
स्क्रीन पर एक नन्हा सा टिमटिमाता बिंदु — छठे सप्ताह का सबसे बड़ा तोहफ़ा. इधर आपकी मतली और थकान अपने चढ़ाव पर हैं, और यह भी इसी हफ़्ते की सच्चाई है.
इस हफ़्ते या अगले, स्कैन के कमरे में एक पल आता है जो ज़िंदगी भर याद रहता है. स्क्रीन पर धुँधले से घेरे में एक बिंदु टिमटिमाता है — रुक-रुककर नहीं, लगातार. डॉक्टर कहते हैं, 'यह धड़कन है.'
वह धड़कन मिनट में क़रीब 110 बार की है और हफ़्ते-दर-हफ़्ते तेज़ होगी — आठवें सप्ताह तक 160-170 तक. आपके अपने दिल से लगभग दोगुनी.
पर हर किसी का स्कैन इसी हफ़्ते नहीं होता, और छठे सप्ताह के शुरू में धड़कन न दिखना भी आम है — तारीख़ों का एक हफ़्ते का हेरफेर काफ़ी है. डॉक्टर 'एक हफ़्ते बाद दोबारा' कहें तो यह चिंता की बात नहीं, गिनती की बात है.
भ्रूण अब मूँग के दाने जितना है — क़रीब पाँच मिलीमीटर. उसकी पीठ की तरफ़ मुड़ी हुई बनावट में सिर और पूँछ पहचानी जा सकती है — इस उम्र में इंसान का भ्रूण ऐसा ही दिखता है.
इस हफ़्ते चेहरे की शुरुआत हो रही है: जहाँ आँखें बनेंगी वहाँ दो गहरे बिंदु, जहाँ कान बनेंगे वहाँ दो गड्ढे. हाथ-पैर अभी नन्ही कलियों (लिम्ब बड्स) की शक्ल में फूट रहे हैं.
न्यूरल ट्यूब अब बंद हो चुकी है — फ़ोलिक एसिड का सबसे बड़ा काम पूरा हुआ. अब उस नली के एक सिरे पर दिमाग़ के तीन हिस्से बनने शुरू हो गए हैं.
मतली अब अपने ज़ोर के दौर में घुस रही है — छठे से नौवें सप्ताह का समय ज़्यादातर महिलाओं के लिए सबसे कठिन होता है. यह जानना ही राहत है कि यह चढ़ाव है, पठार नहीं — बारहवें-चौदहवें सप्ताह से उतार शुरू होता है.
खाने की अरुचि इस हफ़्ते अजीब शक्लें लेती है — जो चीज़ कल तक पसंद थी, उसकी महक से उबकाई आती है. और कुछ चीज़ें बेवजह खींचती हैं — खट्टा, इमली, कच्चा आम. शरीर की सुनिए; ज़हर के अलावा इन दिनों की तलब में कोई ग़लत जवाब नहीं है.
क़ब्ज़ भी चुपचाप शुरू हो जाती है — प्रोजेस्टेरोन आँतों की चाल धीमी कर देता है. पानी ज़्यादा, रेशे वाला खाना (दलिया, फल, हरी सब्ज़ी), और हल्की चहलक़दमी — यही इसका इलाज है, जुलाब की गोली नहीं.
पहली डॉक्टर-मुलाक़ात इसी या अगले हफ़्ते हो जाए. साथ ले जाएँ: आख़िरी माहवारी की तारीख़, चल रही दवाओं की सूची, घर की बीमारियों का ब्योरा (शुगर, बीपी, थैलेसीमिया), और अपने सवाल लिखकर — कमरे में जाकर आधे भूल जाते हैं.
पहली मुलाक़ात में जो जाँचें लिखी जाती हैं, वे लगभग तय हैं: ख़ून (हीमोग्लोबिन, ग्रुप, शुगर, थायरॉइड, HIV, हेपेटाइटिस बी, सिफ़लिस), पेशाब, और ज़रूरत हो तो स्कैन. ये सब सरकारी केंद्र पर मुफ़्त हैं.
उल्टी ज़्यादा हो तो नमक-चीनी-पानी का घोल या ORS हाथ में रखें. दिन भर थोड़ा-थोड़ा पीते रहना एक बार में गिलास भर पीने से बेहतर टिकता है.
थकान से लड़िए मत, उसके साथ इंतज़ाम कीजिए — रात की नींद पूरी, दोपहर में जहाँ मुमकिन हो वहाँ बीस मिनट की झपकी, और घर के कामों में मदद माँगना. यह माँगना कमज़ोरी नहीं है; शरीर इस समय भीतर एक अंग बना रहा है.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | छठे सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | स्कैन पर धड़कन दिख सकती है — मिनट में क़रीब 110 |
| बच्चे का आकार | मूँग के दाने जितना — क़रीब 5 मिलीमीटर |
| बन रहा है | आँख-कान की जगहें, हाथ-पैर की कलियाँ, दिमाग़ के हिस्से |
| आपके मुमकिन लक्षण | मतली का ज़ोर, अरुचि-तलब, क़ब्ज़, गहरी थकान |
| अभी करना है | पहली डॉक्टर-मुलाक़ात, शुरुआती जाँचें |
| मुफ़्त कहाँ | सारी शुरुआती जाँचें सरकारी केंद्र पर; PMSMA शिविर हर महीने की 9 को |
| चलता रहे | फ़ोलिक एसिड रोज़ |
रक्तस्राव के साथ पेट में मरोड़ हो, या एक तरफ़ का दर्द बढ़ता जाए — उसी दिन डॉक्टर के पास. छठा सप्ताह एक्टोपिक गर्भ के सामने आने का सबसे आम समय है, और वह टालने से ही ख़तरनाक बनता है.
पानी न टिकने वाली उल्टियाँ, गहरा कम पेशाब, चक्कर — हाइपरएमेसिस के लक्षण हैं; इलाज है, घसीटना नहीं. और बुख़ार के साथ पेशाब में जलन हो तो वह भी उसी दिन की बात है — गर्भ में पेशाब का संक्रमण अनदेखा नहीं छोड़ते.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.
यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.
सवाल: स्कैन में धड़कन नहीं दिखी — गर्भ ख़त्म हो गया? — ज़रूरी नहीं. छठे सप्ताह की शुरुआत में धड़कन का न दिखना आम है — ओव्यूलेशन एक हफ़्ता देर से हुआ हो तो भ्रूण उतना ही छोटा होगा. इसीलिए डॉक्टर हफ़्ते-दस दिन बाद दोहराने को कहते हैं.
सवाल: धड़कन कितनी होनी चाहिए? — छठे सप्ताह में क़रीब 100-120, आठवें तक 160-170. यह आपके दिल से तेज़ है और यही सामान्य है.
सवाल: जी मिचलाने में क्या खाऊँ? — जो टिक जाए. सूखा और सादा सबसे अच्छा टिकता है — बिस्कुट, मुरमुरे, टोस्ट, केला, दही-चावल. गर्म खाने की महक से ज़्यादा दिक़्क़त हो तो ठंडा या कमरे के तापमान का खाना आज़माएँ.
सवाल: संबंध रखना सुरक्षित है? — सामान्य गर्भ में हाँ, पूरी गर्भावस्था में. रक्तस्राव हुआ हो, गर्भपात का इतिहास हो या डॉक्टर ने मना किया हो — तब उनकी सलाह ही नियम है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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