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शिशु का चौथा सप्ताह: एक महीना पूरा — पहली 'कू' की तैयारी

शिशु विकास · theAsianparent · अपडेट किया गया

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शिशु का चौथा सप्ताह: एक महीना पूरा — पहली 'कू' की तैयारी

पहला महीना पूरा — घर की सबसे लंबी लगने वाली चार हफ़्तों की सुरंग पार. बच्चा अब 'देखता' है, सुनकर ठहरता है, और गले में पहली आवाज़ें आज़मा रहा है.

सुरंग का पहला उजाला

किसी ने ठीक कहा है — पहला महीना दिन गिनकर नहीं, रातें गिनकर बीतता है. वह गिनती आज पूरी हुई. और इसी मोड़ पर बच्चा पहली बार 'जवाब' देना शुरू करता है.

जवाब अभी छोटे हैं: आपकी आवाज़ पर रोना थमता है, चेहरा देखकर एकटक ठहरता है, और गला 'कू'-'गू' की पहली आवाज़ें आज़माता है. पर इन छोटे जवाबों के आगे पिछली चार हफ़्तों की हर रात हल्की लगती है.

महीने का यह पड़ाव लेखा-जोखा का भी है — वज़न की चाल, टीकों का कार्ड, और माँ की अपनी जाँच की तारीख़. तीनों इस पन्ने पर हैं.

इस सप्ताह आपका शिशु

नज़र: चेहरों की पहचान अब पक्की है — ख़ासकर माँ का चेहरा. चलती चीज़ को थोड़ी दूर तक आँखों से पकड़ना शुरू है, पर आँखें कभी-कभी अब भी भेंगी-सी चल सकती हैं — इस उम्र में सामान्य है, लगातार टिकी हुई भेंगी नज़र (3-4 महीने के बाद भी) डॉक्टर को दिखाने की बात है.

आवाज़: 'कू', 'अह्ह', 'ऊ' — गले की पहली आवाज़ें इसी दौर की हैं. आप जवाब दीजिए, रुकिए, फिर बोलिए — यह पहला संवाद है, और यही आगे की भाषा की नींव. मीठा सच: बच्चा वही सुर सीख रहा है जो घर बोलता है.

ताक़त: टमी टाइम में सिर अब 45 डिग्री तक उठने लगा है, पल भर को. गोद में सिर अब थोड़ा कम लुढ़कता है — पर सहारा अभी हर बार चाहिए, और चाहिए महीनों तक.

वज़न की महीने भर की रसीद: ज़्यादातर बच्चे पहले महीने में 700 ग्राम से एक किलो तक जोड़ते हैं. आँकड़ा MCP कार्ड पर हो — चाल वहीं दिखती है, याददाश्त में नहीं.

माँ का हाल भी हाल है

छह-सप्ताह की पोस्टपार्टम जाँच अगले हफ़्तों में है — बुक है ना? उसमें टाँके-गर्भाशय-बीपी के साथ मन की जाँच भी उतनी ही ज़रूरी है: उदासी, चिड़चिड़ापन, नींद न आना (बच्चे के सोने पर भी), मन में बुरे ख़याल — इनमें से कुछ भी हो तो उसी मुलाक़ात में कहिए. पोस्टपार्टम डिप्रेशन आम है, और इलाज से पूरा सँभलता है — कहने भर की देर है.

उसी जाँच की दूसरी बड़ी बात परिवार-नियोजन है, और उसका एक तथ्य पहले से जान लीजिए: दूध पिलाना गर्भनिरोध की गारंटी नहीं है. माहवारी लौटने से पहले भी गर्भ ठहर सकता है. कौन सा तरीक़ा दूध के साथ सुरक्षित है — यह सवाल तैयार रखिए.

शरीर 'पहले जैसा' होने का हिसाब अभी मत लगाइए — नौ महीने का बदला नौ हफ़्तों में नहीं लौटता, और लौटने की कोई परीक्षा नहीं है. चालीस दिन पूरे होने पर हल्की सैर और साँस-पेल्विक फ़्लोर की कसरत — बस इतनी शुरुआत काफ़ी है.

इस सप्ताह क्या करना है

छह हफ़्ते के टीकों की तारीख़ (पेंटा-1, OPV-1, रोटा-1, PCV-1, fIPV-1) पक्की कीजिए — ऊपर का ट्रैकर जन्म तिथि से ठीक तारीख़ बता देगा. सरकारी केंद्र पर सब मुफ़्त; MCP कार्ड साथ.

बच्चे के नाम की सरकारी ज़िंदगी शुरू कीजिए — जन्म-प्रमाणपत्र बन गया हो तो उसकी प्रतियाँ, और आधार-नामांकन की जानकारी. आगे हर काग़ज़ यहीं से चलेगा.

रोज़ की 'बातचीत' को रस्म बनाइए — मालिश के समय, डायपर बदलते हुए: बोलिए, गाइए, हर आवाज़ का जवाब दीजिए. लोरी-पाठ जो गर्भ में सुनाते थे, वही अब दोगुना काम करता है — जानी-पहचानी लय सबसे तेज़ शांत करती है.

धूप और विटामिन D — सुबह की हल्की धूप अच्छी आदत है, पर अकेली काफ़ी नहीं मानी जाती; ज़्यादातर बाल-रोग विशेषज्ञ शिशु को विटामिन D की बूँदें (400 IU) लिखते हैं. अगली मुलाक़ात में यह सवाल पूछकर, लिखवाकर लौटिए.

चौथा सप्ताह (1 महीना): एक नज़र में

इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपके शिशु के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.

बातएक महीने पर
नज़रचेहरों की पक्की पहचान; चलती चीज़ पर पल भर की पकड़
आवाज़पहली 'कू'-'गू' — जवाब देना ही पढ़ाई है
ताक़तटमी टाइम में सिर 45° तक, पल भर को
वज़न (महीना 1)~700 ग्राम-1 किलो की बढ़त; MCP कार्ड पर दर्ज
आगे की तारीख़ेंसप्ताह-6 टीके + माँ की पोस्टपार्टम जाँच
पूछना हैविटामिन D की बूँदें (400 IU)
माँमन की जाँच भी जाँच है — छिपाइए मत

डॉक्टर से तुरंत कब मिलना है

पक्की सूची जारी — तीन महीने से छोटे का बुख़ार, दूध छोड़ना, तेज़ साँस, सुस्ती, झटके: उसी समय अस्पताल (108). अब एक और पंक्ति: महीना पूरा होने पर भी बच्चा किसी आवाज़ पर न चौंके-न ठहरे, या आँखें किसी चेहरे पर पल भर भी न टिकें — अगली मुलाक़ात का इंतज़ार छोड़कर यह डॉक्टर से कहिए.

माँ की सूची भी उतनी ही सख़्त: भारी रक्तस्राव की वापसी, बदबूदार स्राव, तेज़ बुख़ार, एक पिंडली की सूजन-दर्द, साँस की अचानक तकलीफ़, या मन में ख़ुद को/बच्चे को नुक़सान के ख़याल — आख़िरी वाले पर उसी दिन मदद माँगिए; यह कमज़ोरी नहीं, आपात स्थिति है और मदद काम करती है.

यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपके शिशु की सेहत, जन्म के हालात और जाँचों का पूरा हाल देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके बाल-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.

दूध और डायपर का रिकॉर्ड रखें

आख़िरी बार दूध कब पिलाया, अगली बार कौन सी तरफ़ से, आज कितने गीले डायपर — इन हफ़्तों के तीनों बड़े सवालों का रिकॉर्ड यह साधन रखता है. सब आपके फ़ोन में ही रहता है.

सारे रिकॉर्ड आपके ही फ़ोन में रहते हैं — हमें नहीं भेजे जाते. स्तन पर कितने मिनट रहा, इससे यह तय नहीं होता कि बच्चे को काफ़ी दूध मिला या नहीं; कुछ बच्चे झटपट पीते हैं. गीले डायपरों की गिनती और डॉक्टर के यहाँ होने वाला वज़न — यही असली पैमाने हैं.

इनके लिए उसी दिन डॉक्टर से मिलें:
  • पाँचवें दिन के बाद दिन में छह से कम गीले डायपर हों, या पेशाब गहरा पीला हो
  • बच्चा इतना उनींदा हो कि दूध न पी सके, या जगाकर पिलाना पड़े
  • जन्म का वज़न दो हफ़्तों में वापस न आया हो, या वज़न घटता ही जाए
  • पीलिया बढ़ रहा हो, या हाथ-पैरों तक पीलापन दिखे
  • मुँह सूखा हो और सिर के ऊपर की मुलायम जगह अंदर धँसी हो
  • छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध काफ़ी है — पानी समेत और कुछ नहीं चाहिए. दूध कम पड़ रहा लगे तो फ़ॉर्मूला शुरू करने से पहले डॉक्टर या स्तनपान सलाहकार से बात करें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: एक महीने का बच्चा कितना देखता है? रंग दिखते हैं? — क़रीब 30-45 सेंटीमीटर सबसे साफ़; रंगों में अभी तेज़ कंट्रास्ट (काला-सफ़ेद-लाल) ही असली आकर्षण है. रंगों की पूरी दुनिया अगले महीनों में खुलती है.

सवाल: बच्चा दूध पीते ही ज़ोर लगाकर लाल हो जाता है, पॉटी के लिए 'लड़ता' है — क़ब्ज़? — नरम पॉटी के साथ ज़ोर-कराहना क़ब्ज़ नहीं है; यह पेट की मांसपेशियों की पढ़ाई है (और इसका नाम भी है — इन्फ़ैन्ट डिस्केज़िया). सख़्त-सूखी गोली जैसी पॉटी हो, तब डॉक्टर.

सवाल: दूध पिलाने वाली माँ क्या-क्या नहीं खा सकती? — सूची छोटी है: शराब नहीं, तंबाकू नहीं, कैफ़ीन नपा हुआ. बाक़ी सादा घर का खाना सब चलता है — 'ठंडी चीज़ें', दाल, गोभी की मनाही वाली सूचियाँ परंपरा हैं, प्रमाण नहीं. बच्चे को किसी ख़ास चीज़ पर हर बार साफ़ तकलीफ़ दिखे, तो वह एक चीज़ डॉक्टर से पूछकर हटाइए.

सवाल: पहला महीना पूरा — अब बाहर सबको दिखाने ले जा सकते हैं? — छोटे, खुले, कम-भीड़ वाले मौक़े ठीक हैं; बंद भीड़ (शादी-हॉल, बाज़ार, अस्पताल की भीड़) से पहले टीकों के दौर तक बचना समझदारी है. जो भी गोद ले — वही पुराना नियम: धुले हाथ, बीमार दूर.

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समीक्षा

  • Nakul PhatakCEO, theAsianparent India & Indonesia
    theAsianparent इंडिया के प्रमुख; एक बच्चे के पिता
  • Roshni ChuganiHead of Marketing, theAsianparent India & Singapore
    मां और शिशु क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव; दो बच्चों की मां

प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम