
गिनती के हिसाब से यह दूसरा सप्ताह है, पर असली घटना इसके आख़िर में होती है — अंडा निकलता है. गर्भ ठहरना है तो यही सप्ताह काम का है.
माहवारी ख़त्म हो चुकी है और शरीर बिना बताए अगले काम पर लग गया है. गर्भाशय की नई परत रोज़ मोटी हो रही है, और अंडाशय में एक अंड-कोश बाक़ियों से आगे निकलकर पक रहा है.
इस सप्ताह के आख़िर में — 28 दिन के चक्र में क़रीब 14वें दिन — वह अंडा निकलेगा. यही ओव्यूलेशन है, और गर्भ ठहरने की पूरी कहानी इसी एक-दो दिन के आसपास घूमती है.
गिनती की विचित्रता यहाँ भी याद रखें: काग़ज़ पर यह गर्भावस्था का दूसरा सप्ताह है, पर गर्भ अभी भी ठहरा नहीं है. वह इस सप्ताह के आख़िर या अगले की शुरुआत में ठहरेगा — और तब भी काग़ज़ कहेगा कि आपको दो सप्ताह हो चुके हैं.
बच्चा अभी भी नहीं बना है, पर उसका आधा हिस्सा — अंडा — इस सप्ताह अपने सबसे तैयार रूप में है. पकने के बाद वह अंडाशय से निकलकर डिंबवाही नली (फैलोपियन ट्यूब) में आता है और वहाँ 12 से 24 घंटे इंतज़ार करता है.
इसी खिड़की में शुक्राणु मिले तो निषेचन होता है — यानी गर्भ ठहरता है. शुक्राणु शरीर में पाँच दिन तक टिक सकते हैं, इसलिए अंडा निकलने से पहले के दिन भी गिनती में हैं.
बच्चा लड़का होगा या लड़की, यह इसी पल तय हो जाता है — शुक्राणु के X या Y गुणसूत्र से. यानी यह पिता की ओर से तय होता है, और इसमें किसी का कोई बस नहीं. यह बात घर में साफ़ रहे, तो आगे बहुत सी बेकार बातों से बचाव होता है.
अंडा निकलने के आसपास शरीर इशारे देता है. सबसे भरोसेमंद है गर्भाशय-ग्रीवा का स्राव — इन दिनों वह अंडे की सफ़ेदी जैसा पतला, फिसलने वाला और उँगलियों के बीच खिंचने वाला हो जाता है.
कुछ महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में एक तरफ़ हल्की चुभन महसूस होती है, कुछ को स्तनों में भारीपन. और बहुतों को कुछ भी महसूस नहीं होता — वह भी उतना ही सामान्य है.
इच्छा भी इन दिनों अपने आप बढ़ती है — शरीर का अपना इंतज़ाम है. जोड़े के लिए इन दिनों का सीधा मतलब है: हर दो-तीन दिन में संबंध, बिना घड़ी-कैलेंडर के दबाव के.
फ़ोलिक एसिड रोज़ चलता रहे — यही वह सप्ताह है जिसके लिए वह पहले से शुरू किया था. गर्भ ठहरते ही जो नली बननी शुरू होती है, उसके लिए फ़ोलिक एसिड शरीर में पहले से होना चाहिए.
अनुकूल दिनों का हिसाब लगाना हो तो ओव्यूलेशन कैलकुलेटर से निकालें — पर उसे अंदाज़ा ही मानें. चक्र अनियमित हो तो स्राव का इशारा कैलेंडर से ज़्यादा सच बोलता है.
इन दिनों चिकनाई (लुब्रिकेंट) की ज़रूरत लगे तो ध्यान रखें — कई लुब्रिकेंट शुक्राणुओं की चाल धीमी करते हैं. कोशिश के महीनों में इनसे बचना या 'स्पर्म-फ़्रेंडली' लिखा हुआ ही लेना बेहतर है.
दोनों का खान-पान सादा और पूरा रहे — दाल, हरी सब्ज़ी, मौसमी फल, दूध. कोई 'गर्भ ठहराने वाला' चूर्ण, कैप्सूल या नुस्ख़ा नहीं — इनमें से किसी का प्रमाण नहीं है और कुछ नुक़सान भी करते हैं.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. चक्र की लंबाई के हिसाब से दिन आगे-पीछे होते हैं.
| बात | दूसरे सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | सप्ताह के आख़िर में ओव्यूलेशन — अंडा निकलना |
| अंडे की उम्र | निकलने के बाद सिर्फ़ 12–24 घंटे |
| शुक्राणु की उम्र | शरीर में 5 दिन तक — इसलिए पहले के दिन भी गिनती में |
| सबसे अनुकूल दिन | ओव्यूलेशन से दो दिन पहले और उसी दिन |
| शरीर का इशारा | अंडे की सफ़ेदी जैसा खिंचने वाला स्राव |
| चलता रहे | फ़ोलिक एसिड 400 माइक्रोग्राम रोज़ |
| इनसे दूरी | तंबाकू, शराब, अपने मन की दवा, बिना प्रमाण के नुस्ख़े |
इस सप्ताह भी आपात जैसा कुछ नहीं है. पर ओव्यूलेशन के आसपास एक तरफ़ का दर्द हर बार तेज़ और असहनीय होता हो, या इन दिनों रक्तस्राव होता हो, तो एक बार स्त्री-रोग विशेषज्ञ को दिखा लें — सिस्ट या संक्रमण जैसी वजहें जाँचने लायक़ हैं.
और याद दिलाना ज़रूरी है: ओव्यूलेशन की पट्टियाँ PCOS में बार-बार झूठी पॉज़िटिव आती हैं. महीनों पट्टियाँ पॉज़िटिव आ रही हों और गर्भ न ठहर रहा हो, तो पट्टियों पर पैसा लगाते रहने की जगह डॉक्टर से मिलें.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.
यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.
सवाल: ओव्यूलेशन ठीक 14वें दिन ही होता है? — सिर्फ़ 28 दिन के चक्र में. असल नियम है — अगली माहवारी से क़रीब 14 दिन पहले. 32 दिन का चक्र हो तो ओव्यूलेशन क़रीब 18वें दिन होगा.
सवाल: गर्भ ठहरा या नहीं, कितने दिन में पता चलेगा? — घर की जाँच माहवारी की तारीख़ निकल जाने के बाद भरोसेमंद होती है — यानी अभी से क़रीब दो सप्ताह बाद. उससे पहले की जाँच झूठी नेगेटिव आ सकती है.
सवाल: रोज़ संबंध रखने से संभावना बढ़ती है? — नहीं, हर दो दिन पर काफ़ी है. रोज़ के तय कार्यक्रम का तनाव उल्टा असर करता है. अनुकूल हफ़्ते में सहज रहना ही सबसे अच्छा तरीक़ा है.
सवाल: लड़का-लड़की किसी तरीक़े से चुना जा सकता है? — नहीं. समय, खान-पान या नुस्ख़े से लिंग चुनने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है — और भारत में लिंग जाँच व चयन दोनों PCPNDT क़ानून के तहत अपराध हैं.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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