
आधी रात का बुख़ार हो या टीके की तारीख़ — सही नंबर और सही ठिकाना पहले से पता हो, तो आधी घबराहट वहीं ख़त्म. यह सूची फ़्रिज पर चिपकाने के लिए बनी है.
108 — मुफ़्त सरकारी एम्बुलेंस, हर राज्य में. 102 — माँ-शिशु के लिए एम्बुलेंस (गर्भवती और नवजात की अस्पताल-आवाजाही), कई राज्यों में मुफ़्त. 112 — देश की साझा इमरजेंसी हेल्पलाइन (पुलिस-आग-मेडिकल एक नंबर पर). 1098 — चाइल्डलाइन: मुसीबत में किसी भी बच्चे के लिए, चौबीसों घंटे.
ज़हर या दवा निगलने पर अपने नज़दीकी बड़े अस्पताल का नंबर पहले से जानिए — और एम्स (AIIMS) का नेशनल पॉइज़न्स इन्फ़ॉर्मेशन सेंटर चौबीस घंटे सलाह देता है (1800-116-117). बोतल-पत्ता साथ लेकर फ़ोन/अस्पताल — यह नियम याद रखिए.
इनके साथ अपनी सूची जोड़िए: बच्चे के डॉक्टर का नंबर, नज़दीकी 24-घंटे अस्पताल, ब्लड ग्रुप, एलर्जी. यह पूरा पन्ना फ़्रिज पर और घर के हर बड़े के फ़ोन में हो — घर में बच्चे को सँभालने वाला हर आदमी (दादी, मदद) इन नंबरों को जानता हो, यही इस सूची की असली क़ीमत है.
देश भर में फैले आँगनवाड़ी केंद्र (ICDS योजना) छह साल तक के बच्चों और गर्भवती-स्तनपान कराने वाली माँओं के लिए हैं: पूरक पोषण (टेक-होम राशन/पका खाना), टीकाकरण के दिन, वज़न-लंबाई की नियमित जाँच, और तीन-छह साल के बच्चों के लिए प्री-स्कूल गतिविधि. यह सब मुफ़्त है — अपने मोहल्ले-गाँव की आँगनवाड़ी कार्यकर्ता से नाम दर्ज कराइए.
आँगनवाड़ी और ASHA कार्यकर्ता ही ज़्यादातर सरकारी योजनाओं का दरवाज़ा हैं: जननी सुरक्षा योजना (संस्थागत प्रसव पर आर्थिक मदद), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पहली संतान पर गर्भवती को क़िस्तों में राशि), टीकाकरण अभियान — इनकी शर्तें-रक़में राज्य के हिसाब से बदलती हैं, इसलिए ताज़ा जानकारी अपनी ASHA/आँगनवाड़ी से या राज्य के स्वास्थ्य विभाग से ही लीजिए.
महीने की एक तारीख़ याद रखने लायक़: हर महीने की 9 तारीख़ को PMSMA दिवस — सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मुफ़्त जाँच. और पोषण के मामले में गंभीर कुपोषण की पहचान-इलाज के लिए ज़िला अस्पताल के NRC (पोषण पुनर्वास केंद्र) होते हैं — ज़रूरत हो तो ASHA से पूछिए.
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सरकारी केंद्रों-अस्पतालों में बच्चों के बुनियादी टीके मुफ़्त लगते हैं — BCG, पोलियो, पेंटावैलेंट, खसरा-रूबेला समेत. मिशन इन्द्रधनुष अभियानों में छूटे टीके पूरे कराए जाते हैं. निजी अस्पताल इन्हीं के साथ कुछ अतिरिक्त टीके भी देते हैं — कौन-से ज़रूरी, यह अपने बाल-रोग विशेषज्ञ से तय कीजिए.
याद रखने का इंतज़ाम: जन्म के समय मिला MCP कार्ड (माँ और बच्चा सुरक्षा कार्ड) टीकों का सरकारी रिकॉर्ड है — हर टीके पर साथ ले जाइए और भरवाइए. सरकार का U-WIN पोर्टल टीकों का डिजिटल रिकॉर्ड और अगली तारीख़ की याद दिलाता है. हमारा टीकाकरण चार्ट टूल भी उम्र-वार सूची एक नज़र में देता है.
टीके के बाद हल्का बुख़ार-सूजन सामान्य है; क्या सामान्य नहीं है, यह हमारे टीकों के बाद वाले लेख में है. टीका छूट गया हो तो घबराइए मत — छूटा टीका रद्द नहीं होता, अगली मुलाक़ात में पकड़ लिया जाता है.
बच्चे की सेहत की जानकारी के लिए ठिकाने गिने-चुने रखिए: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ़ के पालन-पोषण पन्ने, भारतीय बाल अकादमी (IAP) की parent-education सामग्री, सरकारी पोर्टल, और आपका अपना बाल-रोग विशेषज्ञ. व्हाट्सऐप-फ़ॉरवर्ड और वायरल वीडियो इस सूची में नहीं हैं — 'हर बीमारी का घरेलू इलाज' बताने वाला हर संदेश पहले शक़ से पढ़िए.
जाँचने की तीन आदतें: स्रोत देखिए (कौन कह रहा है), तारीख़ देखिए (कब की बात है), और बड़े दावों पर दूसरा स्रोत खोजिए. जो सलाह आपके बच्चे पर लागू करनी हो — दवा, खुराक, टीका — उस पर आख़िरी मुहर हमेशा अपने डॉक्टर की.
और अपने जैसे माता-पिता का साथ भी एक संसाधन है: मोहल्ले-सोसाइटी के अभिभावक समूह, स्कूल के पैरेंट ग्रुप — सामान बाँटने से लेकर 'यह डॉक्टर कैसा है' तक, सबसे ज़्यादा काम की जानकारी यहीं मिलती है. बस सेहत के नुस्ख़े यहाँ से मत लीजिए.
जन्म प्रमाणपत्र पहला और सबसे ज़रूरी काग़ज़ है — जन्म के 21 दिन के अंदर पंजीकरण मुफ़्त-आसान है (अस्पताल से ही शुरुआत होती है); बाद में भी बनता है, पर दौड़ बढ़ती है. इसके बाद: आधार (नामांकन बचपन में भी हो सकता है), राशन कार्ड में नाम, और स्कूल के समय जाति-निवास जैसे प्रमाण जिनकी ज़रूरत हो.
माता-पिता की नौकरी से जुड़े हक़ भी जान लीजिए: मातृत्व अवकाश क़ानूनन 26 हफ़्ते (पहले दो बच्चों के लिए) है — पर यह संगठित क्षेत्र की नौकरियों पर लागू होता है; अपनी कंपनी की नीति और पितृत्व अवकाश HR से लिखित में समझिए. ESI कवर वाले परिवारों को प्रसव-लाभ अलग से मिलते हैं.
बच्चे के नाम बचत शुरू करनी हो तो बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना और किसी भी बच्चे के लिए PPF-सावधि जमा जैसे सीधे-सरकारी रास्ते पहले देखिए. निवेश की सलाह यह लेख नहीं देगा — बस इतना: जो योजना समझ न आए, उसमें पैसा मत डालिए.
स्कूल की दहलीज़ पर एक हक़ और याद रखिए: शिक्षा का अधिकार (RTE) क़ानून के तहत निजी स्कूलों की प्रवेश-कक्षा की एक चौथाई सीटें कमज़ोर आय वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं — आवेदन की तारीख़ें और आय-सीमा राज्य की शिक्षा वेबसाइट पर हर साल आती हैं. सरकारी स्कूलों में दाख़िले के लिए जन्म प्रमाणपत्र ही मुख्य काग़ज़ है, और किताबें-यूनिफ़ॉर्म-दोपहर का भोजन वहाँ मुफ़्त मिलते हैं.
सवाल: आँगनवाड़ी का लाभ लेने के लिए क्या काग़ज़ चाहिए? — आम तौर पर बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र/MCP कार्ड, माता-पिता का पहचान पत्र और पते का प्रमाण काफ़ी हैं — पर सूची राज्य-दर-राज्य थोड़ी बदलती है, इसलिए पहली मुलाक़ात में आँगनवाड़ी कार्यकर्ता से ही पूछ लीजिए. नाम दर्ज कराने का कोई शुल्क नहीं है.
सवाल: निजी अस्पताल में डिलीवरी हुई है — क्या सरकारी योजनाओं का लाभ फिर भी मिलेगा? — कुछ का हाँ, कुछ का नहीं. PMMVY जैसी योजनाएँ डिलीवरी की जगह से बंधी नहीं हैं; जननी सुरक्षा योजना संस्थागत (ख़ासकर सरकारी) प्रसव से जुड़ी है और राज्य-नियम अलग हैं. टीके सरकारी केंद्र पर मुफ़्त हर बच्चे के लिए हैं, डिलीवरी कहीं भी हुई हो. पक्की स्थिति ASHA/आँगनवाड़ी से पूछिए.
सवाल: 1098 चाइल्डलाइन पर किस तरह की मदद मिलती है? — मुसीबत में पड़े किसी भी बच्चे के लिए — खोया बच्चा, बाल मज़दूरी, शोषण, बेसहारा बच्चा — 1098 चौबीस घंटे की राष्ट्रीय हेल्पलाइन है. यह शिकायत का भी नंबर है: कहीं किसी बच्चे के साथ ग़लत होते देखें तो यहीं बताइए.
सवाल: हर योजना का नाम-नियम अलग राज्य में अलग क्यों निकलता है? — क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है — केंद्र की योजना पर राज्य अपनी शर्तें-रक़में जोड़ते हैं, और कई राज्यों की अपनी अलग योजनाएँ भी हैं (लाडली, कन्या सुमंगला जैसी). इसीलिए इस लेख ने रक़में नहीं लिखीं — ताज़ा और लागू जानकारी का एक ही पक्का पता है: आपकी ASHA/आँगनवाड़ी कार्यकर्ता या ज़िला स्वास्थ्य कार्यालय.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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