
एक तरफ़ पीढ़ी-अक्षर, दूसरी तरफ़ नामकरण और नक्षत्र का अक्षर। भारत, सिंगापुर, अमेरिका या कनाडा में रहने वाले हिंदी–चीनी परिवारों के लिए व्यावहारिक गाइड — उस नाम से शुरू जो पंद्रह सौ साल पहले भारत से चीन गया था।
बच्ची पाँच दिन की है और फ़ॉर्म में नाम का ख़ाना ख़ाली है। नानी पूछती हैं कि पंडित जी का दिया अक्षर आएगा या नहीं; उधर पिता के ताऊ कह चुके हैं कि इस पीढ़ी के हर बच्चे के नाम में एक साझा अक्षर आना है।
दोनों घरों से एक ही सवाल आता है — इस नाम का चीनी रूप क्या होगा? जवाब कोई नहीं है: चीनी नाम अक्षरों से बनता है — पहले अर्थ, ध्वनि पीछे, अक्सर एक साझा पीढ़ी-अक्षर के साथ। भारतीय नाम उलटा बनता है।
लिप्यंतरण ध्वनि दे देगा, पर उसके अक्षर अपना अर्थ लाएँगे — वह नया नाम होगा, अनुवाद नहीं। इसीलिए यहाँ कोई चीनी अक्षर नहीं है; वह चुनाव घर के चीनी-साक्षर बड़े का है।
यह बहस नई नहीं है: बौद्ध धर्म के साथ सदियों तक भारतीय नाम चीनी में जाते रहे। साफ़ उदाहरण दामो है — 'धर्म' का चीनी रूप, जिस नाम से चीन में बोधिधर्म जाने जाते हैं: परंपरा के अनुसार दक्षिण भारत के भिक्षु, और चान परंपरा के आदि आचार्य।
इतिहासकार कहते हैं कि उनका समकालीन ब्यौरा बहुत कम है — फिर भी पंद्रह सौ साल से वे उसी नाम से पूजे जाते हैं। कुमारजीव के पिता भारतीय थे और उन्होंने संस्कृत ग्रंथ चीनी में उतारे; ह्वेनसांग तथा यिजिंग नालंदा में पढ़े।
यानी सवाल दो अजनबी संस्कृतियों के समझौते का नहीं है; 'बोधि' भी चीनी बौद्ध शब्दावली में लिप्यंतरण बनकर पहुँचा था।
यहाँ टकराव वैसा नहीं जैसा दक्षिण भारत में, जहाँ स्थायी कुलनाम अक्सर होता ही नहीं। हिंदी-भाषी घर में उपनाम पहले से है।
टकराव तीन दूसरी जगह है: उपनाम किसका और किस क्रम में; मध्य नाम मिलेगा या नहीं, क्योंकि चीनी नाम-रचना में उसकी जगह ही नहीं होती; और लंबाई — चीनी नाम एक-दो अक्षर का, हिंदी नाम अक्सर तीन-चार शब्दांश के।
हल सीधा है: जिस संस्कृति का उपनाम जाएगा, दिया हुआ नाम दूसरी का होगा। दोनों तरफ़ के दादा-दादी इसे पढ़ सकते हैं, और बहस नाम के हर हिस्से पर अलग नहीं लड़ी जाती।
तय कीजिए कि पहले किससे पूछा जाएगा — जिससे बाद में पूछा जाता है उसे लगता है कि पूछा ही नहीं गया। पीढ़ी-अक्षर पर अड़ना ज़िद नहीं; वह अक्षर वंश-क्रम में बच्चे की जगह है।
भारतीय पक्ष की अटल चीज़ें भी असली हैं — कुलदेवता, दादा का नाम, नामकरण की तारीख़, नक्षत्र-अक्षर। एक परिवार की सारी भतीजियों के नाम एक तर्ज़ पर थे; बेटी के अलग पड़ने का डर असली है। ख़तरा यह कि नाम हर बड़े को संतुष्ट करे और उसे अकेले बच्चा ढोए।
असली शर्त यह नहीं कि नाम दोनों भाषाओं में चले, बल्कि यह कि जो दादी-नानी उसे सबसे ज़्यादा पुकारेंगी वे उसे बोल सकें — रोज़ की देखभाल अक्सर उन्हीं के हाथ होती है, और अटकती ज़ुबान नाम को कुछ और बना देती है।
चीनी नाम एक-दो शब्दांश का होता है, इसलिए लंबा नाम अपने आप छँट जाता है; मंदारिन में शब्दांश के आरंभ में दो व्यंजन नहीं आते, तो प्र, ध्र, क्ष जैसे जोड़ टूटते हैं; स्वर कम हैं; और r, v तथा th की ध्वनियाँ वहाँ हैं ही नहीं।
पर चीनी एक भाषा नहीं है — मंदारिन, कैंटोनीज़, होक्किएन, हक्का के नियम अलग हैं, और हर व्यक्ति का अपना उच्चारण। भरोसेमंद जाँच एक ही है: नाम फ़ोन पर बुलवाइए, और हफ़्ते भर बाद बिना याद दिलाए फिर पूछिए।
एक परिवार ने पसंदीदा नाम आख़िरी दिन छोड़ा, जब पिता को समझ आया कि चीनी रिश्तेदारों को वह 'आई-या' जैसा सुनाई देगा — झुँझलाहट का उद्गार। इसलिए पूछिए नहीं कि 'क्या आप इसे बोल सकते हैं', पूछिए 'यह किसी चीज़ जैसा लगता है क्या' — दोनों दिशाओं में, और विदेश में अंग्रेज़ी में भी। नीचे के नाम रोज़ टूटेंगे।
| नाम | अंग्रेज़ी | टिप्पणी |
|---|---|---|
| प्रत्यूष | Pratyush | शुरू में ही संयुक्त व्यंजन, फिर दूसरा जोड़ — दोनों टूटेंगे |
| ध्रुव | Dhruv | ध्र का जोड़ और अंत में v; दोनों मंदारिन के ढाँचे से बाहर |
| कृष्णा | Krishna | कृ का जोड़ और बीच का ष्ण — रोज़ पुकारने में यही सबसे पहले घिसता है |
| वैष्णवी | Vaishnavi | चार शब्दांश, एक संयुक्त अक्षर और बीच में v |
| अर्जुन | Arjun | र और ज का जोड़ मंदारिन में साथ नहीं आता |
| ऋत्विक | Ritvik | शुरू का ऋ, बीच का त्व, अंत का क — तीन अलग मुश्किलें |
| हर्षित | Harshit | र्ष का जोड़, और अंत की t ध्वनि मंदारिन में शब्द के अंत में नहीं आती |
| त्रिशा | Trisha | त्र का जोड़ आरंभ में ही; अक्सर 'तिशा' बनकर रह जाता है |
इस पन्ने का सबसे साफ़ जवाब शायद जय है — संस्कृत का जय, यानी विजय। चीनी तरफ़ Jay एक जाना-पहचाना अंग्रेज़ी नाम है: ताइवान के Jay Chou इसी नाम से जाने जाते हैं, और वह उनके अपने चीनी नाम से निकला है। एक ही शब्दांश, इसलिए दादी-नानी परीक्षा में टूटने को कुछ बचता नहीं; अर्थ असली है; अंग्रेज़ी में भी नहीं अटकता।
एक ईमानदार बात साथ में: जय इतना छोटा है कि इसका छोटा रूप बचता ही नहीं — किसी के लिए ख़ूबी, किसी के लिए कमी। वर्तनी पहले तय कर लीजिए: Jai और Jay दोनों चलते हैं।
शान भी क़रीब है — हिंदी-उर्दू में गौरव, वैभव, आन-बान। चीनी तरफ़ shan वह ध्वनि है जो अक्षर और स्वराघात के हिसाब से कई शब्दों से मेल खाती है; इनमें पहाड़ और भलाई के अर्थ वाले शब्द भी हैं। अक्षर घर का चीनी-साक्षर सदस्य चुनेगा।
तीसरा है जिया — संस्कृत के 'जीव' से; हिंदी-उर्दू में जी, जिय, जिया, यानी मन, प्राण, हृदय। चीनी नामों में Jia बहुत आम ध्वनि है; दोनों एक नाम नहीं, पर दोनों मुँह में बैठ जाते हैं।
| नाम | अंग्रेज़ी | अर्थ |
|---|---|---|
| जय | Jay | विजय, जीत |
| शान | Shan | गौरव, वैभव, आन-बान; हिंदी-उर्दू में प्रचलित |
| जिया | Jiya | मन, प्राण, हृदय; संस्कृत 'जीव' से |
| दीया | Diya | दीपक, छोटा दीप |
| सुमन | Suman | फूल; अच्छे मन वाला |
| नमन | Naman | प्रणाम, झुककर आदर देना |
| अमन | Aman | शांति, चैन, सुरक्षा |
| मीना | Meena | मछली, संस्कृत 'मीन' से; फ़ारसी में मीनाकारी का रंग-काम |
| नैना | Naina | आँखें, नयन |
| नयन | Nayan | आँख, दृष्टि |
| ईशा | Isha | स्वामिनी, अधिष्ठात्री; 'ईश' का स्त्रीलिंग रूप |
| माया | Maya | भ्रम तथा सृष्टि की रचना-शक्ति; बुद्ध की माता मायादेवी का नाम |
| मोहन | Mohan | मन मोह लेने वाला; कृष्ण का एक नाम |
| बोधि | Bodhi | जागृति, ज्ञान का उदय |
पहली और सबसे कारगर है उपनाम-पुल: पूरा नाम अपनी संस्कृति का, पर ऐसा जिसका स्वाभाविक छोटा रूप दूसरी तरफ़ भी घर जैसा लगे।
इसकी ईमानदार सीमा: यह ज़्यादातर एक ही दिशा में चलती है। परिवार बताते हैं कि ऐसा चीनी नाम, जिसका छोटा रूप कोई भारतीय नाम बने, लगभग नहीं मिलता।
दूसरी है अर्थ का जोड़ा: दो नाम, एक भारतीय एक चीनी, पर जोड़ अर्थ का — चाँद के साथ चाँद, फूल के साथ फूल। पहले परिवार अर्थ तय करे, फिर जो चीनी जानता है वह नाम चुने।
तीसरी है तीन-हिस्से वाला ढाँचा — अंग्रेज़ी या भारतीय नाम, फिर चीनी नाम, फिर उपनाम। सिंगापुर में यह आम है और पश्चिम में बढ़ रहा है; क़ीमत यह कि पासपोर्ट पर नाम लंबा होता है।
| नाम | अंग्रेज़ी | टिप्पणी |
|---|---|---|
| सुरेश | Suresh → Su | 'सु' चीनी नामों और उपनामों में सुनी जाने वाली ध्वनि है |
| रोहन | Rohan → Han | छोटा, खुला, और दोनों तरफ़ आसानी से बैठता है |
| अविनाश | Avinash → Abi | काग़ज़ पर पूरा भारतीय नाम, रोज़ का रूप दो शब्दांश का |
| आदित्य | Aaditya → Aadi | चार शब्दांश का नाम अपने आप दो पर आ जाता है |
| मोहन | Mohan → Mo | खुला शब्दांश, अंत में कोई व्यंजन नहीं |
प्रश्न: क्या बच्चे के दो नाम — भारतीय और चीनी — क़ानूनी रूप से रखे जा सकते हैं? हाँ। क़ानूनी नाम एक ही होता है — जो जन्म-प्रमाणपत्र पर है; दूसरा घर का या चीनी परिवार-नाम रह सकता है। दिक़्क़त तब, जब दोनों अलग-अलग काग़ज़ों पर चढ़ जाएँ।
प्रश्न: भारत के जन्म-प्रमाणपत्र पर क्या जाता है, और विदेश में क्या? भारत में जन्म बिना नाम के दर्ज हो सकता है; नाम आमतौर पर बारह महीने के भीतर बिना शुल्क जोड़ा जा सकता है (नियम राज्यवार अलग हैं — रजिस्ट्रार से पुष्टि कीजिए)। यानी अक्षर तय होने में देर हो तो जल्दबाज़ी नहीं; विदेश में समयसीमा अक्सर छोटी होती है।
प्रश्न: क्या चीनी-सा नाम भारतीय स्कूल में मुश्किल करेगा, या भारतीय नाम चीनी स्कूल में? मुश्किल विदेशीपन से नहीं, उच्चारण से आती है: जिसे शिक्षक पहली हाज़िरी में सही बोल पाते हैं वह कहीं अजनबी नहीं रहता।
प्रश्न: नामकरण का क्या करें जब उसे सिर्फ़ एक पक्ष मानता हो? इसे मानने-न-मानने का नहीं, भूमिका का सवाल बनाइए: जो पक्ष संस्कार करता है वह रीति तय करे, दूसरे को एक साफ़ काम मिले — नाम पहली बार कान में बोलना, या दोनों नाम एक कार्ड पर छपवाना।
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम