
वार करते-करते हाथ अब पकड़ना सीख रहा है — हथेली तक आई चीज़ अब क़ैद होती है, और सीधे मुँह जाती है. और मुँह से इस हफ़्ते की दूसरी ख़बर बहती है: लार, बाल्टी भर.
इस हफ़्ते हथेली की खुली मुट्ठी अपना काम समझ जाती है — जो चीज़ छू गई, वह पकड़ी जाएगी; और जो पकड़ी गई, वह मुँह जाएगी. झुनझुना, आपका दुपट्टा, आपके बाल, आपकी नाक — सूची में सब है.
साथ ही ठोड़ी पर बाढ़ है — लार इतनी कि दिन में कई बिब भीगें. घर का पहला फ़ैसला आता है: 'दाँत आ रहे हैं!' अक्सर अभी नहीं — तीन महीने के आसपास लार-ग्रंथियाँ पूरी ताक़त से जागती हैं, और निगलने का अभ्यास पीछे चलता है. दाँत आमतौर पर छठे महीने के आसपास की कहानी हैं.
दोनों ख़बरें एक ही तैयारी माँगती हैं — जो भी पहुँच में है, वह धुला हो, बड़ा हो, और मुलायम किनारों वाला. मुँह की प्रयोगशाला अब पूरे शबाब पर है.
पकड़: हथेली में आई चीज़ अब जकड़ी जाती है और खींचने पर विरोध भी होता है — ताक़त हैरान करने लायक़ है. ख़ुद बढ़कर सटीक पकड़ना अभी अगले पड़ाव (3-4 महीने) की बात है; अभी 'छुआ सो पकड़ा' का दौर है.
दोनों हाथ बीच में मिलने लगे हैं — छाती के ऊपर उँगलियाँ आपस में खेलती हैं. यह 'मिडलाइन' का मिलन दिमाग़ के दोनों हिस्सों की दोस्ती की निशानी है — आगे ताली, चम्मच, लिखाई — सबकी जड़ यही है.
लार की बाढ़ का इंतज़ाम: नरम सूती बिब/कपड़ा, ठोड़ी-गर्दन की तहें दिन में पोंछकर सूखी (नहीं तो लाल चकत्ते), और रगड़ना नहीं — थपकना. लार अपने आप में अच्छी चीज़ है — मुँह की सफ़ाई और पाचन दोनों की तैयारी.
नींद का ढाँचा और साफ़ — रात की लंबी खेप + दिन की 3-4 झपकियाँ. शाम की एक 'चिड़चिड़ी घड़ी' अब भी रह सकती है; वह कोलिक की वापसी नहीं, दिन भर की थकान का हिसाब है — जल्दी सुलाना ही इलाज है.
तीन महीने क़रीब हैं — और इस पड़ाव पर माँओं के मन में एक सवाल अक्सर चुपचाप बैठा होता है: 'मेरा शरीर/मन/घर अब भी पहले जैसा क्यों नहीं?' जवाब: तीन महीने 'चौथी तिमाही' कहलाते हैं — गर्भ की ही अवधि का चौथा हिस्सा. वह आज पूरा हो रहा है; हिसाब अब से हल्का होता है.
दूध की पम्पिंग शुरू की हो तो भंडार की गिनती पर मत जाइए — फ़्रीज़र भरने की होड़ बेकार का तनाव है. काम पर लौटने की तारीख़ से हफ़्ता भर पहले का भंडार काफ़ी शुरुआत है; बाक़ी रोज़ का रोज़ बनता जाएगा.
और एक याद — आप दोनों की (पति-पत्नी की) बातचीत में बच्चे के अलावा का एक विषय हफ़्ते में एक बार तो लौटे. दस मिनट की चाय, बालकनी, बिना फ़ोन. तीन महीने के घर में यह विलासिता नहीं, मरम्मत है.
पकड़ने-चूसने वाले खिलौनों की टोकरी तैयार — धुले झुनझुने, सूती कपड़े का टुकड़ा, आगे के लिए टीदर. रोज़ धुलाई-सुखाई की रस्म भी साथ. (और सूची से बाहर की चीज़ें भी तय — चाबियाँ, फ़ोन, सिक्के: मुँह-यात्रा के दिनों में ये गोद की दुनिया से बाहर रहें.)
