
तीस पूरे, दस बाक़ी. भीतर दिमाग़ अपनी ज़िंदगी की सबसे तेज़ बढ़त पर है — और बाहर तैयारियों की सूची अपने आख़िरी दौर में आनी चाहिए.
चालीस में से तीस — अब गिनती उँगलियों पर आ गई. दस हफ़्ते सुनने में लंबे लगते हैं; तैयारियों की सूची के आगे छोटे पड़ जाते हैं. इसलिए यह हफ़्ता सूची का हफ़्ता है.
भीतर की ख़बर इससे बड़ी है: बच्चे का दिमाग़ अब अपनी सबसे तेज़ बढ़त के दौर में है. सिलवटें घनी हो रही हैं, नसों के जोड़ खरबों की गिनती में बन रहे हैं, और सिर उसी हिसाब से बढ़ रहा है.
इस बढ़त का ईंधन आपकी थाली से जाता है — और उसका एक ख़ास हिस्सा है ओमेगा-3 चिकनाई. मछली खाने वाले घरों में वह वहीं से मिलती है; शाकाहारी थाली में अखरोट, अलसी (और डॉक्टर से पूछकर सप्लीमेंट) उसके स्रोत हैं.
बच्चा अब पत्तागोभी जितना — चालीस सेंटीमीटर, वज़न डेढ़ किलो छूता हुआ. यहाँ से हर हफ़्ता क़रीब दो सौ ग्राम चढ़ाएगा.
आँखें अब खुली-बंद दोनों हालत में काम करती हैं और रोशनी-अँधेरे का फ़र्क़ साफ़ पकड़ती हैं. सिर पर बाल घने हो रहे हैं, और शरीर का रोआँ (लानुगो) अब झड़ना शुरू हो गया है — उसकी ज़रूरत चर्बी ने ले ली है.
अस्थि-मज्जा अब ख़ून बनाने का पूरा काम सँभाल चुकी है. फेफड़े रिहर्सल में पक्के हो रहे हैं — पर पूरी तैयारी का सर्टिफ़िकेट अभी हफ़्तों दूर है; इसीलिए हर हफ़्ता भीतर बीतना क़ीमती है.
थकान अब पहली तिमाही वाली याद दिलाएगी — वज़न, टूटी नींद और भीतर की फ़ैक्टरी तीनों का जोड़. रफ़्तार घटाइए, मदद माँगिए, और 'सब कर लूँगी' वाली ज़िद को दस हफ़्ते की छुट्टी दीजिए.
चलने में पेंगुइन-चाल आ गई हो तो वह भी सामान्य — ढीले जोड़ और आगे का बोझ मिलकर यही चाल बनाते हैं. गिरने से बचाव अब सबसे ऊपर: गीले फ़र्श, बिखरे खिलौने, रात की सीढ़ियाँ — तीनों से होशियारी.
ब्रैक्सटन-हिक्स अब ताक़तवर हो सकते हैं. पहचान की कसौटी दोहरा लीजिए — अनियमित, पानी-आराम से शांत, बढ़ते नहीं. और असली दर्द की कसौटी भी: नियमित लय, घटता अंतराल, बढ़ता ज़ोर. शक हो तो कॉन्ट्रैक्शन टाइमर पर नापिए — आधे घंटे की नाप ज़्यादातर शक मिटा देती है.
अस्पताल-बैग इसी हफ़्ते पूरा भर जाए — छत्तीस की दहलीज़ पहले भी खुल सकती है. सूची पर आख़िरी नज़र: काग़ज़ों की थैली, माँ के कपड़े-पैड, बच्चे के धुले कपड़े-टोपी-चादर, साथी के कपड़े, फ़ोन-चार्जर, थोड़े पैसे.
32-सप्ताह का ग्रोथ-स्कैन अगले हफ़्तों में है — तारीख़ पक्की हो. उसी मुलाक़ात में डॉक्टर से प्रसव-योजना की खुली बात कर लीजिए: सामान्य प्रसव की संभावना, सिज़ेरियन किन हालात में, दर्द-राहत (एपिड्यूरल) वहाँ मिलती है या नहीं.
ओमेगा-3 का इंतज़ाम थाली में — हफ़्ते में दो बार मछली (पारा-कम वाली, अच्छी तरह पकी) या रोज़ मुट्ठी भर अखरोट/चम्मच भर पिसी अलसी. सप्लीमेंट का सवाल डॉक्टर से.
पुराने बड़े बच्चे (अगर हैं) की तैयारी भी अब शुरू — नए मेहमान की बात, अस्पताल के दिनों में वह किसके पास रहेगा, और 'तेरा सामान छोटा भाई/बहन ले लेगा' वाले मज़ाक़ों पर घर में रोक. पहले बच्चे की दुनिया भी इन्हीं हफ़्तों में बदल रही है.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | तीसवें सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | दिमाग़ की सबसे तेज़ बढ़त; 10 हफ़्ते बाक़ी |
| बच्चे का आकार | 40 सेंटीमीटर, ~1.5 किलो |
| थाली में नया | ओमेगा-3 — मछली या अखरोट-अलसी |
| इसी हफ़्ते | अस्पताल-बैग पूरा; ग्रोथ-स्कैन की तारीख़ |
| डॉक्टर से बात | प्रसव-योजना: सामान्य/सिज़ेरियन/दर्द-राहत |
| रोज़ जारी | किक-गिनती, कैल्शियम-आयरन, धीमी साँसें |
| घर में | बड़े बच्चे की तैयारी — नए मेहमान की बात |
हलचल पहली पंक्ति — दो घंटे में दस नहीं: उसी समय फ़ोन. नियमित होते कसाव, पानी जैसा स्राव, रक्तस्राव, सिरदर्द-चमक-सूजन, बुख़ार, हथेली-तलवों की खुजली, आराम की साँस-तकलीफ़ — पूरी सूची उसी दिन वाली है.
गिरना अब अपने आप में जाँच की वजह है — पेट पर सीधी चोट न भी लगी हो, तो भी गिरने के बाद उसी दिन डॉक्टर से बात कीजिए और हलचल पर ख़ास नज़र रखिए. ज़्यादातर बार सब ठीक निकलता है — पर वह 'ठीक' जाँच से आए, अंदाज़े से नहीं.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.
यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.
सवाल: वज़न अब तक दस किलो चढ़ गया — ज़्यादा तो नहीं? — हिसाब शुरुआती वज़न पर है — औसत बनावट के लिए पूरा हिसाब दस-बारह किलो के आसपास बैठता है, तो रफ़्तार देखने लायक़ है पर घबराने लायक़ नहीं. असली जवाब डॉक्टर की नाप से आएगा — अपने मन से खाना घटाइए मत; बच्चे की सबसे तेज़ बढ़त के हफ़्ते यही हैं.
सवाल: एपिड्यूरल के बारे में घर में डर फैला है — 'कमर हमेशा दुखेगी'. सच? — लंबे शोध इस डर की पुष्टि नहीं करते — प्रसव के बाद की कमर-दर्द एपिड्यूरल वालों और बिना वालों में लगभग बराबर मिलती है (वजह: गर्भ ख़ुद). लेना-न लेना आपकी पसंद है; फ़ैसला डर से नहीं, जानकारी से हो. आपके अस्पताल में सुविधा है या नहीं — यह ज़रूर पूछ लीजिए.
सवाल: बच्चा 'छोटा है' स्कैन में आया — खाना बढ़ाऊँ? — 'छोटा' का हिसाब डॉक्टर के हाथ में रहने दीजिए — एक स्कैन की नाप में आगे-पीछे होना आम है, और असली तस्वीर दो स्कैनों की चाल से बनती है. खाना अपने मन से दोगुना करने से बच्चा नहीं, माँ का वज़न बढ़ता है. डॉक्टर कहें तो प्रोटीन-कैलोरी बढ़ाने का तरीक़ा भी वही बताएँगे.
सवाल: इतनी थकान में किक-गिनती भूल जाती हूँ — कोई तरकीब? — गिनती को किसी रोज़ की पक्की चीज़ से बाँध दीजिए — रात के खाने के बाद वाली चाय, या सोने से पहले की दिनचर्या. फ़ोन का अलार्म भी लगा लीजिए. और परिवार को बता दीजिए — 'मुझे रोज़ पूछना: आज गिनती हुई?' साझा ड्यूटी कभी नहीं छूटती.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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