
दूसरी तिमाही में आपका स्वागत है — मतली विदा, ताक़त हाज़िर, पेट अभी हल्का. अगले चौदह हफ़्ते गर्भावस्था के सबसे अच्छे हफ़्ते माने जाते हैं. इनका पूरा इस्तेमाल कीजिए.
प्रसूति की किताबों में दूसरी तिमाही का एक उपनाम है — हनीमून पीरियड. नाम मज़ाक़ नहीं है: मतली गई, थकान गई, पेट अभी रास्ते में नहीं आता, और शरीर महीनों में पहली बार अपना लगता है.
यह उपनाम एक चेतावनी भी है — यह दौर बीत जाता है. तीसरी तिमाही में सीढ़ियाँ चढ़ना मशक़्क़त बनेगा और नींद टुकड़ों में मिलेगी. जो कुछ करना-घूमना-निपटाना है, उसका समय यही है.
और इसी दौर की दहलीज़ पर एक तोहफ़े का इंतज़ार भी शुरू होता है — पहली हलचल. औसतन वह अठारहवें-बीसवें सप्ताह में महसूस होती है, पर उसकी प्रतीक्षा आज से मीठी होने लगती है.
बच्चा अब बड़े नींबू जितना है — साढ़े आठ सेंटीमीटर, क़रीब पैंतालीस ग्राम. गर्दन साफ़ बन गई है और सिर अब सीधा उठा हुआ है — ठुड्डी छाती से लग कर नहीं बैठी.
चेहरे की मांसपेशियाँ काम करने लगी हैं — बच्चा भौंहें सिकोड़ता है, मुँह बनाता है, त्योरी चढ़ाता है. ये भाव अभी बिना मतलब के अभ्यास हैं, पर स्कैन में दिख जाएँ तो माँ-बाप की हँसी छूट जाती है.
शरीर पर लानुगो — महीन रोओं की परत — उगनी शुरू हुई है, जो पानी के भीतर त्वचा की हिफ़ाज़त करती है और जन्म से पहले ज़्यादातर झड़ जाती है. जिगर पित्त बनाने लगा है, तिल्ली ख़ून की कोशिकाएँ.
पेट अब हल्का सा गोल दिखना शुरू हो सकता है — कुर्ती में छिपता हुआ, ग़ौर से देखने पर पकड़ में आता. 'अरे, लगने लगा!' वाली टिप्पणियाँ इसी दौर से शुरू होती हैं.
भूख अब पूरी लौट आई है — और उसके साथ वह मशहूर सवाल: 'क्या खाने का मन कर रहा है?' तलब सामान्य हैं; बस दो नियम — साफ़ बना हुआ हो, और मिट्टी-चॉक-कच्चा चावल जैसी ग़ैर-खाने की चीज़ की तलब (पाइका) हो तो छिपाइए मत, डॉक्टर को बताइए — वह अक्सर ख़ून की कमी की निशानी है.
कुछ महिलाओं को इस दौर में नाक से हल्का ख़ून आता है — बढ़े रक्त-संचार से नाक की महीन नसें फट जाती हैं. सिर आगे झुकाकर, नाक दबाकर दस मिनट — यही घरेलू इलाज है. बार-बार हो तो डॉक्टर से कहें.
अब से वज़न की चाल पर नज़र रखें — दूसरी तिमाही में औसतन आधा किलो प्रति सप्ताह से कम की बढ़त सही मानी जाती है (शुरुआती वज़न के हिसाब से डॉक्टर आपकी सीमा बताएँगे). हर मुलाक़ात का वज़न MCP कार्ड में दर्ज होता रहे.
प्रोटीन अब हर खाने में हो — दाल, दही, पनीर, अंडा, मूँगफली, सोया. भारतीय गर्भवती थाली की सबसे आम कमी प्रोटीन ही है; रोटी-चावल अपने आप हो जाते हैं, दाल-दही याद से रखनी पड़ती है.
सफ़र की योजना बनी हो तो इसी से अट्ठाईसवें सप्ताह की खिड़की में रखिए. ट्रेन सबसे आरामदेह; हवाई यात्रा सामान्य गर्भ में सुरक्षित (एयरलाइन की सप्ताह-सीमा देख लें); लंबी सड़क-यात्रा में हर डेढ़-दो घंटे में रुककर टहलना ज़रूरी.
पेट पर खिंचाव के निशान (स्ट्रेच मार्क्स) की चिंता हो तो सच जान लीजिए: कोई क्रीम उन्हें रोकने का प्रमाण नहीं रखती — वे त्वचा की बनावट और ख़ानदान से तय होते हैं. नारियल तेल या कोई भी मॉइस्चराइज़र खुजली से राहत देता है; बस 'निशान मिटाने' के महँगे वादों पर पैसा मत लगाइए.
इस सप्ताह की ज़रूरी बातें एक जगह. आपकी सेहत के हिसाब से डॉक्टर इनमें बदलाव बता सकते हैं.
| बात | चौदहवें सप्ताह में |
|---|---|
| मुख्य घटना | दूसरी तिमाही शुरू — सबसे आरामदेह दौर |
| बच्चे का आकार | बड़े नींबू जितना — 8.5 सेंटीमीटर, 45 ग्राम |
| बच्चा कर रहा है | चेहरे के भाव, सीधा सिर; शरीर पर लानुगो |
| आपके मुमकिन लक्षण | लौटी भूख, हल्का गोल पेट, कभी नाक से ख़ून |
| खाने में | हर खाने में प्रोटीन — दाल, दही, पनीर, अंडा |
| वज़न | दूसरी तिमाही में धीमी, स्थिर बढ़त — कार्ड में दर्ज |
| सबसे सही समय | सफ़र और बड़े काम — 14 से 28 सप्ताह की खिड़की |
पुरानी सूची क़ायम है — रक्तस्राव, बढ़ता दर्द, तेज़ बुख़ार, पेशाब की जलन, पिंडली की एक तरफ़ा सूजन: उसी दिन डॉक्टर.
पाइका — मिट्टी, चॉक, राख, कच्चे चावल की तलब — शर्म से छिपाने की चीज़ नहीं, ख़ून की कमी की जाँच कराने की चीज़ है. भारत में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया बहुत आम है और IFA की गोली उसका सीधा इलाज — गोली छूट रही हो तो यह भी डॉक्टर से कह दीजिए.
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है. यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता. आपकी सेहत, चल रही दवाएँ और पिछली गर्भावस्थाओं का अनुभव देखकर सलाह वही दे सकते हैं — आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर.
आख़िरी माहवारी शुरू होने का पहला दिन और चक्र की लंबाई डालें — प्रसव की अनुमानित तारीख़, आज कौन सा सप्ताह चल रहा है और एनॉमली स्कैन कब कराना है, सब यहीं दिखेगा.
यह सिर्फ़ अनुमान है — ज़्यादातर बच्चे ठीक उसी तारीख़ पर पैदा नहीं होते. पहले तीन महीनों में हुआ स्कैन इससे सटीक तारीख़ बताता है; आख़िर में आपके डॉक्टर जो कहें, वही सही.
सवाल: लोग कह रहे हैं पेट छोटा है / बड़ा है / ऊँचा है / नीचा है — इसका कोई मतलब? — नहीं. पेट की शक्ल आपकी क़द-काठी, मांसपेशियों और बच्चे की करवट से बनती है — उसकी सेहत या लिंग से नहीं. बच्चे का हाल स्कैन और जाँचें बताती हैं, पड़ोस की आँटी नहीं.
सवाल: घी-मक्खन खाने से बच्चे को ताक़त मिलती है? — घी अच्छे भोजन का हिस्सा हो सकता है, पर 'जितना ज़्यादा उतनी ताक़त' वाला हिसाब ग़लत है — ज़्यादा घी सिर्फ़ माँ का वज़न चढ़ाता है. ताक़त की असली ख़ुराक प्रोटीन और आयरन है.
सवाल: सीधी (पीठ के बल) लेटना अब बिल्कुल मना है? — बिल्कुल मना नहीं — थोड़ी देर लेटने से कुछ नहीं होता. लंबी नींद के लिए करवट बेहतर है, और आगे के महीनों में पीठ के बल लेटने से चक्कर भी आ सकता है. शरीर ख़ुद बता देता है; उसकी सुनिए.
सवाल: संबंध के लिए दूसरी तिमाही के बारे में जो कहते हैं, सच है? — हाँ, सामान्य गर्भ में यह दौर सबसे सहज माना जाता है — मतली गई, पेट छोटा, और बढ़ा रक्त-संचार अपना काम करता है. बच्चे को इससे कोई ख़तरा नहीं; वह पानी की थैली में पूरी तरह महफ़ूज़ है.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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