बिब/मुलायम कपड़ों का स्टॉक बढ़ाइए और ठोड़ी-गर्दन की तहों की जाँच नहाते समय रोज़ — लाली दिखे तो सुखाकर, डॉक्टर से पूछा हुआ मलहम ही.
14-सप्ताह के टीके अगले हफ़्तों में — तीसरी और (पहले चरण की) आख़िरी बड़ी मुलाक़ात. तारीख़ पक्की?
'चौथी तिमाही पूरी' के मौक़े की एक तस्वीर-रस्म बनती है — पहले दिन वाली जगह पर वही पोज़. बदलाव ख़ुद बोलेगा.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | ग्यारहवें सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | 'छुआ सो पकड़ा' — और सीधा मुँह की ओर |
| दूसरी घटना | लार की बाढ़ — ग्रंथियाँ जागीं; दाँत अभी दूर |
| नई निशानी | दोनों हाथ बीच में मिलते हैं (मिडलाइन) |
| इंतज़ाम | धुले-बड़े खिलौने; बिब; तहें सूखी |
| नींद | रात की खेप + 3-4 झपकियाँ; शाम जल्दी सुलाना |
| क़रीब | 14-सप्ताह के टीके — पहले चरण की आख़िरी क़तार |
| माँ | चौथी तिमाही पूरी — हिसाब अब हल्का |
पक्की सूची — तीन महीने से छोटे का बुख़ार, दूध छोड़ना, तेज़ साँस, सुस्ती, झटके: उसी समय अस्पताल. छोटी चीज़ों (5 सेमी से कम) की पहुँच-पाबंदी अब घर का स्थायी क़ानून है.
लार के साथ की घंटी अलग से: लार + दूध पीने में तकलीफ़/रोना + बुख़ार + मुँह खोलने में दिक़्क़त — यह जोड़ी सिर्फ़ लार नहीं है (मुँह-गले का संक्रमण हो सकता है); उसी दिन दिखाइए.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
उम्र, लिंग और वज़न या लंबाई डालें — विश्व स्वास्थ्य संगठन के चार्ट का पर्सेंटाइल मिलेगा. याद रहे: एक नाप नहीं, नापों की चाल मायने रखती है.
सवाल: पकड़कर सब मुँह में डालता है — रोकूँ? — मत रोकिए; इंतज़ाम कीजिए. मुँह इस उम्र का सबसे तेज़ 'सेंसर' है — बनावट, तापमान, आकार सब वहीं परखा जाता है. आपका काम सूची तय करना है (धुला-बड़ा-मुलायम), बच्चे का काम परखना.
सवाल: लार से ठोड़ी लाल हो गई है — क्या लगाएँ? — पहले बचाव: नरम कपड़े से थपककर सूखा, बार-बार. लाली पर घी-बोरोलिन-पाउडर अपने मन से नहीं; ज़रूरत लगे तो डॉक्टर से पूछा हुआ बैरियर-मलहम (पेट्रोलियम जेली सरीखा) पतली परत में.
सवाल: बायाँ-दायाँ — एक ही हाथ ज़्यादा चलता दिखता है; अभी से लेफ़्टी? — इस उम्र में हाथ की 'पसंद' पक्की नहीं होती — और लगातार एक ही तरफ़ का इस्तेमाल + दूसरी तरफ़ का बिल्कुल न चलना हो, तो वह पसंद नहीं, जाँच की बात है (उसी हफ़्ते डॉक्टर). दोनों हाथ बारी-बारी चलते हों तो सब सामान्य.
सवाल: तीन महीने से पहले नज़र उतारने/काला टीका लगाने पर घर अड़ा है — नुक़सान तो नहीं? — माथे-गाल का काला टीका नुक़सान नहीं करता — लगाइए, घर की ख़ुशी है. लक्ष्मण-रेखा दो ही हैं: आँख के अंदर काजल नहीं (संक्रमण-सीसे का जोखिम), और नज़र के नाम पर कोई पिलाने-खिलाने वाला नुस्ख़ा नहीं.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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