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गर्भावस्था का चौबीसवाँ सप्ताह: जीवन-क्षमता की दहलीज़ और शुगर की जाँच

गर्भावस्था · theAsianparent · अपडेट किया गया

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गर्भावस्था का चौबीसवाँ सप्ताह: जीवन-क्षमता की दहलीज़ और शुगर की जाँच

आज से डॉक्टरी किताबें बच्चे को 'वायबल' कहती हैं — बाहर की दुनिया में जी सकने की दहलीज़ पर. और इसी हफ़्ते से वह जाँच खुलती है जो चुपचाप चढ़ने वाली गर्भ-शुगर को पकड़ती है.

दहलीज़ का हफ़्ता

चौबीस सप्ताह प्रसूति-विज्ञान की एक बड़ी लकीर है — 'वायबिलिटी' यानी जीवन-क्षमता की दहलीज़. इसका मतलब: अगर आज जन्म हो जाए, तो NICU की पूरी मदद से बच्चे के बचने की सचमुच की संभावना बनती है, और हर अगला हफ़्ता उस संभावना को तेज़ी से बढ़ाता है.

यह जानकारी डराने के लिए नहीं है — भरोसे के लिए है. इसका व्यावहारिक मतलब सिर्फ़ इतना है कि समय से पहले के प्रसव के लक्षणों को अब और भी गंभीरता से लेना है, और डिलीवरी ऐसे अस्पताल में सोचनी है जहाँ नवजात-देखभाल का इंतज़ाम हो.

दूसरा पड़ाव इसी हफ़्ते से — शुगर की जाँच (GTT). गर्भ की शुगर बिना लक्षण चढ़ती है, और अनदेखी रह जाए तो बच्चे का वज़न ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ाकर प्रसव कठिन करती है. जाँच ही उसका एकमात्र पहरा है.

इस सप्ताह आपका बच्चा

बच्चा अब भुट्टे जितना — तीस सेंटीमीटर, वज़न छह सौ ग्राम की ओर. चेहरा पूरा बन चुका है — पलकों-भौंहों समेत; अब वह 'कैसा दिखेगा' का जवाब बन चुका है, बस दुनिया को दिखना बाक़ी है.

भीतरी कान का संतुलन-यंत्र काम पर लग गया है — बच्चा अब जानता है कि वह सीधा है या उल्टा, और पानी में क़लाबाज़ियों के साथ इस यंत्र की कसरत भी चलती है.

फेफड़ों में हवा की थैलियों की शाखाएँ बन रही हैं और सर्फ़ैक्टेंट की मात्रा बढ़ रही है — बाहर की दुनिया की तैयारी का सबसे ज़रूरी काम अब यही है.

आपके शरीर में बदलाव

GTT की जाँच ऐसे चलती है: भूखे पेट पहला ख़ून, फिर ग्लूकोज़ का मीठा घोल, फिर तय समय पर ख़ून (केंद्र के तरीक़े के हिसाब से एक या दो बार और). कुल दो-तीन घंटे — किताब या फ़ोन साथ ले जाइए.

घोल बहुत मीठा लगता है और कुछ महिलाओं को मतली देता है — धीरे-धीरे पीने की छूट माँग लीजिए. जाँच के बीच टहलना-खाना मना है; बैठकर इंतज़ार ही जाँच का हिस्सा है.

नतीजा सीमा से ऊपर आए तो पहली बात: यह आपकी ग़लती नहीं है — गर्भ के हॉर्मोन ही इंसुलिन के ख़िलाफ़ काम करते हैं, और कुछ शरीरों में पलड़ा उधर झुक जाता है. ज़्यादातर मामले खाने के हिसाब और सैर से सँभल जाते हैं; कुछ में दवा या इंसुलिन जुड़ता है. सँभला हुआ शुगर वाला गर्भ लगभग हमेशा ठीक से पार लगता है — बिना सँभला ही दिक़्क़त करता है.

इस सप्ताह क्या करना है

GTT करा लीजिए — यही इस हफ़्ते का काम नंबर एक है. रिपोर्ट उसी दिन या अगले दिन मिलती है; डॉक्टर को दिखाए बिना उसका मतलब ख़ुद मत निकालिए.

हलचलों की पहचान अब गहरी कर लीजिए — किस समय बच्चा सबसे ज़्यादा बोलता है, किस करवट पर आपको सबसे साफ़ महसूस होता है. अट्ठाईसवें सप्ताह से रोज़ की गिनती शुरू होगी; उसकी बुनियाद यही पहचान है.

अस्पताल के काग़ज़ों की एक थैली बना लीजिए — MCP कार्ड, सारी रिपोर्टें, आधार, अस्पताल का कार्ड, बीमा/योजना के काग़ज़. यह थैली अब से घर में एक तय जगह रहेगी और अस्पताल के हर चक्कर में साथ जाएगी.

पानी, सैर, करवट की नींद, आयरन-कैल्शियम — पुरानी आदतों की गाड़ी चलती रहे. तीसरी तिमाही की दहलीज़ चार हफ़्ते दूर है; ये आदतें ही उसे आसान बनाती हैं.

चौबीसवाँ सप्ताह: एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातचौबीसवें सप्ताह में
मुख्य घटनाजीवन-क्षमता की दहलीज़; GTT की खिड़की खुली
बच्चे का आकारभुट्टे जितना — 30 सेंटीमीटर, ~600 ग्राम
बन रहा हैफेफड़ों की थैलियाँ, सर्फ़ैक्टेंट, संतुलन-यंत्र
जाँचGTT — भूखा पेट, मीठा घोल, 2-3 घंटे
नतीजा ऊपर आए तोआपकी ग़लती नहीं; खाना-सैर-दवा से सँभलता है
घर का इंतज़ामकाग़ज़ों की एक थैली — तय जगह, हर चक्कर में साथ
चार हफ़्ते दूरतीसरी तिमाही — और रोज़ की किक-गिनती

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

पुरानी सूची पूरी ताक़त से लागू — और 'पेट का नियमित लय में कसना, पीठ का लहरों वाला दर्द, पानी जैसा स्राव' अब सबसे ऊपर: चौबीस सप्ताह के बाद समय से पहले प्रसव के हर लक्षण की जाँच उसी दिन होनी चाहिए. देर इस सूची की सबसे महँगी ग़लती है.

GTT टालने का मन बहुत महिलाओं का करता है — 'मुझे तो कुछ महसूस नहीं होता'. यही इस बीमारी की चाल है: गर्भ-शुगर के ज़्यादातर मामलों में कोई लक्षण नहीं होता. महसूस होने का इंतज़ार मत कीजिए; जाँच का यही काम है.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

अपनी डिलीवरी की तारीख़ निकालें

आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.

यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

GTT में घोल पीते ही उल्टी हो गई

अब? — केंद्र को बताइए; उल्टी जल्दी हो जाए तो जाँच उस दिन अधूरी मानी जाती है और दूसरी तारीख़ मिलती है. अगली बार घोल ठंडा और धीरे-धीरे पीने से ज़्यादातर निकल जाता है.

घर के ग्लूकोमीटर से जाँच कर लूँ तो नहीं चलेगा?

नहीं. गर्भ-शुगर की पहचान तय घोल और तय समय की प्रयोगशाला-जाँच से ही होती है; घर की मशीन उस पैमाने की जगह नहीं ले सकती. हाँ, शुगर निकल आए तो घर की मशीन निगरानी में काम आती है — वह अलग भूमिका है.

शुगर निकली तो क्या मिठाई हमेशा के लिए बंद?

नहीं — हिसाब बदलता है, ज़िंदगी नहीं. खाने का ढंग (थोड़ा-थोड़ा, रेशे के साथ, मीठा नपा हुआ), रोज़ की सैर, और नियमित निगरानी — ज़्यादातर के लिए इतना ही इलाज है. और प्रसव के बाद ज़्यादातर की शुगर सामान्य लौट आती है — बस आगे के सालों में जाँच कराते रहना होता है.

चौबीस सप्ताह की 'दहलीज़' सुनकर डर बढ़ गया है

यह सोचूँ ही क्यों? — मत सोचिए — यह डॉक्टरों की लकीर है, आपकी नहीं. आपके लिए इसका कुल मतलब दो हिदायतें हैं: ख़तरे के लक्षण उसी दिन दिखाइए, और डिलीवरी नवजात-सुविधा वाले अस्पताल में रखिए. बाक़ी छत्तीस हफ़्तों की कहानी वैसी ही चल रही है जैसी चलनी चाहिए.

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स्रोत

इस पन्ने का हर चिकित्सकीय आँकड़ा नीचे दी गई गाइडलाइनों से लिया गया है. आपके डॉक्टर की बात अलग हो तो पूछिए कि वे कौन-सी गाइडलाइन मानते हैं.

  1. WHO. WHO recommendations on antenatal care for a positive pregnancy experience (2016)
    Backs the recommendation that gestational diabetes screening (GTT) is a standard component of antenatal care, and that regular monitoring of fetal movements and iron/calcium supplementation are part of routine pregnancy management.
  2. ICMR. ICMR Guidelines for Management of Type 2 Diabetes (GDM chapter) / Diagnosis and Management of Gestational Diabetes Mellitus: Technical and Operational Guidelines (2018)
    Supports the claim that gestational diabetes is caused by placental hormones antagonising insulin, that most cases are asymptomatic and detectable only by laboratory screening, and that well-controlled GDM results in good pregnancy outcomes.
  3. MoHFW. Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan (PMSMA) — Antenatal Care Operational Guidelines (2016)
    Supports the advice to maintain an MCP (Mother and Child Protection) card and carry all antenatal documents to every hospital visit, and that iron-calcium supplementation should continue through pregnancy.
  4. NICE. Preterm labour and birth (NICE guideline NG25) (2022)
    Supports the instruction to seek same-day assessment for signs of preterm labour (regular uterine tightening, wave-like back pain, watery vaginal discharge) after 24 weeks, and the recommendation that delivery should occur at a centre with neonatal care facilities.

समीक्षा

  • Nakul Phatak — सीईओ, theAsianparent इंडिया और इंडोनेशिया
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni Chugani — मार्केटिंग प्रमुख, theAsianparent इंडिया और सिंगापुर
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम