
बच्चा जिस दिन पलटना सीखता है, घर उसी दिन बदल जाना चाहिए. बेबी प्रूफ़िंग एक दिन का काम नहीं — बच्चे के हर नए हुनर के साथ चलने वाले 7 चरण हैं. सबसे अच्छी जाँच: घुटनों के बल चलकर घर को बच्चे की ऊँचाई से देखिए.
पहली बेबी प्रूफ़िंग बिस्तर की है: बच्चा पीठ के बल, सख़्त गद्दे पर, बिना तकिये-भारी कंबल-मुलायम खिलौनों के सोए. झूले-पालने की डोरियाँ और मच्छरदानी की रस्सी बच्चे की पहुँच से बाहर बँधें.
गिरने का पहला ख़तरा उतनी ही जल्दी आता है जितना कोई नहीं सोचता — पलटना बिना बताए शुरू होता है. इसलिए नियम पहले दिन से: बदलने की मेज़, पलंग या सोफ़े पर बच्चा एक सेकंड भी अकेला नहीं. डायपर का सामान हमेशा हाथ की दूरी पर रखिए — 'बस दो क़दम' ही वे दो क़दम होते हैं.
मालिश और नहलाई निचली सतह पर — ज़मीन पर चटाई बिछाकर — सबसे सुरक्षित है. ऊँची जगह की सुविधा गिरने के जोखिम के सामने कुछ नहीं.
जो हाथ में आया, वह मुँह में जाएगा — अगले दो साल का यही क़ानून है. दम घुटने की जाँच सीधी है: जो चीज़ टॉयलेट पेपर के रोल के अंदर से निकल जाए, वह बच्चे के गले में अटक सकती है. सिक्के, बटन, बटन-सेल (सबसे ख़तरनाक — निगलते ही अंदर जलन शुरू), मूँगफली, अंगूर साबुत, खिलौनों के टूटे हिस्से, बिंदी-सेफ़्टी पिन — सब ऊपर.
बड़े भाई-बहन के खिलौने अलग डिब्बे में, ऊँचाई पर — लेगो के टुकड़े और छोटी गाड़ियों के पहिए इस उम्र के सबसे आम ख़तरे हैं. मेहमानों के पर्स (दवाएँ, सिक्के) ज़मीन पर नहीं, हुक पर.
प्लास्टिक की थैलियाँ और ग़ुब्बारे (फूटे हुए भी) दम घुटने के छिपे ख़तरे हैं — बच्चे के कमरे से बाहर ही रहें.
अब घुटनों के बल चलकर घर देखने का समय है. जो दिखे, वह बच्चे को भी दिखेगा — और पहली चीज़ दिखेगी बिजली की सॉकेट. निचली सॉकेटों पर ढक्कन (socket covers) लगाइए या फ़र्नीचर से ढँकिए. लटकते तार — चार्जर, प्रेस, केतली — समेटकर बाँधिए; केतली-प्रेस का तार खींचना जलने की सबसे आम कहानी है.
मेज़-पलंग के नुकीले कोनों पर कॉर्नर गार्ड (या मोटा टेप ही). काँच की मेज़ें और नीची काँच की अलमारियाँ इस दौर में कमरे से हटा देना सबसे सस्ता उपाय है.
दरवाज़ों पर उँगली कटने का ख़तरा शुरू होता है — डोर-स्टॉपर सस्ते हैं और चोट महँगी. और घर के पौधे जाँचिए: कुछ सजावटी पौधे चबाने पर ज़हरीले हैं; जो पहचान में न आएँ, वे ऊँचाई पर.
खड़ा होता बच्चा हर चीज़ पकड़कर उठता है — और जो पकड़ा वह ऊपर आ सकता है. मेज़पोश हटा दीजिए (गर्म चाय समेत पूरा मेज़पोश एक झटके में नीचे आता है). टीवी, बुक-शेल्फ़ और दराज़ों वाली अलमारियाँ दीवार से बाँधिए (anti-tip strap) — चढ़ते बच्चे पर अलमारी पलटना सबसे डरावनी घरेलू दुर्घटनाओं में है.
रसोई अब नियमों की जगह है: गर्म पतीले पीछे के चूल्हे पर, हत्थे अंदर की ओर घूमे हुए; चाकू-काँटे ऊपर की दराज़ में; और सबसे अच्छा — रसोई के दरवाज़े पर गेट या बच्चे के लिए 'रसोई में ज़मीन पर बैठने की अपनी जगह' जहाँ से चूल्हा दूर हो.
सीढ़ियों वाले घर में ऊपर और नीचे — दोनों सिरों पर गेट. बालकनी और छत: रेलिंग की जाली इतनी तंग हो कि सिर न निकले, पास कोई चढ़ने लायक़ स्टूल-गमला न हो, और बालकनी का दरवाज़ा अपने आप बंद हो. खिड़कियों पर ग्रिल या स्टॉपर — खुली खिड़की के पास पलंग-सोफ़ा मत रखिए.
छोटे बच्चे कुछ इंच पानी में भी डूब सकते हैं, और भारतीय घरों में सबसे बड़ा ख़तरा स्विमिंग पूल नहीं — भरी बाल्टी है. नियम पत्थर के: बाल्टी-टब में पानी जमा करके खुला मत छोड़िए; इस्तेमाल के बाद उलटकर रखिए; बाथरूम का दरवाज़ा बाहर से बंद रहे; और नहलाते समय बच्चा पानी के पास एक पल भी अकेला नहीं — दरवाज़े की घंटी और फ़ोन इंतज़ार कर सकते हैं.
पानी की टंकी, कुआँ, घर के पास का नाला — ढक्कन और निगरानी. गाँव-कस्बे के घर में यह सूची और लंबी है: तालाब, हौद, खेत की नाली — बच्चे के घूमने के दायरे में जो भी पानी है, उसका इंतज़ाम सोचिए.
गर्म पानी भी पानी का ख़तरा है: नहलाने का पानी पहले ठंडा डालकर फिर गर्म मिलाइए और कोहनी से जाँचिए; गीज़र का तापमान कम पर सेट रखिए.
ज़हर के मामलों की सूची हर घर की अलमारी में रखी है: दवाएँ, फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर, मच्छर का लिक्विड, चूहे की दवा, केरोसीन, ऐसिड. नियम एक ही है: यह सब बच्चे की पहुँच और नज़र से बाहर — ऊँची, बंद (हो सके तो ताले वाली) अलमारी में, अपनी असली बोतल में.
सबसे आम ग़लती: पीने की बोतल में रखा केरोसीन या फिनाइल. रंगीन बोतल में रखी चीज़ बच्चे के लिए शरबत है — कभी मत कीजिए. दवाएँ 'विटामिन की गोली मीठी है' कहकर मत खिलाइए — दवा को टॉफ़ी बताना बच्चे को अलमारी तक खुद पहुँचने की ट्रेनिंग है.
कुछ हो जाए तो: उल्टी कराने की कोशिश मत कीजिए (कुछ चीज़ें लौटते हुए दोबारा जलाती हैं), मुँह में उँगली मत डालिए — जो निगला है उसकी बोतल लेकर सीधे अस्पताल चलिए और डॉक्टर को बोतल दिखाइए.
अब बेबी प्रूफ़िंग सामान से आगे बढ़कर आदतों की होती है. दरवाज़े का नियम: मुख्य दरवाज़ा हमेशा बंद/चिटकनी ऊपर वाली; बच्चे के अकेले सड़क तक पहुँचने का हर रास्ता जाँचिए. जूते-चप्पल की जगह, सीढ़ी, स्टोर रूम — चढ़ने लायक़ हर चीज़ पर नज़र.
बड़ों की चीज़ों के नियम भी अब बनते हैं: गर्म चाय का कप बच्चे की पहुँच वाली मेज़ पर नहीं; अगरबत्ती-दीया ऊँचाई पर और जलता हुआ अकेला नहीं; माचिस-लाइटर ऊपर; पूजा का कपूर (खाने की चीज़ जैसा दिखता है, बेहद ज़हरीला) बंद डिब्बे में.
और आख़िरी बात, जो सब चरणों के ऊपर है: कोई भी सामान निगरानी की जगह नहीं लेता. सॉकेट कवर और गेट समय ख़रीदते हैं — नज़र का विकल्प नहीं हैं. घर के सब बड़ों — दादा-दादी, मदद करने वाले — को यही सूची पता हो, क्योंकि बच्चा उस कमरे में चोट खाता है जहाँ 'कोई तो देख रहा होगा' चल रहा था.
तुरंत अस्पताल: कुछ भी निगल लेना (दवा, सफ़ाई का सामान, बटन-सेल — बटन-सेल में मिनट गिनती हैं), बिजली का झटका, डूबने से बचना (बाद में ठीक दिखने पर भी दिखाइए), सिर की चोट के बाद उल्टी-बेहोशी-असामान्य नींद, जलने पर फफोला बड़ा हो या चेहरे-हाथ-जननांग पर हो, और गिरने के बाद हाथ-पैर हिलाने से रोना या टेढ़ापन.
108 एम्बुलेंस का नंबर और नज़दीकी अस्पताल का रास्ता घर के सब बड़ों को पता हो. फ़र्स्ट-एड का डिब्बा — पट्टी, एंटीसेप्टिक, पैरासिटामोल, ORS — घर में एक तय जगह पर.
यह लेख सामान्य जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं — यह आपके डॉक्टर की निजी सलाह की जगह नहीं ले सकता. अपने या अपने बच्चे की सेहत से जुड़ा कोई भी फ़ैसला डॉक्टर से पूछकर ही लें.
सवाल: बेबी प्रूफ़िंग का सामान महँगा है. कम ख़र्च में सबसे ज़रूरी क्या? — सबसे ज़्यादा जानें बचाने वाली चीज़ें सबसे सस्ती हैं: सॉकेट कवर, दरवाज़े का स्टॉपर, और अलमारी-टीवी की दीवार से बँधाई. उससे भी सस्ता: छोटी चीज़ें ऊपर, बाल्टी उलटी, दवाएँ बंद — यह सब मुफ़्त है. गेट एक ही ख़रीदना हो तो रसोई या सीढ़ी के लिए.
सवाल: संयुक्त परिवार में दादा-दादी की दवाएँ हर मेज़ पर रहती हैं. — यह भारतीय घरों का सबसे आम ज़हर-जोखिम है — बीपी-शुगर की गोलियाँ बच्चे के लिए सबसे ख़तरनाक दवाओं में हैं. दादा-दादी को एक बंद डिब्बा दीजिए जो ऊँचाई पर रहे, और रोज़ की गोली निकालकर बची पत्ती तुरंत डिब्बे में जाए. 'सिरहाने की दवा' की आदत बदलना कठिन है — डिब्बे को सिरहाने की दराज़ में रखना बीच का रास्ता है.
सवाल: वॉकर सुरक्षित है या नहीं? — पहियों वाला वॉकर बाल-रोग विशेषज्ञ लंबे समय से मना करते हैं — वह बच्चे को उस रफ़्तार और उन जगहों (सीढ़ी, चूल्हा) तक पहुँचा देता है जहाँ उसके अपने पैर कभी नहीं पहुँचते, और चलना सीखने में मदद भी नहीं करता. बिना पहियों वाली खड़े होने की activity-table बेहतर विकल्प है.
सवाल: कौन-सी उम्र में बेबी प्रूफ़िंग हटा सकते हैं? — ज़्यादातर चीज़ें तीन-चार साल तक काम की रहती हैं, फिर नियम सामान की जगह लेते हैं. दवा-ज़हर की बंद अलमारी और पानी के नियम कभी नहीं हटते — वे बड़े बच्चे के लिए भी उतने ही ज़रूरी हैं.
सवाल: किराये के घर में दीवार में छेद नहीं कर सकते — अलमारी कैसे बाँधें? — बिना ड्रिल वाले विकल्प हैं: भारी सामान सबसे नीचे की दराज़ में रखकर अलमारी का वज़न नीचे लाइए, चढ़ने का न्योता देने वाली चीज़ें (टीवी के पास खिलौना) हटाइए, और सबसे डगमग फ़र्नीचर उस कमरे से ही हटा दीजिए जहाँ बच्चा खेलता है. टीवी दीवार पर टँगा न हो तो नीची, चौड़ी, भारी मेज़ पर पीछे धकेलकर रखिए.
इस पन्ने का हर चिकित्सकीय आँकड़ा नीचे दी गई गाइडलाइनों से लिया गया है. आपके डॉक्टर की बात अलग हो तो पूछिए कि वे कौन-सी गाइडलाइन मानते हैं.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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