
इसी दौर में वह पल आता है जिस पर पिछली सारी रातें माफ़ हो जाती हैं — बच्चा आपको देखता है, पहचानता है, और मुस्कुरा देता है. नींद वाली मुस्कान नहीं; आपके लिए वाली.
अब तक की मुस्कानें नींद में आती थीं — गैस की, सपने की, अपने आप की. इस हफ़्ते के आसपास पहली बार दूसरी क़िस्म आती है: आप झुकते हैं, बोलते हैं, और बच्चा आँखें मिलाकर, ठहरकर, आपके जवाब में मुस्कुराता है.
यह 'सोशल स्माइल' विकास का बड़ा पड़ाव है — दिमाग़ कह रहा है कि चेहरे पढ़ना और जवाब देना शुरू हो गया. किसी बच्चे में यह चौथे हफ़्ते आती है, किसी में आठवें — दोनों सामान्य हैं.
और इसी हफ़्ते दूसरी तरफ़ का चरम भी है — शाम का रोना अपने सबसे ऊँचे दौर (छठे-आठवें हफ़्ते) की ओर चढ़ रहा है. मुस्कान और आँधी साथ-साथ — पालन-पोषण का पहला बड़ा सच यही है.
मुस्कान के साथ 'बातचीत' गहरी हो रही है — आप बोलें तो हाथ-पैर चलाकर, मुँह बनाकर, 'कू' से जवाब. यह बारी-बारी वाला खेल (आप-फिर-मैं) भाषा की असली पहली कक्षा है — स्क्रीन यह कभी नहीं सिखा सकती, आमने-सामने का चेहरा ही सिखाता है.
नज़र अब चलती चीज़ को आधे घेरे (90-180°) तक पकड़ने लगी है. झुनझुना धीरे-धीरे एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ ले जाइए — आँखें पीछा करेंगी. यही इस उम्र का सबसे अच्छा खिलौना-खेल है.
शाम का रोना (कोलिक): तय समय, खिंची टाँगें, लाल चेहरा, घंटों की आँधी — तीन महीने से छोटे के इस रोने का कोई 'इलाज' सिद्ध नहीं है, पर आज़माने की सूची है: काँधे से लगाकर झुलाना, धीमी 'श्श्श', चूसने को उँगली/छाती, हल्की मालिश, पेट के बल गोद में लिटाना. और सबसे ज़रूरी सूची — जो नहीं करना: ग्राइप वॉटर/जनम घुट्टी/कोई सिरप नहीं.
वज़न की चाल जारी — हफ़्ते में 150-200 ग्राम. दूध का हिसाब अब शरीर ख़ुद रखता है; आपका काम माँग पर पिलाना और डायपर गिनना भर है.
छह हफ़्ते क़रीब हैं — माँ की पोस्टपार्टम जाँच की तारीख़ पक्की है ना? उसमें शरीर के साथ मन का हाल खुलकर कहना है. और परिवार-नियोजन का सवाल — दूध गर्भनिरोध की गारंटी नहीं — उसी मुलाक़ात का है.
शाम की आँधी का घर-नियम बनाइए: रोते बच्चे को बारी-बारी सँभालना. एक आदमी आधे घंटे झुलाए, फिर दूसरा — रोना माँ का इम्तिहान नहीं है, घर की ड्यूटी है. और जब कोई सँभालने वाला न हो और सब्र टूटने लगे — बच्चे को सुरक्षित जगह (पालना) लिटाकर दो मिनट दूर हो जाना ग़लत नहीं, समझदारी है. झँझोड़ना कभी नहीं — कभी भी नहीं.
नींद अब भी टुकड़ों में है, पर सुरंग का नक़्शा जान लीजिए: छठे-आठवें हफ़्ते से ज़्यादातर बच्चे रात की एक लंबी नींद (4-5 घंटे) देने लगते हैं. यानी यह दौर चढ़ाई का आख़िरी हिस्सा है, पठार नहीं.
अगले हफ़्ते के टीकों की तैयारी: तारीख़ ऊपर के ट्रैकर से, MCP कार्ड थैली में, और उस दिन की दोपहर ख़ाली — टीकों के बाद का दिन बच्चे का चिड़चिड़ा दिन हो सकता है.
मुस्कान का खेल रोज़ खेलिए — चेहरा क़रीब, धीमी ऊँची आवाज़ ('पैरेंटीज़' — दुनिया भर के माँ-बाप अपने आप बोलते हैं), और जवाब का इंतज़ार. जो जवाब मिले — मुस्कान, 'कू', हाथ-पैर — उसे दोहराइए. यही इस उम्र की पूरी पाठशाला है.
काले-सफ़ेद से आगे अब चटख़ रंगों की चीज़ें दिखनी शुरू — लाल झुनझुना सबसे क्लासिक. खिलौने की क़ीमत से ज़्यादा उसकी दूरी मायने रखती है: 30-40 सेंटीमीटर, आँखों की पकड़ में.
अपनी एक चीज़ इस हफ़्ते से पक्की कीजिए — दिन की एक झपकी या आधे घंटे की सैर या नहाने भर का सुकून, रोज़, बिना अपराध-बोध. तीन महीने की दौड़ के लिए माँ की बैटरी भी उतनी ही ज़रूरी सामान है.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | पाँचवें सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | सोशल स्माइल — देखकर, जवाब में मुस्कान (हफ़्ता 4-8) |
| नज़र | चलती चीज़ का 90-180° तक पीछा |
| शामें | कोलिक चरम की ओर (हफ़्ता 6-8) — फिर उतार |
| नहीं देना | ग्राइप वॉटर, घुट्टी, कोई सिरप — कुछ नहीं |
| घर-नियम | रोते बच्चे की बारी-बारी ड्यूटी; झँझोड़ना कभी नहीं |
| अगले हफ़्ते | 6-सप्ताह के टीके + माँ की जाँच |
| रोज़ का खेल | चेहरा-आवाज़-जवाब — बारी-बारी की 'बातचीत' |
पक्की सूची हर हफ़्ते वही — तीन महीने से छोटे का बुख़ार (उसी समय अस्पताल, 108), दूध छोड़ना, तेज़ साँस, सुस्ती, झटके, घटते डायपर.
रोने पर लकीर फिर से: आँधी शाम की और आती-जाती हो तो कोलिक; पर रोना दिन भर का हो, बुख़ार-उल्टी-ढीलापन साथ हो, या रोने की आवाज़ ही बदली-कमज़ोर लगे — उसी दिन डॉक्टर. और घर में हर सँभालने वाले तक यह वाक्य पहुँचे: झँझोड़ा गया बच्चा (शेकन बेबी) जानलेवा चोट है — ग़ुस्सा आए तो बच्चा लिटाकर दूर हो जाइए, मदद पुकारिए.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
जन्म तिथि डालें — राष्ट्रीय कार्यक्रम का हर टीका कैलेंडर की तारीख़ बनकर दिखेगा, और छूटा हुआ नाम लेकर सामने आएगा. इन्हीं हफ़्तों में 6 सप्ताह वाली बड़ी मुलाक़ात आती है.
यह भारत सरकार का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (National Immunization Schedule) है. इसके सारे टीके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आँगनवाड़ी और सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त लगते हैं. आपके लगाए निशान आपके ही फ़ोन में रहते हैं — हमें नहीं भेजे जाते. यह टीकाकरण कार्ड का विकल्प नहीं है; कार्ड हर बार साथ ले जाएँ.
सवाल: पाँच हफ़्ते हुए, मुस्कान नहीं आई — देर हो गई? — नहीं. सोशल स्माइल की खिड़की आठ हफ़्तों तक फैली है, समय से पहले जन्मे बच्चों में और आगे. आठ-दस हफ़्तों के बाद भी आँख मिलाकर मुस्कान न हो, तब डॉक्टर से ज़िक्र कीजिए.
सवाल: बच्चा आवाज़ पर चौंकता है पर मुड़ता नहीं — सुनता है ना? — इस उम्र में चौंकना-ठहरना ही जवाब है; आवाज़ की ओर सिर घुमाना अगले महीनों का करतब है. जन्म के समय की सुनने की जाँच (हुई हो तो) और आवाज़ पर कोई भी प्रतिक्रिया — दोनों ठीक हैं तो चिंता नहीं.
सवाल: शाम के रोने में दूध देना ठीक है या 'आदत बिगड़ेगी'? — तीन महीने से छोटे बच्चे की कोई आदत नहीं बिगड़ती — यह वाक्य दीवार पर लिखने लायक़ है. चूसना उसका सबसे बड़ा दिलासा है; छाती देना कोलिक की सबसे सही दवा में गिना जाता है.
सवाल: पेट के बल सुलाने से कोलिक ठीक होता है, दादी कहती हैं — करें? — जागते हुए, आपकी गोद-निगरानी में पेट के बल रखना ठीक है (आराम भी देता है). पर सोने के लिए हमेशा पीठ के बल — यह नियम कोलिक से नहीं टूटता; पेट के बल की नींद ही वह जोखिम है जिससे यह नियम बचाता है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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