जन्म तारीख आणि वेळ द्या — बाळाचे नक्षत्र, कोणते चरण, राशी आणि नाव कोणत्या अक्षराने सुरू करावे हे हे साधन सांगेल. नक्षत्र दिवसातून एकदा बदलते, म्हणून वेळही महत्त्वाची आहे.
जन्म तारीख द्या. वेळ माहीत असेल तर तीही द्या — का, ते पुढच्या भागात.
| नक्षत्र | चरण | राशी | अक्षर |
|---|---|---|---|
| अश्विनी | 1 | मेष | चू |
| 2 | मेष | चे | |
| 3 | मेष | चो | |
| 4 | मेष | ला | |
| भरणी | 1 | मेष | ली |
| 2 | मेष | लू | |
| 3 | मेष | ले | |
| 4 | मेष | लो | |
| कृत्तिका | 1 | मेष | अ |
| 2 | वृषभ | ई | |
| 3 | वृषभ | उ | |
| 4 | वृषभ | ए | |
| रोहिणी | 1 | वृषभ | ओ |
| 2 | वृषभ | वा | |
| 3 | वृषभ | वी | |
| 4 | वृषभ | वू | |
| मृगशीर्ष | 1 | वृषभ | वे |
| 2 | वृषभ | वो | |
| 3 | मिथुन | का | |
| 4 | मिथुन | की | |
| आर्द्रा | 1 | मिथुन | कू |
| 2 | मिथुन | घ | |
| 3 | मिथुन | ङ | |
| 4 | मिथुन | छ | |
| पुनर्वसु | 1 | मिथुन | के |
| 2 | मिथुन | को | |
| 3 | मिथुन | हा | |
| 4 | कर्क | ही | |
| पुष्य | 1 | कर्क | हू |
| 2 | कर्क | हे | |
| 3 | कर्क | हो | |
| 4 | कर्क | डा | |
| आश्लेषा | 1 | कर्क | डी |
| 2 | कर्क | डू | |
| 3 | कर्क | डे | |
| 4 | कर्क | डो | |
| मघा | 1 | सिंह | मा |
| 2 | सिंह | मी | |
| 3 | सिंह | मू | |
| 4 | सिंह | मे | |
| पूर्वा फाल्गुनी | 1 | सिंह | मो |
| 2 | सिंह | टा | |
| 3 | सिंह | टी | |
| 4 | सिंह | टू | |
| उत्तरा फाल्गुनी | 1 | सिंह | टे |
| 2 | कन्या | टो | |
| 3 | कन्या | पा | |
| 4 | कन्या | पी | |
| हस्त | 1 | कन्या | पू |
| 2 | कन्या | ष | |
| 3 | कन्या | ण | |
| 4 | कन्या | ठ | |
| चित्रा | 1 | कन्या | पे |
| 2 | कन्या | पो | |
| 3 | तूळ | रा | |
| 4 | तूळ | री | |
| स्वाती | 1 | तूळ | रू |
| 2 | तूळ | रे | |
| 3 | तूळ | रो | |
| 4 | तूळ | ता | |
| विशाखा | 1 | तूळ | ती |
| 2 | तूळ | तू | |
| 3 | तूळ | ते | |
| 4 | वृश्चिक | तो | |
| अनुराधा | 1 | वृश्चिक | ना |
| 2 | वृश्चिक | नी | |
| 3 | वृश्चिक | नू | |
| 4 | वृश्चिक | ने | |
| ज्येष्ठा | 1 | वृश्चिक | नो |
| 2 | वृश्चिक | या | |
| 3 | वृश्चिक | यी | |
| 4 | वृश्चिक | यू | |
| मूळ | 1 | धनु | ये |
| 2 | धनु | यो | |
| 3 | धनु | भा | |
| 4 | धनु | भी | |
| पूर्वाषाढा | 1 | धनु | भू |
| 2 | धनु | धा | |
| 3 | धनु | फा | |
| 4 | धनु | ढा | |
| उत्तराषाढा | 1 | धनु | भे |
| 2 | मकर | भो | |
| 3 | मकर | जा | |
| 4 | मकर | जी | |
| श्रवण | 1 | मकर | खी |
| 2 | मकर | खू | |
| 3 | मकर | खे | |
| 4 | मकर | खो | |
| धनिष्ठा | 1 | मकर | गा |
| 2 | मकर | गी | |
| 3 | कुंभ | गू | |
| 4 | कुंभ | गे | |
| शततारका | 1 | कुंभ | गो |
| 2 | कुंभ | सा | |
| 3 | कुंभ | सी | |
| 4 | कुंभ | सू | |
| पूर्वा भाद्रपदा | 1 | कुंभ | से |
| 2 | कुंभ | सो | |
| 3 | कुंभ | दा | |
| 4 | मीन | दी | |
| उत्तरा भाद्रपदा | 1 | मीन | दू |
| 2 | मीन | थ | |
| 3 | मीन | झ | |
| 4 | मीन | ञ | |
| रेवती | 1 | मीन | दे |
| 2 | मीन | दो | |
| 3 | मीन | चा | |
| 4 | मीन | ची |
गणना लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांशावर आधारित आहे — भारत सरकारच्या पंचांग सुधारणा समितीने हेच स्वीकारले आहे. रामन, कृष्णमूर्ती यांसारख्या इतर पद्धतींत एक ते दोन अंशांचा फरक पडतो; सीमेजवळ जन्म असल्यास नक्षत्रच बदलू शकते. हा परंपरांमधील फरक आहे, चूक नाही. तुमचे कुटुंबीय ज्योतिषी सांगतात त्यापेक्षा वेगळे उत्तर आले, तर ते कोणता अयनांश वापरतात हे विचारा.
चंद्राला एक नक्षत्र ओलांडायला साधारण साडेचोवीस तास लागतात. म्हणजे नक्षत्र दिवसातून जवळपास एकदा बदलते. सकाळी जन्मलेल्या बाळाचे आणि त्याच तारखेला रात्री जन्मलेल्या बाळाचे नक्षत्र वेगळे असू शकते.
फक्त तारीख विचारणारी साधने हे लपवतात. ती मनातल्या मनात एक वेळ गृहीत धरतात, पण कोणती हे सांगत नाहीत. वेळ माहीत नसेल तर आम्ही दुपारी बारा वाजता धरतो आणि तसे स्क्रीनवरच सांगतो.
शिवाय तुमचे नक्षत्र नेमके कधी सुरू होते आणि कधी संपते ती वेळही साधन दाखवते. जन्म वेळ त्या सीमेजवळ असेल तर इशारा देते. हे तुम्ही घरच्या पंचांगाशी ताडून पाहू शकता.
आकाशात चंद्र ज्या मार्गाने फिरतो त्याचे सत्तावीस समान भाग केले आहेत. प्रत्येक भाग तेरा अंश वीस कला. बाळाच्या जन्माच्या क्षणी चंद्र ज्या भागात असतो, तेच त्याचे नक्षत्र.
प्रत्येक नक्षत्राचे पुढे चार चरण होतात. नाव कोणत्या अक्षराने सुरू करावे हे फक्त नक्षत्रावर नाही, चरणावरही ठरते. नुसते अश्विनी नक्षत्र माहीत असून पुरत नाही — कोणते चरण हे कळले तरच अक्षर मिळते.
राशी ही वेगळी विभागणी. तोच मार्ग बारा भागांत विभागला की राशी मिळते. एखादे नक्षत्र दोन राशींच्या मधे येते — मृगशीर्षाची पहिली दोन चरणे वृषभ, पुढची दोन मिथुन. म्हणूनच तक्त्यात चरणानुसार दिले आहे.
खगोलशास्त्र देणारी स्थिती आणि भारतीय परंपरा वापरणारी स्थिती यांच्यात एक फरक असतो. त्याला अयनांश म्हणतात. आम्ही लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश वापरतो — भारत सरकारच्या पंचांग सुधारणा समितीने हाच स्वीकारला आहे.
रामन, कृष्णमूर्ती अशा इतर पद्धतींत एक ते दोन अंशांचा फरक पडतो. एक अंश म्हणजे नक्षत्राचा तेरावा हिस्सा — सीमेजवळ जन्म असेल तर नक्षत्रच बदलेल एवढा मोठा.
त्यामुळे कुटुंबीय ज्योतिषी सांगतात त्यापेक्षा वेगळे उत्तर आले, तर पहिला प्रश्न 'कोण बरोबर' हा नाही — 'कोणता अयनांश' हा आहे. हा परंपरांमधील फरक आहे, गणिती चूक नाही.
प्रश्न: जन्म वेळ अजिबात माहीत नाही, काय करावे? — साधन दुपारी बारा वाजता धरेल. तो दिवसाचा मध्य आहे, त्यामुळे जास्तीत जास्त बारा तासांचीच चूक होऊ शकते. रुग्णालयाच्या जन्म दाखल्यावर वेळ असते — शक्य असल्यास ती पाहा.
प्रश्न: नक्षत्र बदलण्याच्या वेळेजवळ जन्म असेल तर? — साधन तसा इशारा देते. अशा वेळी काही मिनिटांचा फरकही नक्षत्र बदलतो, म्हणून पत्रिका करणाऱ्यांकडून एकदा खात्री करून घ्या.
प्रश्न: नक्षत्राच्या अक्षरावरच नाव ठेवायलाच हवे का? — असा कोणताही नियम नाही. ही एक परंपरा आहे, अनेकांना अर्थपूर्ण वाटणारी. तुमच्या घरात ती पाळायची असेल तर हे साधन अक्षर देईल; नसेल तर तेही ठीक.
प्रश्न: हे साधन पत्रिका बनवते का? — नाही. हे फक्त चंद्राच्या स्थितीवरून नक्षत्र, चरण आणि राशी सांगते. फल, गुण, दशा — यांतले काहीही हे सांगत नाही.
प्रकाशक: theAsianparent संपादकीय टीम
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