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गर्भावस्था का उनतालीसवाँ सप्ताह: फुल टर्म — बच्चा पूरी तरह तैयार

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

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गर्भावस्था का उनतालीसवाँ सप्ताह: फुल टर्म — बच्चा पूरी तरह तैयार

आज से 'फुल टर्म' — किताबें भी अब यही कहती हैं: बच्चा पूरा तैयार है. बाक़ी है तो बस वह घंटी, जो शरीर अपनी घड़ी देखकर बजाएगा — आज रात भी, अगले हफ़्ते भी.

घंटी शरीर बजाएगा

उनतालीस पूरे — और अब विज्ञान की भी मुहर: 'फुल टर्म.' दिमाग़, फेफड़े, जिगर — जिन आख़िरी परतों के लिए हफ़्ते गिने जा रहे थे, वे चढ़ चुकी हैं. अब कोई इंतज़ार 'बच्चे के लिए' नहीं है; इंतज़ार सिर्फ़ घड़ी का है.

और वह घड़ी दिलचस्प है — प्रसव की घंटी बजाने में बच्चे का भी हाथ है. उसके फेफड़ों से निकलने वाले संकेत माँ के हॉर्मोन से मिलकर वह झरना शुरू करते हैं जो दर्द बनकर आता है. यानी शुरुआत वहीं से होगी जहाँ से होनी चाहिए — भीतर से.

आपके हिस्से अब तीन काम हैं: रोज़ की गिनती, हर हफ़्ते की जाँच, और वह सब्र जो पिछले हफ़्ते से क़ीमती होता जा रहा है. बाक़ी सूची — बैग से लेकर नंबरों तक — बंद हो चुकी है. अब सिर्फ़ रहना है, तैयार.

इस सप्ताह आपका बच्चा

बच्चा अब तरबूज़ के छोटे नग जितना — क़रीब पचास सेंटीमीटर, वज़न सवा तीन किलो के आसपास. यहाँ से जो भी दिन भीतर हैं, वे सिर्फ़ थोड़ी और चर्बी और थोड़ा और दिमाग़ जोड़ेंगे — कमी किसी चीज़ की नहीं है.

प्लेसेंटा — नौ महीने की वह जीवन-रेखा — अब अपनी उम्र के आख़िरी दौर में है; यही एक वजह है कि तारीख़ के बाद की निगरानी बढ़ जाती है. वह अपना काम अब भी पूरा कर रही है — एंटीबॉडी की आख़िरी खेपें भी इसी हफ़्ते जा रही हैं.

बच्चे की खोपड़ी की हड्डियाँ जन्म के रास्ते के लिए तैयार हैं — इसीलिए कई नवजातों का सिर पहले दिन थोड़ा लंबा-सा दिखता है और हफ़्ते भर में गोल हो जाता है. पहले से जान लिया तो पहले दिन का एक डर कटा.

आपके शरीर में बदलाव

इस हफ़्ते शरीर 'कभी भी' मोड में है — और उसके इशारों की भाषा अब आप पढ़ चुकी हैं: नियमित होते दर्द, पानी, म्यूकस, कमर की लहरें. नए लक्षणों की सूची अब नहीं है; अब सिर्फ़ पहचान का अभ्यास है.

ऊर्जा का एक अजीब झोंका — 'नेस्टिंग' का आख़िरी उभार — इन दिनों आ सकता है: रात को रसोई चमकाने का जोश. उसे नापकर ख़र्च कीजिए; प्रसव किसी भी रात शुरू हो सकता है और उसकी ऊर्जा बैंक में रहनी चाहिए.

और खाना-पीना सामान्य चलता रहे — हल्का, बार-बार, पानी पूरा. 'दर्द शुरू होने वाले हैं तो खाना बंद' वाली कोई बात नहीं है; शुरुआती प्रसव लंबा दौर है और वह ताक़त माँगता है.

इस सप्ताह क्या करना है

हर हफ़्ते की जाँच — अब उसमें तारीख़ के बाद की योजना भी पूछ लीजिए: आपके डॉक्टर चालीस के बाद कब तक इंतज़ार करते हैं, निगरानी कैसे होगी (CTG, पानी की नाप), और इंडक्शन की बात कब उठेगी. यह बातचीत आज हो जाए तो अगले हफ़्ते के फ़ैसले जाने-पहचाने होंगे.

रोज़ की गिनती और हर 'कुछ अलग' पर फ़ोन — यह दोनों नियम अब जन्म के दिन तक के हैं. आख़िरी हफ़्तों में हलचल का ढंग बदलता है, मात्रा नहीं — यह वाक्य अब आख़िरी बार लिखा जा रहा है; इसे घर की दीवार मान लीजिए.

सिज़ेरियन तय हो (या संभावना हो) तो उसकी सुबह की हिदायतें पहले से समझ लीजिए — कब से भूखा रहना है, कौन सी दवा लेनी-छोड़नी है, कौन साथ जाएगा. तय तारीख़ से पहले दर्द शुरू हों तो सीधा फ़ोन — यह पिछले हफ़्ते की बात यहाँ भी उतनी ही सच है.

और एक आख़िरी नरम काम: पेट के इन आख़िरी दिनों को जी लीजिए. यह अजीब सलाह लग सकती है — पर बहुत माँएँ बाद में कहती हैं कि आख़िरी हफ़्तों की बेचैनी में उन्होंने अलविदा कहना भूल गईं. हाथ रखिए, बात कीजिए, महसूस कीजिए — यह मुलाक़ात अब कुछ ही दिनों की है.

उनतालीसवाँ सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातउनतालीसवें सप्ताह में
मुख्य घटनाफुल टर्म — बच्चा पूरी तरह तैयार
बच्चे का आकार~50 सेंटीमीटर, ~3.2 किलो
घंटीशरीर की अपनी घड़ी — आज रात भी, अगले हफ़्ते भी
डॉक्टर से बाततारीख़ के बाद की योजना — निगरानी, इंडक्शन कब
रोज़ जारीकिक-गिनती; ऊर्जा बैंक में
खानाहल्का, बार-बार — 'बंद करने' वाली कोई बात नहीं
नरम कामपेट के आख़िरी दिनों को जी लेना

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

हलचल कम — उसी समय फ़ोन; यह अब भी पहली पंक्ति है, और तारीख़ के जितना क़रीब, उतनी ज़रूरी. 'उसी घंटे' वाली सूची जस की तस: ताज़ा ख़ून, हरा-भूरा पानी, न थमता दर्द, सिरदर्द-चमक-सूजन-ऊपरी पेट दर्द, बुख़ार.

एक नई पंक्ति इस हफ़्ते से: पानी फूटने के बाद घंटों दर्द न आएँ तो भी अस्पताल में ही रहना है — फूटी थैली के बाद घर लौटने का विकल्प नहीं होता; संक्रमण की घड़ी चालू हो चुकी होती है. यह फ़ैसला अस्पताल का है, आपका नहीं.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

अपनी डिलीवरी की तारीख़ निकालें

आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.

यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: तारीख़ें बीत रही हैं और ग्रीवा बंद है — इंडक्शन पक्का हो गया? — नहीं. ग्रीवा रात भर में इरादा बदल सकती है — बंद से सक्रिय प्रसव तक चौबीस घंटों में पहुँचना आम है. इंडक्शन की बात तारीख़ के बाद की निगरानी से तय होगी, आज की जाँच से नहीं.

सवाल: प्रसव के दौरान घरवाले अंदर रह सकते हैं? — अस्पताल-अस्पताल का नियम है — ज़्यादातर सरकारी लेबर-रूम में नहीं, कई निजी में एक साथी की छूट. यह सवाल इस हफ़्ते की जाँच में पूछकर पक्का कर लीजिए, और जो भी साथ रहे, उसका काम पहले से बाँट दीजिए.

सवाल: दर्द शुरू होने पर सबसे पहले क्या करूँ? — घड़ी देखिए और नाप शुरू कीजिए — बस. फिर वही राह: चाल बनी तो अस्पताल फ़ोन, पानी फूटा तो सीधा फ़ोन, शक हुआ तो भी फ़ोन. नहाना-खाना-बैग — सब उस फ़ोन के जवाब के हिसाब से.

सवाल: बच्चा तारीख़ से पहले आ गया तो सामान अधूरा — क्या-क्या सच में ज़रूरी है? — पहले दिन का सच छोटा है: बच्चे को माँ, दूध और गर्मी चाहिए — तीनों आपके पास हैं. बाक़ी हर चीज़ — कपड़े, डायपर, तेल — अस्पताल के पास की दुकान से भी आ जाती है. सामान की चिंता को कभी अस्पताल जाने में देर की वजह मत बनने दीजिए.

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम