-से-कम दो-तीन साल का अंतर माँ और दोनों बच्चों — तीनों की सेहत का सबसे सस्ता निवेश है.

जाँच में हरी झंडी मिले तो हल्की कसरत की छुट्टी भी यहीं से मिलती है — सैर, पेल्विक फ़्लोर (कीगल), साँस की कसरत. पेट की चर्बी की जल्दी किसी काम की नहीं; कमर दर्द से बचाव और ताक़त की वापसी — निशाना यह रखिए.

इस सप्ताह क्या करना है

टीकों की अगली तारीख़ (10 सप्ताह — पेंटा-2, OPV-2, रोटा-2) लौटते हुए ही पूछकर MCP कार्ड पर लिखवा लीजिए. ट्रैकर में निशान लगाइए — छूटे टीके का लाल रंग यहीं काम आता है.

टीके वाले दिन घर का इंतज़ाम पहले से: उस शाम मेहमान नहीं, खाना बना-बनाया, और झुलाने की ड्यूटी बँटी हुई. चिड़चिड़ा दिन ड्यूटी बाँटने से आधा हो जाता है.

माँ की जाँच के लिए सवालों की पर्ची बनाकर जाइए — रक्तस्राव, टाँके, कमर, मन, गर्भनिरोध, कसरत. कुर्सी पर बैठकर आधे सवाल भूलते हैं — पर्ची नहीं भूलती.

इस हफ़्ते से एक सस्ती आदत: रोज़ एक ही समय की एक तस्वीर. तीन महीने बाद यह एल्बम बदलाव की सबसे प्यारी रसीद होगी — और बड़ों को 'कुछ बदला ही नहीं' कहने से रोकने का सबूत भी.

छठा सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातछठे सप्ताह में
बच्चे की तारीख़पेंटा-1, OPV-1, रोटा-1, PCV-1, fIPV-1 — मुफ़्त, MCP कार्ड साथ
टीके के बादहल्का बुख़ार-सूजन सामान्य; दवा सिर्फ़ बताई ख़ुराक में
दर्द की दवाटीके के तुरंत बाद छाती से लगाना
माँ की तारीख़पोस्टपार्टम जाँच — शरीर + मन + गर्भनिरोध
कोलिकचरम — यानी यहाँ से उतार
नींदरात की पहली लंबी खेप मुमकिन (4-5 घंटे)
अगली तारीख़10-सप्ताह के टीके — लौटते हुए लिखवा लें

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

पक्की सूची — तीन महीने से छोटे का बुख़ार (टीकों के हल्के बुख़ार के अलावा, या 24-48 घंटे से लंबा), दूध छोड़ना, तेज़ साँस, सुस्ती, झटके: उसी समय अस्पताल.

टीकों के बाद की अलग पंक्ति: लगातार तीन घंटे से ज़्यादा का चीख़ता रोना, बहुत तेज़ बुख़ार, झटके, या बच्चे का बेहोश-ढीला लगना — बहुत दुर्लभ है, पर होने पर उसी समय अस्पताल. और यह डर टीके टालने की वजह कभी नहीं — जिन बीमारियों से टीका बचाता है, वे इन दुर्लभ प्रतिक्रियाओं से हज़ार गुना ख़तरनाक हैं.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

टीकों की तारीख़ें निकालें

जन्म तिथि डालें — राष्ट्रीय कार्यक्रम का हर टीका कैलेंडर की तारीख़ बनकर दिखेगा, और छूटा हुआ नाम लेकर सामने आएगा. इन्हीं हफ़्तों में 6 सप्ताह वाली बड़ी मुलाक़ात आती है.

यह भारत सरकार का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (National Immunization Schedule) है. इसके सारे टीके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आँगनवाड़ी और सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त लगते हैं. आपके लगाए निशान आपके ही फ़ोन में रहते हैं — हमें नहीं भेजे जाते. यह टीकाकरण कार्ड का विकल्प नहीं है; कार्ड हर बार साथ ले जाएँ.

ध्यान रखें:
  • निजी डॉक्टर इनके अलावा कुछ अतिरिक्त टीके भी सुझा सकते हैं. वे कौन से हैं और आपके बच्चे को चाहिए या नहीं, यह अपने डॉक्टर से पूछें — वह सूची हमने यहाँ नहीं दी है.
  • बच्चा समय से पहले जन्मा हो, वज़न बहुत कम हो, या कोई बीमारी हो — तो समय-सारणी डॉक्टर ही तय करेंगे.
  • मामूली ज़ुकाम या हल्का बुख़ार आमतौर पर टीका टालने की वजह नहीं होता. फिर भी बच्चे को केंद्र में दिखाएँ और फ़ैसला उन्हीं को करने दें.
  • टीके के बाद हल्का बुख़ार, सुई की जगह सूजन या दर्द सामान्य है. बच्चा लगातार रोए, तेज़ बुख़ार हो, झटके आएँ, या वह सुस्त लगे — तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ. अपने मन से कोई दवा न दें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: एक साथ इतने टीके — बच्चे पर बोझ नहीं? — नहीं. यह कार्यक्रम दुनिया भर के अरबों बच्चों पर परखा हुआ है; शिशु का शरीर रोज़ इनसे कहीं ज़्यादा कीटाणुओं से निपटता है. टीके टुकड़ों में बँटवाने से सिर्फ़ चुभनें और चक्कर बढ़ते हैं, सुरक्षा नहीं.

सवाल: बच्चे को ज़ुकाम है — टीके टालें? — हल्का ज़ुकाम-खाँसी आमतौर पर टालने की वजह नहीं. बुख़ार हो तो केंद्र पर बताइए — फ़ैसला वहीं होगा. अपने मन से तारीख़ आगे खिसकाना सबसे आम ग़लती है.

सवाल: निजी अस्पताल में 'दर्द रहित' (पेनलेस) टीके कहते हैं — वे बेहतर हैं? — 'पेनलेस' DPT के एक अलग प्रकार का विपणन-नाम है; सुरक्षा दोनों की परखी हुई है, और सरकारी कार्यक्रम वाला टीका लंबी सुरक्षा में किसी से पीछे नहीं. जेब और सुविधा से चुनिए — 'अच्छे माँ-बाप' का पैमाना यह नहीं है.

सवाल: माँ की जाँच में सब ठीक आया, पर मन अब भी भारी रहता है — फिर किससे कहूँ? — फिर से वहीं, और साफ़ शब्दों में — 'सब ठीक है' सुनकर चुप मत लौटिए. ज़रूरत पर मानसिक-स्वास्थ्य हेल्पलाइन (टेली-मानस 14416, चौबीस घंटे, मुफ़्त) भी है. मदद माँगना इलाज का पहला क़दम है, और यह इलाज काम करता है.

शिशु का विकासबेबी डेवलपमेंट वीक बाय वीकनवजात की देखभालपहले तीन महीने

समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम