
हर ज़रूरी अंग अब जगह ले चुका है — आगे के महीने बनाने के नहीं, बढ़ाने और माँजने के हैं. और आपकी मतली अब चोटी पर है, जिसका दूसरा मतलब है: यहाँ से उतार है.
निर्माण की भाषा में कहें तो ढाँचा खड़ा हो गया है. नौवें सप्ताह के आख़िर तक हर बड़ा अंग — दिल, दिमाग़, फेफड़े, गुर्दे, जिगर, आँतें — या तो बन चुका है या बनने के बिल्कुल आख़िरी दौर में है.
यही वजह है कि पहले के ये हफ़्ते दवा-धुएँ-शराब को लेकर इतने सख़्त थे — बनते हुए अंग ही सबसे नाज़ुक होते हैं. अगले महीनों में बच्चा मुख्यतः बढ़ेगा, और नुक़सान की खिड़कियाँ एक-एक कर बंद होती जाएँगी.
आपके लिए भी यह मोड़ का हफ़्ता है — मतली की चोटी अक्सर यहीं आती है. चोटी शब्द ग़ौर से पढ़िए: इसके बाद ढलान है. बारहवें से चौदहवें सप्ताह तक ज़्यादातर महिलाओं का जी ठिकाने आने लगता है.
बच्चा — अब उसे यही कहना ठीक है — अंगूर के दाने जितना है, क़रीब सवा दो सेंटीमीटर, और उसका वज़न क़रीब दो ग्राम. सिर अब भी शरीर का लगभग आधा है; अनुपात आगे के महीनों में सुधरता जाएगा.
कोहनी और घुटने मुड़ने लगे हैं, और हरकतें अब झटकों से आगे बढ़कर तैराकी जैसी हो रही हैं. उँगलियाँ लगभग अलग हो चुकी हैं; उनके सिरों पर नाख़ूनों की पहली परत की तैयारी है.
दिल चार खानों में बँट चुका है और मिनट में 160-170 बार धड़क रहा है. जननांग बनने शुरू हो गए हैं — पर स्कैन पर महीनों तक कुछ पता नहीं चलता, और भारत में उसे जाँचना-बताना दोनों अपराध हैं.
कमर का घेरा चुपचाप बढ़ रहा है — पेट 'दिखने' में अभी हफ़्ते हैं, पर पुराने कपड़ों की कसावट पहला सबूत दे देती है. यह गर्भाशय से ज़्यादा हॉर्मोन से फूला पेट है — दोनों का हिसाब आगे बदलेगा.
थकान अब भी गहरी है और मन का मौसम बदलता रहता है — एक अच्छी ख़बर के भीतर भी रोना आ सकता है. यह प्रोजेस्टेरोन की करतूत है, आपके स्वभाव की नहीं.
कुछ महिलाओं को इस दौर में सिरदर्द बढ़ता है — हॉर्मोन, नींद की कमी और भूख के अंतराल, तीनों मिलकर. पहला इलाज पानी और समय पर खाना है; दवा सिर्फ़ डॉक्टर की बताई — गर्भ में दर्द की हर गोली सुरक्षित नहीं होती.
डेटिंग स्कैन और पहली जाँचें अगर हो चुकी हैं, तो इस हफ़्ते का बड़ा काम एक ही है: NT स्कैन की तारीख़ बुक करना. उसकी खिड़की ग्यारह से तेरह सप्ताह छह दिन की है — निकल गई तो वह जाँच फिर हो ही नहीं सकती.
खान-पान में अब कैल्शियम पर भी नज़र — दिन में दो बार दूध-दही-पनीर में से कुछ. दूध न भाए (इन दिनों आम है) तो दही-छाछ से काम लें; डॉक्टर कैल्शियम की गोली भी दूसरी तिमाही से अक्सर जोड़ते हैं.
हल्की कसरत शुरू करने का यह अच्छा समय है — रोज़ बीस-तीस मिनट की चहलक़दमी सबसे सुरक्षित और सबसे परखी हुई है. जो कसरत पहले से करती आई हैं, वह डॉक्टर से पूछकर जारी रखें; नई और भारी चीज़ शुरू करने का समय यह नहीं.
दाँतों की एक जाँच इन्हीं हफ़्तों में करा लें. गर्भ में मसूड़ों से ख़ून आना आम है, और मसूड़ों का संक्रमण गर्भ के लिए भी ठीक नहीं. दाँत के डॉक्टर को 'गर्भवती हूँ' बताना न भूलें — एक्स-रे और कुछ दवाएँ टाली जाएँगी.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | नौवें सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | हर बड़ा अंग बन चुका — अब बढ़ने का दौर |
| बच्चे का आकार | अंगूर के दाने जितना — क़रीब 2.2 सेंटीमीटर, 2 ग्राम |
| दिल | चार खाने, मिनट में 160-170 धड़कनें |
| आपके मुमकिन लक्षण | मतली की चोटी, थकान, सिरदर्द, कसते कपड़े |
| बुक करना है | NT स्कैन — खिड़की 11 से 13+6 सप्ताह, फिर नहीं |
| खाने में नया | कैल्शियम — दिन में दो बार दूध-दही-पनीर में से कुछ |
| चलता रहे | फ़ोलिक एसिड, आयरन (डॉक्टर के बताए अनुसार), रोज़ की सैर |
रक्तस्राव-मरोड़ की हिदायत हर हफ़्ते जैसी — उसी दिन डॉक्टर. सिरदर्द अगर असहनीय हो, आँखों के आगे चमक या धुँधलापन हो, तो वह सामान्य गर्भ-सिरदर्द नहीं है — उसी दिन दिखाएँ.
मतली अगर नौवें सप्ताह में भी पानी तक न टिकने दे रही है और वज़न गिर रहा है, तो अब यह 'सह लेने' की चीज़ नहीं रही. हाइपरएमेसिस का इलाज है — ग्लूकोज़, सुरक्षित दवाएँ — और उसे लेने में कोई हार नहीं है.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.
यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.
सवाल: मतली अचानक कम हो गई — कुछ गड़बड़ तो नहीं? — अक्सर नहीं. लक्षण किसी भी हफ़्ते अपने आप हल्के हो सकते हैं, ख़ासकर नौवें-दसवें से. लक्षण घटने के साथ रक्तस्राव या दर्द हो, तब डॉक्टर को बताएँ — सिर्फ़ मतली का जाना अच्छी ख़बर ही ज़्यादा है.
सवाल: घर के काम — झाड़ू-पोछा, सिलबट्टा — करना ठीक है? — हाँ, जो शरीर सहज करे वह सब. बस झटके से उठना-बैठना कम करें, भारी वज़न उठाने से बचें और थकें तो रुक जाएँ. घर का काम कसरत में गिनती है, सज़ा में नहीं.
सवाल: सोने का सही तरीक़ा कौन सा है? — इन हफ़्तों में जो आराम दे वही. करवट की सख़्ती दूसरी तिमाही से शुरू होती है, जब बायीं करवट रक्त-संचार के लिए बेहतर मानी जाती है. अभी से आदत डालनी हो तो अच्छा ही है.
सवाल: NT स्कैन क्या जाँचता है और क्या वह ज़रूरी है? — वह बच्चे की गर्दन के पीछे की झिल्ली की मोटाई नापता है और ख़ून की जाँच (डबल मार्कर) के साथ मिलकर गुणसूत्रों की गड़बड़ी की *संभावना* बताता है — निदान नहीं. कराना है या नहीं, यह समझकर लिया गया आपका फ़ैसला है; पर खिड़की निकलने के बाद विकल्प नहीं बचता, इसलिए फ़ैसला अभी लें.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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