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गर्भावस्था का उनतीसवाँ सप्ताह: हड्डियों की भूख — कैल्शियम की तिमाही

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

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गर्भावस्था का उनतीसवाँ सप्ताह: हड्डियों की भूख — कैल्शियम की तिमाही

अब बच्चे की हड्डियाँ रोज़ कैल्शियम की खेप माँगती हैं — और खेप का एक ही स्रोत है: आप. थाली में नहीं होगा तो आपकी हड्डियों से जाएगा. यह हफ़्ता उसी हिसाब का है.

रोज़ की खेप

तीसरी तिमाही में बच्चे का कंकाल रोज़ कैल्शियम जमा करता है — जन्म तक उसकी हड्डियों में जो कैल्शियम होगा, उसका बड़ा हिस्सा इन्हीं हफ़्तों में चढ़ता है.

शरीर का इंतज़ाम बेरहम और ख़ूबसूरत दोनों है: थाली से कैल्शियम कम पड़े, तो शरीर माँ की हड्डियों से निकालकर बच्चे को दे देता है. बच्चे का हिस्सा कभी नहीं रुकता — क़ीमत माँ की हड्डियाँ चुकाती हैं.

इसीलिए यह तिमाही दूध-दही-पनीर की तिमाही है — और डॉक्टर की लिखी कैल्शियम गोली इसकी बीमा-पॉलिसी. गोली चल रही है ना? आयरन से अलग समय पर? यह दो सवाल आज ख़ुद से पूछ लीजिए.

इस सप्ताह आपका बच्चा

बच्चा अब छोटे कद्दू जितना — उनतालीस सेंटीमीटर, वज़न सवा किलो के आसपास. मांसपेशियाँ और फेफड़े दोनों पक रहे हैं, और सिर दिमाग़ की बढ़त के साथ बड़ा हो रहा है.

हलचलें अब लात से ज़्यादा धक्के-खिंचाव जैसी लगेंगी — जगह घट रही है, ताक़त बढ़ रही है. गिनती का नियम वही रहता है: ढंग बदलना सामान्य है, मात्रा घटना नहीं.

चर्बी अब शरीर का ठीक-ठाक हिस्सा बन रही है — सफ़ेद चर्बी (ऊर्जा का भंडार) और भूरी चर्बी (जन्म के बाद गर्मी बनाने वाली) दोनों. झुर्रीदार कुर्ता भरता जा रहा है.

आपके शरीर में बदलाव

कैल्शियम का रोज़ का हिसाब: दो गिलास दूध या बराबर का दही-छाछ-पनीर + तिल/रागी/हरी सब्ज़ी + गोली (आयरन से अलग समय). दूध न पचे तो दही-छाछ से पूरा कीजिए — और यह डॉक्टर को बता दीजिए.

पिंडली की रात वाली नसें (क्रैम्प) इस तिमाही में सबसे ज़्यादा सताती हैं — कैल्शियम-मैग्नीशियम की कमी और थकी नसें दोनों मिलकर. सोने से पहले पिंडली का खिंचाव, दिन भर पानी, और नस चढ़े तो पंजा अपनी ओर खींचना — यही तीन इलाज हैं.

साँस, जलन, टूटती नींद — तीसरी तिमाही की तिकड़ी अपनी जगह है. एक नया मेहमान: लेटे-लेटे उठने पर चक्कर. हमेशा करवट लेकर, हाथ के सहारे, दो साँसों की रफ़्तार से उठिए — झटके से कभी नहीं.

इस सप्ताह क्या करना है

किक-गिनती रोज़ चल रही है ना — यह अब हर हफ़्ते की पहली जाँच-सूची है. दर्ज आँकड़ा ही असली आँकड़ा है.

बत्तीसवें सप्ताह के ग्रोथ-स्कैन की तारीख़ ले लीजिए — उसमें बच्चे का वज़न, पानी की मात्रा और प्लेसेंटा की जगह देखी जाती है. 'लो-लाइंग प्लेसेंटा' वालों का दोबारा-हिसाब भी वहीं होता है.

स्तनपान की तैयारी अब पढ़ाई से आगे बढ़े — एंटीनेटल कक्षा या नर्स से 'लैच' (बच्चे का मुँह लगाना) की तस्वीर-वीडियो समझ लीजिए. पहले हफ़्ते की आधी मुश्किलें सही लैच से ही हल होती हैं. निप्पल की बनावट को लेकर शक हो (धँसे निप्पल), तो डॉक्टर से अभी पूछिए — जन्म के बाद नहीं.

घर में पालना/बिस्तर की जगह तय कीजिए — नवजात के लिए सबसे सुरक्षित इंतज़ाम: आपके कमरे में, आपके बिस्तर के पास, पर अपनी अलग सपाट सतह — सख़्त गद्दा, कोई तकिया-रज़ाई-खिलौना नहीं. झूला-पालना जो भी हो, यह नियम वही रहता है.

उनतीसवाँ सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातउनतीसवें सप्ताह में
मुख्य घटनाहड्डियों में रोज़ कैल्शियम की खेप
बच्चे का आकार39 सेंटीमीटर, ~1.25 किलो
कैल्शियम का हिसाबदूध/दही दो बार + तिल-रागी-साग + गोली अलग समय
आपके मुमकिन लक्षणपिंडली की नसें, चक्कर (झटके से उठने पर)
बुक करना है32-सप्ताह ग्रोथ-स्कैन
सीखना हैसही लैच — जन्म से पहले, बाद में नहीं
घर का इंतज़ामनवजात की अपनी सपाट सतह — आपके कमरे में

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

हलचल पहली पंक्ति पर — दो घंटे में दस नहीं, या दिन अलग शांत: उसी समय फ़ोन. बाक़ी पूरी सूची (रक्तस्राव, नियमित कसाव, पानी जैसा स्राव, सिरदर्द-चमक-सूजन, बुख़ार, जलन, खुजली, आराम की साँस-तकलीफ़) जस की तस.

अब एक और: चेहरे-हाथों की अचानक सूजन के साथ पेशाब कम आना और वज़न का हफ़्ते में दो किलो से ज़्यादा चढ़ना — यह पानी का जमाव है और प्री-एक्लैम्प्सिया का इशारा हो सकता है. सामान्य शाम वाली सूजन पैरों तक रहती है और सुबह उतर जाती है — फ़र्क़ यही है.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

अपनी डिलीवरी की तारीख़ निकालें

आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.

यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: दूध बिल्कुल नहीं भाता — गोली से काम चल जाएगा? — गोली + दही-छाछ-पनीर + तिल-रागी से हिसाब पूरा हो सकता है. डॉक्टर को बताइए कि दूध नहीं ले पातीं — वे ख़ुराक उसी हिसाब से लिखेंगे. भाता नहीं और ज़बरदस्ती पीकर उल्टी होती है, तो वह रास्ता वैसे भी बंद है.

सवाल: बच्चा रात के दो बजे सबसे ज़्यादा उछलता है — नींद कैसे पूरी करूँ? — करवट बदलकर, साँस धीमी करके फिर सोने की कोशिश — बच्चे की रात की महफ़िल अपने आप ख़त्म होती है. दिन की झपकी से हिसाब बराबर कीजिए. और यह याद: जन्म के बाद के पहले हफ़्तों की घड़ी भी यही रहने वाली है — शरीर अभ्यास कर रहा है.

सवाल: पेट इतना खिंच गया है कि खुजली होती है — निशान का डर भी है. क्या करूँ? — नहाने के बाद नारियल तेल/मॉइस्चराइज़र, ढीले सूती कपड़े, और खुजलाने की जगह ठंडी सिकाई. निशान ख़ानदान से तय होते हैं — क्रीम से नहीं. बस हथेली-तलवों वाली रात की खुजली अलग चीज़ है — वह डॉक्टर वाली सूची में है.

सवाल: पालना ज़रूरी है या बच्चा हमारे बिस्तर पर सोए? — नवजात के लिए सबसे सुरक्षित: आपके कमरे में, पर अपनी अलग सपाट सतह — यही दुनिया भर की सलाह है. एक ही बिस्तर पर सोने से दबने का ख़तरा जुड़ता है, ख़ासकर पहले महीनों में. अलग सतह पास ही हो तो दूध पिलाना भी उतना ही आसान रहता है.

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम